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लॉस एंजलेस 10 - क्या मुम्बई के किसी हवाई अड्डे का नाम फिल्मी सितारे पर रखा जायगा ?
By EditorialPublished on
हमारी समुद्री यात्रा की तिथि नजदीक आ रही थी इसलिये उसकी तैयारिया शुरू कर दी। हम बर्फ के पहाड़ों और ग्लेशियरों पर जाने वाले थे जहां तापमान शून्य से भी कई डिग्री कम रहता है, जूते तो खरीद लिये थे, एक जाकेट भी बड़े भाई साहब का साथ लाया था मगर वहां की सदी के लिये पर्याप्त नहीं था, मुनीश के पास कई गर्म जेकेट थे, सिर्फ दो दिन के लिये नये जेकेटों पर भारी भरकम खर्चा करने की बजाय तो इन्हें ट्राइ करना ही बेहतर था।
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हमारी समुद्री यात्रा की तिथि नजदीक आ रही थी इसलिये उसकी तैयारिया शुरू कर दी। हम बर्फ के पहाड़ों और ग्लेशियरों पर जाने वाले थे जहां तापमान शून्य से भी कई डिग्री कम रहता है, जूते तो खरीद लिये थे, एक जाकेट भी बड़े भाई साहब का साथ लाया था मगर वहां की सदी के लिये पर्याप्त नहीं था, मुनीश के पास कई गर्म जेकेट थे, सिर्फ दो दिन के लिये नये जेकेटों पर भारी भरकम खर्चा करने की बजाय तो इन्हें ट्राइ करना ही बेहतर था। मेरे लिये हल्के से ढीले थे मगर सदन कहा कि काम चल जायेगा तो यही ले लिये। यात्रा में राजा भी न्यूयार्क से आने वाला था, उसे भी फोन कर दिया था कि वह भारी गर्म जाकेट साथ लेकर आये।
समुद्री क्रूज में हम कनाडा भी जाने वाले थे तो मेरे कागजात तैयार करने थे। अमरीकी नागरिकों के लिये तो कनाडा हेतु वीजा या किसी भी तरह के कागजातों की आवश्यकता नहीं होती। मैं भारत से कनाडा हेतु मल्टीपल एन्ट्री का वीजा लेकर आया था इसलिये ज्यादा दिक्कत नहीं आने वाली थी। क्रूज में हम विभिन्न स्थाने पर उतरने वाले थे, जहां देखने के कई स्थान थे, ग्लेशियर भी उन्हीं में शामिल था। इन स्थानों हेतु हर यात्री को अलग से टिकिट लेने पड़ते हैं। क्रूज के टिकिट में इन स्थानों के टिकिट शामिल नहीं होते। ये तो बन्दरगाह पर जहाज लाकर खड़ा कर देते हैं, उस शहर में घूमना फिरना सब यात्रियों पर निर्भर है।
प्रीति निरन्तर इस स्थानों पर उपलब्ध दर्शनीय स्थलों के बारे में नेट की खाक छान रही थी और जो स्थान देखने योग्य थे उनके टिकिट भी बुक करा रही थी। पहले से टिकिट लेने पर काफी सस्ते मिल जाते है। जहाज से उतरने के बाद एन टाईम पर टिकिट लो तो जो नियत दर है वह देनी पड़ती है।
समुद्री यात्रा की एक बहुत बड़ी परेशानी जी घबराना और उल्टी आना है। यह सभी यात्रियों के साथ नहीं होता मगर जिस किसी के साथ होता है उसे बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ता है। आजकल ऐसी औषधियां और चिकित्सा आ है जिससे इस तरह की परेशानियों पर काबू पाया जा सकता है। कई लोग बसों मे यात्रा करते हैं तो भी उन्हें उल्टी आती है। बसों की खिड़कियां यात्रियों की उल्टी से भरी नजर आती है। यह वाहन के गतिमान होने से होता है। वाहन के निरन्तर कंधा नीचा होते रहने के साथ कई लोगों का शरीर संतुलन नहीं बना पाता परिणामतः जी घबराने लगता है और उल्टी होने लगती है।
समुद्र में भी लहरों के हिलोरों से जहाज जब डगमगाता है तो शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है। आजकल जिस तरह सीधी सपाट सड़कें और अत्याधुनिक वाहन बनने लगे हैं, उससे बसे व अन्य वाहन गतिमान होने के दौरान भी बिना ऊंचा नीचा हुए चलते रहते हैं। इस कारण इस तरह की शिकायतें कम होने लगी हैं। समुद्र में भी अत्याधुनिक इन्जिनों के कारण अशांत लहरों पर भी जहाज बिना हिले डुले चलते रहते हैं मगर समुद्र में तीव्र हवाएं और तूफान अपरिहार्य है। समुद्र के रौद्र रूप ही जहाज डगमगाने लगता है जिससे कई यात्रियों के शरीर का संतुलन बिगड़ जाता है।
मैंने तो साल भर पहले भी सिंगापुर मलेशिया थाईलेण्ड की समुद्री यात्रा - की थी इसलिये इस तरह की सी सिकनेस मुझे नहीं होती है यह पता था। मुनीश ने श्री कुछ वर्ष पूर्व न्यूयार्क से एक क्रूज लिया था, तब उसे भारी परेशानी आई थी। सात दिन का क्रूर था, पहले दो दिन तो जी घबड़ाने और उल्टी आने में ही बीत गये, जहाज पर दवाई उपलब्ध थी, वो ली तो एसी नींद आई कि बाकी क्रूज सोते माते ही निकल गया। मुनीश को अपनी इस कमजोरी का एहसास था, वह नहीं चाहता था कि इस बार फिर इस कारण क्रूज का मजा किरकिरा हो जाये।
वह डाक्टर से मिला तो उसने गोलियां बता दी। गोलियों से नींद आने का अनुभव बताया तो डाक्टर ने विकल्प के रूप में एक पेच या ब्रेसलेट की सलाह दी। व एक छोटी सी गोल पट्टी होती है जो कान के नीचे चिपका दी जाती है। यह एकदम फोड़े फुन्सीयों पर चिपकाने वाली पट्टियों जैसा होता है। एक पेच एक सप्ताह काम करता है। ब्रेसलेट हाथ की कलाई में पहना जाता है जो नस को निरन्तर दबाये रखता है। मुनीश ने चार पेच खरीद लिये, क्या पता एक पेच एक हफ्ते भी चले कि नहीं। एक पेच 20 डालर का आया। हालांकि महंगा था, मगर यात्रा को सुखद बनाने के लिये यह खर्चा आवश्यक था।
12 अग. 2016 को हम लॉस एंजलेस से सियेटल के लिये रवाना हुए। मैं, मुनीश और प्रीति । सीयेटल में मुनीश की भानजी कादम्बरी रहती है, उसी के हम दो दिन ठहर कर क्रूज पकड़ने वाले थे। सियेटल के लिये हमारी उड़ान पास ही स्थित जोन वेयन हवाई अड्डे से थी। भीड़भाड़ भी कम रहती है इसलिये यहीं से उड़ान ली।
लोस एंजलेस में 5 हवाई अड्डे हैं। यहां का प्रमुख हवाई अड्डा लेक्स नाम से जाना जाता है, यह इतना व्यस्त और भीड़ भरा है कि सामान्य यात्रा जहा तक ह सके इसकी उपेक्षा ही करते हैं। अमेरिका के सभी बड़े बड़े शहरों में एक से अधिक हवाई अड्डे हैं। हमारा मुम्बई इतना बड़ा शहर है फिर भी अभी तक हम एक ही अड्डे पर अटके हुए हैं। दूसरे हवाई अड्डे की मंजूरी हो भी गई है तो उसे बनने में सालों लग जाएंगे।
लोस एजलेस भी मुम्बई की तरह अमेरिका की नगरी है। एंजलेस प्रशासन ने शहर की प्रसिद्धि में फिल्मों की भूमिका स्वीकारते हुए शहर के इस हवाई अड्डे का नाम होलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता जोन वेयन के नाम पर रखा है। जिस तरह हमारे यहां सदाबहार अभिनेता के रूप में अशोक कुमार को जाता है उसी तरह का नाम जोन वेयन का भी है।
जोन वेयन ने 3 दशकों तक हॉलीवुड के बोक्स ओफिस पर राज किया। उन्होंने 250 के लगभग फिल्मों में काम किया, कई हिट फिल्में दी। आज टी.वी. पर कोई पुरानी वेस्टर्न फिल्म आ रही होती है तो उसमें जोन यन नजर का ही जाते हैं। क्या लोस एंजलेस की तरह हमारा मुम्बई शहर भी अपनी प्रगति में फिल्म इन्डस्ट्री की भूमिका को मान्यता देने अपने किसी हवाई अड्डे का नाम किसी फिल्मी सितारे के नाम पर रखने की हिम्मत रखता है या यह स्थान सिर्फ राजनेताओं या इतिहास पुरुषों के लिये ही संरक्षित है? कल्पना कीजिये मुम्बई के नये हवाई अड्डे का नाम अशोक कुमार इन्टरनेशनल एयरपोर्ट हो या देव आनन्द एयरपोर्ट मुम्बई।
लॉस एंजलेस के पश्चिम में समुद्र है, बाकी तीनों दिशाओं में एयरपोर्ट है। इन सभी एक्स्पोटों पर घरेलू उड़ानें उपलब्ध रहती हैं। कई बार सीधी उड़ानें नहीं मिलती है तो लेक्स ही जाना पड़ता है मगर इससे काफी आराम हो गया है। शहर के दक्षिण में ओरेन्ज काउन्टी में तो जोन वेयन एयरपोर्ट है ही, उत्तर में होलीवुड में बरबैंक एयरपोर्ट, पूर्व में ओन्टेरियो एयरपोर्ट तथा लोंग बीच एयरपोर्ट हैं।

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