Pratahkal - Jaipur News Update - Rajasthan Tourism Minister inaugurated RDTM 2023
जयपुर : राजस्थान (Rajasthan) अपनी रूरल टूरिज्म पॉलिसी (Rural Tourism Policy), फिल्म प्रमोशन पॉलिसी (Film Promotion Policy) जैसी दूरदर्शी पर्यटन नीतियों के साथ देश भर के अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श है। यह पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने वाला पहला राज्य है और अब तक यूडी टैक्स और बिजली छूट जैसे क्षेत्रों में लगभग 1000 होटल भी इससे लाभान्वित हुए हैं। राज्य सरकार ने टूरिज्म डवलपमेंट फंड को भी 1000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 1500 करोड़ रुपए कर दिया है। इसके अतिरिक्त, राज्य में 5 अंतरराष्ट्रीय गोल्फ कोर्स (International Golf Course) और 5 माईस सेंटर भी खुल रहे हैं। यह बात राजस्थान टूरिज्म डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (आरटीडीसी) के चेयरमैन, धर्मेंद्र सिंह राठौड़ ने आज राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में राजस्थान डोमेस्टिक ट्रैवल मार्ट (आरडीटीएम) के तीसरे संस्करण के उद्घाटन पर कही।
इससे पहले मार्ट का उद्घाटन राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेन्द्र सिंह ने फीता काटकर किया। अपने संदेश में उन्होंने कहा, पिछले वर्ष राजस्थान डोमेस्टिक ट्रैवल मार्ट के दूसरे संस्करण की बड़ी सफलता को देखते हुए, हम इस वर्ष आरडीटीएम का एक और संस्करण आयोजित कर रहे हैं। महामारी की बड़ी मार झेलने के बाद आरडीटीएम ने राजस्थान में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा दिया। मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि राजस्थान आज देश के सबसे पसंदीदा डेस्टिनेशंस में से एक है। न केवल अपने पर्यटन उत्पादों के कारण बल्कि अपनी पर्यटन अनुकूल नीतियों, योजनाओं और पहलों के कारण भी। मैं आरडीटीएम 2023 की सफलता और सार्थक नेटवर्किंग की कामना करता हूं।
आरडीटीएम का आयोजन राजस्थान सरकार के पर्यटन विभाग और फेडरेशन ऑफ हॉस्पिटैलिटी एंड टूरिज्म ऑफ राजस्थान (एफएचटीआर) द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष मार्ट की थीम 'सस्टेनेबल टूरिज्म' है ।
राजस्थान लघु उद्योग निगम के चेयरमैन राजीव अरोड़ा ने कहा कि सरकार की पहल के कारण वर्ष 2019 में 187 प्रोजेक्ट्स की तुलना में वर्ष 2022 में 4500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश और 14856 कमरों वाली 206 नई परियोजनाएं पंजीकृत की गई हैं। उच्च स्तरीय होटल श्रृंखलाएं जयपुर में आ गई हैं और विकास के विभिन्न चरणों में हैं। वर्ष 2021 के दौरान 2.20 करोड़ की तुलना में वर्ष 2022 में 10.87 करोड़ पर्यटक राजस्थान आए।
Editorial

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