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रेलवे बढ़ाएगा अपनी ट्रेनों की स्पीड
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उत्तर पश्चिम रेलवे (North Western Railway) जोन अपने चारों मंडल के अंतर्गत चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने पर विचार कर रहा है। एनडब्ल्यूआर (NWR) के मुताबिक स्पीड बढ़ने से दूसरी ट्रेनों के लिए ट्रैक पर स्पेस मिलेगा। इसके साथ ही यात्रियों के समय की बचत होगी। हालांकि इस योजना के तहत एनडब्ल्यूआर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एनडब्ल्यूआर ने अलग अलग ट्रैक रूट पर इसकी कोशिशें शुरू कर दी है।

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जयपुर : उत्तर पश्चिम रेलवे (North Western Railway) जोन अपने चारों मंडल के अंतर्गत चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की स्पीड बढ़ाने पर विचार कर रहा है। एनडब्ल्यूआर (NWR) के मुताबिक स्पीड बढ़ने से दूसरी ट्रेनों के लिए ट्रैक पर स्पेस मिलेगा। इसके साथ ही यात्रियों के समय की बचत होगी। हालांकि इस योजना के तहत एनडब्ल्यूआर को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एनडब्ल्यूआर ने अलग अलग ट्रैक रूट पर इसकी कोशिशें शुरू कर दी है। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही एनडब्ल्यूआर में ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से दौड़ती नजर आएंगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के सीपीआरओ कैप्टन शशि किरण के अनुसार जयपुर से कोलकाता, जयपुर से चेन्नई, जयपुर से मुंबई, जयपुर से पटना, बीकानेर से मुंबई, जोधपुर से मुंबई और इसी तरह अजमेर से लंबी दूरी पर चलने वाली ट्रेनों की स्पीड अब बढ़ाई जाएगी। इससे यात्रियों को जहां लंबी दूरी का सफर करने में अभी 24 घंटे लगते हैं वहीं बाद में वो अलग अलग गंतव्य पर पहुंचने में 24 से घटकर 20 से 18 घंटे तक पहुंच जाएगा । एनडब्ल्यूआर इसके लिए राजधानी और एक्सप्रेस ट्रेनों की अधिकतम स्पीड को 130 किलोमीटर प्रतिघंटा पर ले जाने की योजना बना रहा है।
संवेदनशील स्थलों को चिन्हित किया गया
ट्रेनों की स्पीड (Speed Of Trains) बढ़ाने में जो सबसे बड़ी समस्या सामने आ रही है वो मवेशियों की है। ट्रैक के आस पास गांव और खेत होते हैं। वहां पशु दौड़ते हुए या चरते हुए ट्रेन के सामने आ जाते हैं। इसकी वजह से कई बार ट्रेन बड़े हादसे का शिकार हो जाती है। तेज गति में हादसा होने का अंदेशा ज्यादा बढ़ जाता है। इसके लिए एनडब्ल्यूआर ने ऐसे संवेदनशील जगहों को चिन्हित किया है जहां ज्यादा मवेशी पाए जाते हैं।
पटरियों के किनारे फेसिंग करवाई जा रही
उन जगहों पर रेलवे पटरियों के किनारे फेसिंग और लकड़ियों की मोटी दीवार बनाई जा रही है। फेंसिंग की वजह से जानवर पटरियों पर नहीं आ पाएंगे और ट्रेन स्पीड से निकल पाएगी। एनडब्ल्यूआर की ये कोशिश कितनी सफल होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा। बहरहाल ये प्रयोग शुरूआती दौर में है। पूरे प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाने के लिए रेलवे प्रशासन को अच्छी खासी कवायद करने पड़ेगी।

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