Pratahkal-Acharya Mahashraman-Utilitarianism and existentialism explained

मुम्बई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) भगवती सूत्र आगम के माध्यम से श्रद्धालुओं को नित्य नए तत्त्वबोध प्रदान कर रहे हैं। साथ ही ‘कालूयशोविलास’ के मधुर गायन और आख्यान से आठवें आचार्य कालूगणी के जीवनवृत्त एवं उनके द्वारा जनकल्याण के लिए की गई यात्राओं का वर्णन भी कर रहे हैं। उन्होंने सोमवार को तीर्थंकर समवसरण में उपस्थित श्रद्धालुओं को पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि भगवती सूत्र में बहुत गूढ़ ज्ञान समाहित है। इसमें पंचास्तिकाय की बात का वर्णन प्राप्त होता है। छह द्रव्य और नव तत्त्व में पंचास्तिकाय को समाहित किया जा सकता है। दुनिया के मूल में पंचास्तिकाय होता है अथवा उसे छह द्रव्य भी कह सकते हैं। छह द्रव्यों में दुनिया समाहित है। वहीं आत्मा के कल्याण की बात नव तत्त्व से प्राप्त की जा सकती है। यह उपयोगितावाद और अस्तित्ववाद की दृष्टि से बताया गया है।
उन्होंने आचार्य कालूगणी की विहार यात्रा का वर्णन करते कहा कि विहार यात्रा के दिनों में उन्होंने डिडवाना पर सात दिनों की कृपा कराई थी और होली चतुर्मास छोटी खाटू में किया था। उस दौरान मुनि तुलसी को दोपहर में व्याख्यान देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री ने इक्कीस रंगी तपस्या के अंतर्गत तपस्यारत तथा आज से तपस्या प्रारम्भ करने वाले तपस्वियों को प्रत्याख्यान कराया।
Editorial

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