अर्थ के सीएमडी डॉ. अरविंदर सिंह ने खारदुंगला दर्रे पर बनाया विश्व रिकॉर्ड
अर्थ ग्रुप राजस्थान (Rajasthan) के सीईओ और सीएमडी डॉ. अरविंदर सिंह (Dr. Arvinder Singh) ने 80 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद क्वाड बाइक पर लेह लद्दाख के खारदुंगला दर्रे तक के खतरनाक रास्ते को पार कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। ऐसा करने वाले वे पहले और एकमात्र शारीरिक रूप से 80 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्ति हैं। उनका नार्म वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (London) में दर्ज किया गया है।

उदयपुर : अर्थ ग्रुप राजस्थान (Rajasthan) के सीईओ और सीएमडी डॉ. अरविंदर सिंह (Dr. Arvinder Singh) ने 80 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद क्वाड बाइक पर लेह-लद्दाख के खारदुंगला दर्रे तक के खतरनाक रास्ते को पार कर विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया। यह रिकॉर्ड हासिल करने वाले वे पहले और एकमात्र व्यक्ति हैं। उनका यह रिकॉर्ड नार्म वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, लंदन (London) में दर्ज किया गया।
साहसी प्रयास में डॉ. सिंह ने अपने अदम्य साहस और हौसलों के दम पर यह उपलब्धि हासिल की। यह रास्ता कड़ाके की ठंड, दुर्गम पहाड़ियों और ऑक्सीजन की कमी के कारण अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। दुनिया के सबसे ऊंचे मोटरेबल शिखर पर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए लद्दाख के ले. राज्यपाल, डॉ. बी. डी. मिश्रा ने उन्हें विश्व रिकॉर्ड प्रमाण पत्र प्रदान किया और ट्वीट के माध्यम से बधाई दी। लेह-लद्दाख में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पी. डी. नित्या, चीफ एक्जीक्यूटिव काउंसलर ताशी ग्यालसन, एक्जीक्यूटिव काउंसलर गुलाम मेहदी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नूरजिन अंगमो ने भी उन्हें बधाई दी।
डॉ. सिंह ने विश्व स्तर पर अपनी उत्कृष्टता कई बार साबित की है। पिछले वर्ष उन्होंने एकेडमिक एक्सीलेंस का अनूठा विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनके पास 123 डिग्रियां, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट्स हैं। इसके अलावा, डॉ. सिंह भारत के प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों में से एक, भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में टॉप करने वाले एकमात्र डॉक्टर के रूप में जाने जाते हैं।
अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और बिजनेस लीडरशिप के अलावा, डॉ. सिंह ने साहसिक खेलों में भी सराहनीय रिकॉर्ड बनाए हैं। वे मालदीव में सफलतापूर्वक स्कूबा डाइविंग करने वाले पहले शारीरिक रूप से दिव्यांग व्यक्ति हैं। उनके पास पैरा वर्ग में पिस्टल शूटिंग का राज्य स्तर का स्वर्ण पदक भी है। ये उपलब्धियां केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं हैं, बल्कि पूरे दिव्यांग समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण हैं।

