Los Angeles 11 - Facility to protect passengers from unnecessary checks at airports
जोन वेयन भले ही छोटा हवाई अड्डा कहलाता हो मगर हमारे यहां के हवाई. के मुकाबले किसी कदर कम नहीं था। जयपुर हवाई अड्डा अत्याधुनिक है मगर यह उससे भी बेहतर नजर आ रहा था। घर बन्द कर एक टेक्सी लेकर हम हवाई अहुँ पहुँच गए थे। सामान कम ही था इसलिये ट्रोली की जरूरत ही नहीं पड़ी। खुद ही खींचते हुए ले चले गए।
एयरपोर्ट पर भीड़ कोई खास नहीं थी इसलिये फटाफट चेकिंग हो गई। अमरीकी हवाई अड्डों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिक्यूरिटी के नाम पर फालतू की परेशानी नहीं झेलनी पड़ती। जो कुछ सामान्य सुरक्षा चेकिंग है वह भी टी.एस.ए. के द्वारा बहुत आसान कर दी गई है। टी. एस. ए. अमेरिका के गृह सुरक्षा विभा की एक एजेन्सी है ट्रांसपोर्ट सिक्यूरिटी एडमिनीस्ट्रेशन इस एजेन्सी का - काम पूरे अमेरिका में यात्रियों की सुरक्षा जांच का है। यह सीधे पेन्टागन से जुड़ी हुई हैं। हमारे यहां यही काम तमाम हवाई अड्डों पर केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा किया जा रहा है।
अमेरिका में 11 सितम्बर 2001 को हुए हमले जिसे 9-11 के नाम से जाना जाता है के बाद सुरक्षा के प्रति सतर्कता बढ़ गई। सुरक्षा के नाम पर आम अमरीकी नागरिक को अनावश्यक परेशानियां नहीं झेलनी पड़े इसके लिये टी.एस.ए. द्वारा विशेष उपाय किये गये। हमारे यहां एसी सोच है ही नहीं, सुरक्षा एजेन्सियों के लिये तो आम भारतीय नागरिक भी किसी आतंकवादी से कम नहीं इसलिये हरेक की जांच उतनी ही सख्ती से की जाती है जितनी किसी संदेहास्पद आतंकवादी की।
टी.एस.ए. ने यात्रियों की सुविधा हेतु एक प्री चेक कार्यक्रम चलाया है। अक्सर यात्रा करने वाले फ्रिक्वेन्ट फ्लायर्स के लिये यह वरदान सिद्ध हुआ है। टी. एस. ए. इसकी सदस्यता प्रदान कर यात्री को एक नम्बर दे देता है। सदस्यता हेतु वार्षिक शुल्क देना पड़ता है जो मामूली होता है। आपके आवेदन के पश्चात टी.एस.ए. आपकी सम्पूर्ण जांच करवाती है और आपका कच्चा चिट्ठा अपने पास रख लेती है। इसके बाद आपको नम्बर मिल जाते हैं। उहान बुक करवाते समय यह श्री चेक नम्बर टिकिट पर डालने पड़ते है। इसके पश्चात आप हवाई अड्डे पर इसकी सुविधा का उपयोग कर सकते है।
हवाई अड्डों पर टी.एस.ए. प्री चेक की अलग से लाईन होती है। यात्री जूते, बेल्ट, लेपटोप, जेकेट वगैरा नहीं उतारने पड़ते और साधारण से डिटेक्टर से गुजरना पड़ता है जिससे समय की काफी बचत हो जाती है। अपने साथ के सामान में तरल पदार्थ, क्रीम, जेल, पेस्ट वगैराह भी ले जा सकता है। इन सबकी मात्रा बहुत कम होनी चाहिये।
आजकल तो कई एयरलाईन्स अपने प्लेटीनम या गोल्ड कार्ड होल्डर्स को भी. टी. एस. ए. प्री चेक सुविधा देने लगी है। टी.एस.ए. का दावा है कि उसकी प्री सुविधा से यात्री को सुरक्षा जांच के नाम पर पांच मिनट से ज्यादा वक्त नहीं लगता। वह आंकड़े देकर इस तथ्य को प्रचारित करती है।
अमेरिका में इन दिनों क्लियर नाम की एक प्राईवेट एजेन्सी भी आई है। इसका टी.एस.ए. के साथ अनुबन्ध हो गया है। क्लियर भी यात्रियों को प्री चेक की सुविधा प्रदान करती है और दावा करती है कि सुरक्षा जांच में उसके सदस्यों को टी.एस.ए. के प्री चेक से भी कम समय लगता है। कुछ हवाई अड्डों पर टी. एस. ए. के साथ क्लियर की भी लाइनें देखी जाती हैं। आने वाले वर्षों में क्लियर के बाद कुछ अन्य निजि कम्पनियां भी इस क्षेत्र में उतर आये तो आश्चर्य नहीं । क्लियर अभी सदस्यता के नाम पर भारी शुल्क वसूल रही है।
टी. एस. ए. का प्री चेक की तरह एक और कार्यक्रम है ग्लोबल एन्ट्री। जिस तरह प्री चेक घरेलू यात्रियों की सुविधा के लिये है उसी तरह सोबल अन्तर्राष्ट्रीय यात्रियों की सुविधा के लिये है। इसके तहत विदेश यात्रा के पश्चात अमेरिका लौटने वाले किसी भी अमरीकी नागरिक को इमीग्रेशन कस्टम आदि की कतारों में नहीं लगना पड़ता। महज वहां लगे एक कियोस्क पर अपनी उंगलियों के निशान व पासपोर्ट स्केन कर यात्री बाहर निकल आता है।
भारत में भी विमान सेवाओं ने कोई कम प्रगति नहीं की है। दिनों-दिन इसमें विस्तार ही किया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षा के नाम पर यात्रियों को राहत देने हेतु प्री चेक जैसे कार्यक्रम हमारे यहां भी जरूरी है। समस्या यह है कि कानून बनाने वाले कर्णधारों को हवाई अड्डों पर इस तरह की सुरक्षा जांच की परेशानियों से गुजरना नहीं पड़ता, उनकी तो वी.आई.पी. जांच होती है जो प्री चेक से भी बेहतर होती है, इस कारण जन सामान्य की तकलीफों का उन्हें एहसास भी नहीं।
मुनीश प्री चेक सदस्य था इस कारण हमारे सभी के टिकटों पर प्री चेक का राईट (४) निशान अंकित था सिक्यूरिटी जांच में पांच मिनीट क्या दो मिनीट भी नहीं लगे जबकि अन्य यात्रियों की लम्बी लाइनें लगी हुई थी। मजे की बात यह थी धिमें अमरीकी नागरिक नहीं था फिर भी मुझे प्री चेक की सुविधा मिल गई। यह इस बात का द्योतक है कि कानून की पालना करवाने वाले लकीर के फक़ीर नहीं है। ये कानून की भावना को समझ कर काम कर रहे थे। हमारे यहां एसे दृष्टिकोण का नितान्त अभाव है।
उड़ान में अभी वक्त था इसलिये बैठ कर इन्तजार करने की सोची। आस पास की सभी कुर्सियां भरी हुई थी तो कुछ कुर्सियों पर लोगों ने अपने सामान रख दिये थे। कुर्सियां बैठने के लिये होती है, सामान रखने के लिये नहीं, मगर यह बात सबको समझ में नहीं आती। चाहे भारत हो या अमेरिका जैसा उन्नत देश, यह आदत हर जगह देखने को मिल जाती है। कुर्सियों की तलाश में हम इधर उधर भटक रहे थे मगर मजाल है जो कोई यात्री अपने पास वाली कुर्सी पर रखे सामान को हटा कर हमें जगह दे दे। हमने भी किसी को कहना उचित नहीं समझा, कहते तो जरूर वे मन मसोस कर अपना सामान हटा देते। हम दूर एक जगह जाकर बैठ गये जहां तीन चार कुर्सियां एक साथ खाली थी। मेरे हाथ में एक बेग था जो मैंने पास वाली कुर्सी पर रख दिया। प्रीति ने मेरी तरफ घूर कर देखा तो हंसते हुए मैंने बैग उठा कर नीचे जमीन पर रखा।
हर सीट पर चार्जर लगे थे। चार्जर भी एसे कि मोबाइल की कोई सीधे उसी मैं लगती थी किसी पुश की जरूरत नहीं थी। यहां ज्यादातर मोबाईलों की कोई एक समान होती है इसलिये अलग अलग चार्जरों की आवश्यकता ही नहीं। कोर्ड के सीधे प्लग हो जाने से चार्जिंग की गति तीव्र हो जाती है। हमारे यहां अब भी प्लग व चार्जर के बीच एक पुश की भूमिका बनी हुई है।
Editorial

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