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रामस्नेही संतों का चातुर्मास शुरू, मांगलिक कार्य पर लगा विराम
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देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) को चातुर्मास आरंभ (Beginning Of Chaturmas) होने के साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। ज्योतिषीय मान्यतानुसार चातुर्मास काल के दौरान शुभ कार्य, विवाह एवं सभी तरह के महत्वपूर्ण कार्य निषेध माने गए है। इस बार श्रावण में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास ) के कारण चातुर्मास काल की अवधि एक माह बढ़कर पांच माह हो जाएगी।

जोधपुर : देवशयनी एकादशी (Devshayani Ekadashi) को चातुर्मास आरंभ (Beginning Of Chaturmas) होने के साथ ही मांगलिक कार्यों पर विराम लग गया। ज्योतिषीय मान्यतानुसार चातुर्मास काल के दौरान शुभ कार्य, विवाह एवं सभी तरह के महत्वपूर्ण कार्य निषेध माने गए है। इस बार श्रावण में पुरुषोत्तम मास (अधिकमास ) के कारण चातुर्मास काल की अवधि एक माह बढ़कर पांच माह हो जाएगी। देवप्रबोधिनी एकादशी (Devprabodhini Ekadashi) 23 नवम्बर से पुन मांगलिक कार्य आरंभ हो जाएंगे। वैष्णव, रामस्नेही संतों की ओर से आत्म जागृति के पर्व चातुर्मास सत्संग का शुभारंभ सूर्यनगरी के धार्मिक स्थलों में शुरू हो गया। जैन चातुर्मास 2 जुलाई से विधिवत शुरू हो जाएंगे। सूरसागर बड़ा रामद्वारा के महंत संत रामप्रसाद रामस्नेही संत मंडली के साथ पावटा सी रोड जोधपुर लाल मैदान के बालाजी एवं शिवजी भगवान मंदिर में गाजे बाजों के साथ चातुर्मास मंगल प्रवेश किया । चातुर्मास आयोजन समिति के अध्यक्ष नरपतसिंह कच्छवाहा ने बताया कि संत डॉ रामप्रसाद व संत गोविन्दगोपाल के सानिध्य में बालाजी एवं शिवजी भगवान मंदिर पावटा सी रोड प्रांगण में सुबह 8.30 बजे से 10.30 बजे तक आगामी तीन माह तक प्रतिदिन सत्संग आयोजित होगा । शोभायात्रा में संत अमृतराम, संत सुखराम, संत रामप्रकाश, संत धर्माराम, मंदिर ट्रस्ट के कार्यवाहक अध्यक्ष चैनसिंह पंवार, सचिव रामसिंह सांखला, किशनलाल राठी, भीकमचंद सोनी आदि आयोजन समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे । चातुर्मास स्थल पर संत रामप्रसाद ने चातुर्मास सत्संग का महत्व बताया।

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