Pratahkal - Lekh Update - Crackdown on online gaming
अजय बग्गा
मंगलवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 50वीं बैठक हुई, जिसे कर व्यवस्था में मील का पत्थर कहा जा सकता है। दरअसल काफी विमर्श के बाद जीएसटी को लागू किया जा सका था। इससे पहले परिषद की 49 बैठकें हुईं, जिनमें करीब 1,500 फैसले किए गए, जो सहकारी संघवाद की भावना को प्रदर्शित करते हैं। इसमें कर आकलन के अनुपालन को सुव्यवस्थित करने के लिए कई उपायों की घोषणा की गई। वित्तमंत्री ने बताया कि जीएसटी (GST) अपीलीय न्यायाधिकरण राज्यों की राजधानियों में स्थापित किए जाएंगे, जहां उच्च न्यायालय की बेंच है। जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण इस वित्तीय वर्ष से काम करने लगेगा। इस बैठक से पहले सरकार ने सात जुलाई को एक अधिसूचना के जरिये जीएसटीएन को पीएमएलए के दायरे में ला दिया है, जो जीएसटीएन, प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने की सुविधा प्रदान करेगा। जीएसटी काउंसिल की बैठक में स्वाभाविक रूप से इस पर सवाल उठे। आम आदमी पार्टी शासित पंजाब और दिल्ली के वित्त मंत्रियों ने आशंका जताई कि इससे 'कर आतंकवाद' को बढ़ावा मिल सकता है और करोड़ों जीएसटी धारकों को ईडी द्वारा प्रताड़ित किया जा सकता है। लेकिन केंद्रीय वित्तमंत्री ने राज्यों को बताया कि वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के दायित्वों को पूरा करने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईडी मामलों को जीएसटीएन को भेज सकता है, जबकि जीएसटीएन डाटा ईडी को नहीं भेजा जाएगा। वित्तीय खुफिया ईकाई (एफआईयू) के निदेशक को जब लगेगा कि कर चोरी या मनी लॉन्ड्रिंग हुई है, तो वह अधिकारियों को जानकारी प्रदान करेंगे।
जीएसटी परिषद ने चार वस्तुओं पर कर कटौती को मंजूरी प्रदान की। कैंसर एवं दुर्लभ बीमारियों के उपचार में काम आने वाली दवाओं और पूरक या विशेष चिकित्सा प्रयोजन के खाद्य के आयात को जीएसटी से मुक्त रखने का निर्णय सबसे स्वागत योग्य फैसला है। इससे दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों को राहत मिलेगी और उनके इलाज की लागत में कमी आएगी। उपग्रह प्रक्षेपण क्षेत्र में समान अवसर उपलब्ध करवाने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि इसरो, एंट्रिक्स कॉर्पोरेशन लिमिटेड और न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) द्वारा दी जाने वाली उपग्रह प्रक्षेपण सेवाओं पर जीएसटी छूट को निजी क्षेत्र के संगठनों को भी उपलब्ध करवाया जा सकता है, ताकि ऐसे निजी खिलाड़ियों को भारत में इस क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
टोमोबाइल के मामले में अतिरिक्त उपकर लगाने के लिए एमयूवी और एसयूवी की परिभाषा को स्पष्ट किया गया है। कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों के अनुरोध पर सेडान को एसयूवी के निर्धारित आकार पर 22 फीसदी तक उपकर की वृद्धि से छूट दी गई है। कोई भी उपयोगिता वाहन, जिसकी लंबाई चार मीटर से अधिक है, जिसकी इंजन क्षमता 1,500 सीसी से अधिक है और 170 मिमी से अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस (बिना लदाई के) है, उस पर 28 प्रतिशत जीएसटी के अलावा 22 प्रतिशत मुआवजा उपकर लगेगा। हालांकि, यह सेडान पर लागू नहीं होगा। सिनेमा हॉल में परोसे जाने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों पर अब 18 फीसदी के बजाय 5 फीसदी जीएसटी लगेगा, जिसका सिनेमा मालिक कंपनियों ने स्वागत किया है। सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाली घोषणा ऑनलाइन गेमिंग, कैसिनो और घुड़दौड़ के लिए पूर्ण अंकित मूल्य पर 28 फीसदी जीएसटी लगाने की थी। नतीजतन बुधवार सुबह सबसे बड़ी कैसीनो संचालन कंपनी के शेयर की कीमत में भारी गिरावट आई। वित्तमंत्री ने बताया कि जीएसटी काउंसिल का इरादा ऑनलाइन गेमिंग उद्योग या राज्यों को नुकसान पहुंचाना नहीं है। काउंसिल ने इस पर गंभीरता से विचार करके फैसला लिया है, जो दो-तीन वर्षों से लंबित था। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन गेमिंग पर 28 प्रतिशत जीएसटी लगाने की प्रभावी तारीख जीएसटी कानून में संशोधन के बाद लागू होगी। ऑनलाइन गेमिंग कंपनियां लंबे समय से खुद को सट्टेबाजी और जुआ व्यवसायों से अलग माने जाने के लिए संघर्ष कर रही हैं, जिनकी समाज में नकारात्मक छवि है और जिन पर कठिन कर प्रावधान लागू हैं। इस फैसले से भारत में फल-फूल रहे ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को 1.6 अरब डॉलर का नुकसान होता दिख रहा है। ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म इंडिया प्लेज के मुख्य परिचालन अधिकारी आदित्य शाह ने कहा, 28 फीसदी कर दर लगाने से गेमिंग उद्योग के समक्ष महत्वपूर्ण चुनौतियां पैदा होंगी। यह उच्च कर बोझ कंपनियों के नकदी प्रवाह को प्रभावित करेगा, जिससे नवाचार, अनुसंधान और व्यापार विस्तार में निवेश करने की उनकी क्षमता सीमित हो जाएगी। वित्तमंत्री ने दिसंबर, 2022 में संसद को बताया था, भारत के साथ-साथ विदेशों में भी ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों ने अप्रैल 2019 से नवंबर, 2022 तक 229 अरब रूपये के जीएसटी की चोरी की । गेमिंग कंपनियों ने कुछ राज्य सरकारों के प्रतिबंधों को अदालतों में चुनौतियां दी हैं। वैश्विक उदाहरण देखें, तो अमेरिका कैसिनो और गेमिंग पर 50 फीसदी से ज्यादा कर लगाता है, फ्रांस जैसे कई यूरोपीय देशों में कर की दर 80 फीसदी तक है, जबकि कैसिनो और जुआ गतिविधियों के प्रमुख केंद्र मकाउ में कर की दर 30 फीसदी है। केन्या ने हाल ही में ऑनलाइन गेमिंग की लत के प्रसार को रोकने के लिए इस पर कर दर को 15 फीसदी से बढ़ाकर 35 फीसदी कर दिया है, जो युवाओं के साथ-साथ गरीब तबके को भी प्रभावित कर रहा है। भारत जैसे विशाल देश में सट्टा उद्योग, जिसका कुल आकार 280 लाख करोड़ रूपये की जीडीपी में 14,000 करोड़ रूपये प्रति वर्ष है, वाकई एक बड़ी चुनौती है, जिस पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। जब सभी प्रमुख बुनियादी ढांचा गतिविधियों के लिए जरूरी सीमेंट पर 28 फीसदी जीएसटी लगाया जा सकता है, तो कैसिनो, घुड़दौड़ और ऑनलाइन गेम पर यह असामान्य नहीं है । खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर सुदीप्त भट्टाचार्जी ने कहा, गेम्सक्राफ्ट मामले में कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्णय में कौशल और संयोग के खेल के बीच अंतर की सराहना नहीं की गई है। यह देखना होगा कि क्या ऑनलाइन गेमिंग पर कर लगाने की निर्धारित पद्धति सांविधानिकता की कसौटी पर खरा उतरेगी या नहीं। किसी भी मामले में इसे पूर्वव्यापी तरीके से लागू नहीं किया जा सकता है। जाहिर है, इस मामले में यह अंतिम फैसला नहीं है ।
Editorial

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