Pratahkal - Suresh Goyal

हमारे यहा जिस तरह क्रिकेट की दीवानगी है, अमेरिका में फुटबाल, बेसबाल व बास्केटबाल के प्रति है। अमरीकी फुटबाल अलग तरह का होता है। जिसमें खिलाड़ी बोल लेकर भागता है और अन्य खिलाड़ी उसे रोकते हैं। हमारे यहां के फुटबाल की यहां सोकर के नाम से जाना जाता है।
अमरीकी फुटबाल में व्यक्तिगत खिलाड़ियों के अलग अलग पोईन्ट होते हैं जो उनके प्रदर्शन के आधार पर होते हैं जैसे क्रिकेट खिलाड़ियों के व्यक्तिगत रिकार्ड होते हैं वैसे ही इनके भी होते हैं। प्रति वर्ष यहां फुटबाल के बड़े बड़े टूनमिन्ट होते हैं जिनकी दीवानगी पागलपन की सीमा भी लांध जाती है। फुटबाल की कई प्रसिद्ध टीमें हैं और प्रत्येक के पास नामी गिरामी खिलाड़ी है।
फुटबाल की इस लोकप्रियता का ही परिणाम है कि फुटबाल के प्रशंसकों के बीच एक फैन्टेसी फुटबाल नाम से प्रतियोगिता अलग शुरू हो गई है। जो असली फुटबाल मैदानों में खेला जाता है वह तो वर्चुअल या वास्तविक हो गया और जो फुटबाल प्रशंसकों के बीच काल्पनिक रूप से खेला जाता है वह फेन्टेसी फुटबाल हो गया।
फेन्टेसी फुटबाल की लोकप्रियता का आलम यह है कि समूचे अमेरिका को इसने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इसकी देखा देखी हमारे यहां भी आई.पी.एल. क्रिकेट मैचों का फेन्टेसी क्रिकेट शुरू करने की कोशिश की जा रही है। जिस तरह किसी टूर्नामेन्ट में 8-10 टीमें होती है उसी तरह 8-10 मित्र या परिवार के सदस्य मिलकर यह फेन्टेसी फुटबाल प्रतियोगिता शुरू कर देते हैं। आज अमेरिका के घर घर में, स्कूलों, दफ्तरों, क्लबों हर जगह ये प्रतियोगिताएं शुरू हो गई हैं और इनका मजा वास्तविक खेल से भी ज्यादा आने लगा है।
इसमें होता यह है कि जो 8-10 मित्र या परिजन यह प्रतियोगिता शुरू करते है वे अपने लिये एक एक प्रसिद्ध टीम का चयन कर लेते हैं। क्रिकेट के माध्यम समझें तो 8 जने हैं तो कोई मुम्बई इन्डियन्स का मालिक बन गया तो किसी कलकत्ता नाईट राइडर्स ले ली तो किसी के पास रोयल चेलेजन्स बेंगलोर आ गई। सब कल्पना में।
इन आठों प्रसिद्ध टीमों के जो वास्तविक खिलाड़ी हैं, मान लीजिए, कुल 120 तो इन 120 खिलाड़ियों का एक पूल बन जाता है। अब आठो मित्र इन 1.20 खिलाड़ियों में से अपने लिये 15-15 खिलाड़ी चुन लेते हैं। इस चयन के विभिन्न तरीके हैं, या तो गोटियां डालकर चयन किया जाय या पहले शीर्षस्थ खिलाड़ियों का एक एक करके चयन हो। यह सब मित्र आपस में बैठ कर तय कर सकते हैं।
कई लोग इसे और रोचक बनाने खिलाड़ियों का ओक्शन कर देते हैं।। मान लीजिए हर टीम को ढाई-ढाई हजार का बजट दे दिया। इस ढाई हजार में एक टीम को सभी 15 खिलाड़ी खरीदने हैं। जो सभी टीमों का 20 हजार एकत्र होता है वह प्रथम तीन विजयी टीमों को पुरस्कार में बांट दिया जा सकता है। सब अपने अपने नियम तय कर सकते हैं। आखिर है तो फेन्टेसी ही।
जब सभी मित्रों की टीमों का चयन हो जाता है तो हो सकता है विराट कोहली जो बेंगलूर से खेलता है वो उस मित्र के पास चला जाये जिसके पास कलकत्ता हो या धोनी मुम्बई के पास चला जाये। यह प्रतियोगिता तभी खेली जाती। है जब वास्तविक प्रतियोगिता होती है।
वास्तविक प्रतियोगिता का पहला मैच यदि मुम्बई और दिल्ली के बीच है तो फेन्टेसी क्रिकेट के जिन मित्रों के पास मुम्बई व दिल्ली है वे भी काल्पनिक रूप से खेलेंगे। जब तक वास्तविक प्रतियोगिता की सभी टीमें एक एक मैच नहीं खेल लेती तब तक काल्पनिक क्रिकेट का पहला मैच शुरू नहीं हो पायगा।
वास्तविक मैचों की तरह फैन्टेसी मैचों के मालिकों को भी अपनी खेलने वाली टीम की पहले घोषणा करनी पड़ती है। मान लीजिए फैन्टेसी क्रिकेट की मुम्बई टीम में धोनी को खिलाया गया है मगर वास्तविक क्रिकेट के पूने के मैच में धोनी नहीं खेल पाये तो मुम्बई की फेन्टेसी टीम को एक खिलाड़ी से वंचित रहना पड़ेगा।
अब मुम्बई व दिल्ली के बीच पहला वास्तविक मेच खेला गया तो इन दोनों के बीच पहला फेन्टेसी मेच भी होगा। फेन्टेसी टीमों के खिलाड़ियों ने असली टीमों से खेलते हुए जितने जितने रन बनाये या जितने विकेट लिये, अच्छी फिल्डिंग की, ज्यादा रन दिये, कम रन दिये उतने उतने अंक उनके खातों में जमा हो जायेंगे। मुम्बई की टीम में हो सकता है चार अलग अलग टीमों के खिलाड़ी हो, इसी तरह दिल्ली में भी। इसलिये पहला काल्पनिक मैच तभी संभव है जब आठों वास्तविक टीमें अपना पहला मैच खेल लें।
इसी तरह दूसरा व तीसरा व आगे के मैच खेले जाते हैं। इनमें स्कोर के आधार पर पोइन्ट दिये जाते हैं। हर रन का एक अंक, छक्के का दो, 25 रन के 10, जीरो के 5, कम स्ट्राइक रेट के माइनस पोइन्ट, ज्यादा स्ट्राइक रेट के ज्यादा पोइन्ट, विकेट के 10, 2 विकेट लेने के 20, डोट बाल के 1, मेडन ओवर के 20, इकोनोमी रेट के प्लस पोइन्ट, ज्यादा रन देने के माइनस पोईन्ट, केच के 10, स्टम्प के 15, रन आउट के 10, मेन ओफ दी मैच के 25 आदि अंक दिये जा सकते हैं।
हर टीम के वास्तविक मेचों में विभिन्न खिलाड़ियों का जो प्रदर्शन होता है वह कम्पनिक टीमों के खिलाड़ियों के खाते में डाल उन्हें अंक दे दिये जाते हैं। दोनों टीमों के अंकों के आधार पर जीत हार का निर्णय होता रहता है और प्रतियोगिता आगे बढ़ती रहती है।
भारत में तो अभी यह दीवानगी शुरू नहीं हुई है मगर आई.पी.एल. के दौरान इसे यार-दोस्त, परिजन आदि शुरू कर सकते हैं। हालांकि पिछले अप्रेल में हुए आई.पी.एल. के दौरान कुछ उत्साही लोगों ने इसकी शुरूआत की है लेकिन इसे व्यापक रूप प्राप्त होने में समय लगेगा।
अमेरिका में जो फेन्टेसी फुटबाल चल रहा है उसकी व्यापकता का अन्दाज तो यह है कि इसकी वेब साईटें खुल गई है और लोग ओन लाईन भी अपना अपना फैन्टेसी फुटबाल खेलने लगे हैं। जो यह फेन्टेसी प्रतियोगिता खेलते है उनका पूरा ध्यान एक एक खिलाड़ी के स्कोरों व एक एक मेच की बारीकी पर होता है। अब यह काम इन्टरनेट पर उभर आई कई कम्पनियां भी करने लगी है और इसको अच्छी खासी कमाई का माध्यम भी बना लिया है। सेन डियेगो से वापस लौटने के बाद हमें एक जगह खाना खाने जाना था। वहां गये तो सभी को इस फेन्टेसी फुटबाल की चर्चा करते ही देखा। कोई अपनी टीम की डींग हांक रहा था तो कोई अपने खिलाड़ी के प्रदर्शन से प्रसन्न था। मेरी समझ में कुछ नहीं आया कि आखिर ये लोग किस बात की चर्चा कर रहे हैं तो मुझे समझाया गया कि ये फेन्टेसी फुटबाल है क्या। | सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा और तुरन्त में इसकी कल्पना आई.पी.एल. के माध्यम से करने लगा।
वैसे भी आई.पी.एल. के कारण हमारे लोग कम व्यस्त नहीं है, यदि आई.पी.एल. की दीवानगी भी चढ़ गई तो सोच लो हर कोई नीता अम्बानी शाहरूख खान या प्रीति जीन्टा की तरह अपनी अपनी टीमों और खिलाड़ियों के प्रति चिन्तित या प्रसन्न होने लगेगा।
Editorial

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