Pratahkal-Ashok Gehlot Government OBC card to return to power
जयपुर ( कार्यालय संवाददाता) । राजस्थान विधानसभा चुनाव-2023 को ध्यान में रखते हुए गहलोत सरकार (Gehlot Government) सत्ता में वापसी के लिए ओबीसी कार्ड खेलने की तैयारी में है। सरकार ओबीसी को आबादी के अनुपात में आरक्षण देकर अपनी चुनावी राह को आसान बनाने की जुगत में है। प्रदेश के एससी-एसटी और ओबीसी मंत्रियों के साथ प्रभारी सुखजिंदर रंधावा ने इसको लेकर मैराथन बैठक की है। इसमें आरक्षण का कोटा बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
गहलोत सरकार अब आरक्षित जातियों के समर्थन के दम पर सत्ता में वापसी की कोशिशों में जुट गई है। इसी कड़ी में गहलोत सरकार ओबीसी आरक्षण को 21 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 फीसदी करने की तैयारी में है। राजस्थान कांग्रेस प्रभारी सुखजिंदर रंधावा की एससी-एसटी और ओबीसी मंत्रियों के साथ लंबी मंत्रणा हुई है। राजस्व मंत्री रामलाल जाट ने कहा कि ओबीसी की आबादी काफी बढ़ गई है। करीब 55 फीसदी ओबीसी जनसंख्या के लिए 21 फीसदी आरक्षण बेहद कम है। वक्त के साथ अब सरकार को आरक्षण बढ़ाना चाहिए।
  • राजनीतिक और सरकारी सेवा में प्रतिनिधित्व कम
राजस्थान में ओबीसी की आबादी भले ही 55 फीसदी के आसपास बताई जाती है, लेकिन जनसंख्या के अनुपात में इनका राजनीतिक और सरकारी सेवा में प्रतिनिधित्व उतना नहीं रहा है। गहलोत सरकार इसी को ध्यान में रखते हुए इस वर्ग का आरक्षण कोटा 21 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। ओबीसी के साथ एससी का भी 1 फीसदी रिजवेर्शन बढ़ सकता है। एसटी के आरक्षण में भी 1 फीसदी की बढ़ोतरी पर विचार किया जा रहा है।
  • सरकार जल्द ले सकती फैसला
ईडब्ल्यूएस आरक्षण के बाद और आरक्षण की पचास फीसदी से ज्यादा की कैप हटने के बाद गहलोत सरकार जल्द फैसला ले सकती है। विधानसभा के आगामी सत्र में इस पर बड़ा ऐलान किया जा सकता है। राहुल गांधी के साथ पूरी कांग्रेस पार्टी भी इस पक्ष में है। प्रदेश प्रभारी रंधावा का मानना है कि इस पर प्रदेश सरकार जल्द फैसला कर सकती है। वहीं, सीएम गहलोत के साथ इस बारे में उनकी और चर्चा होनी है।
  • छत्तीसगढ़ और झारखंड ने बढ़ाया ओबीसी आरक्षण कोटा
हाल ही में छत्तीसगढ़ और झारखंड में ओबीसी आरक्षण के कोटे को बढ़ाया गया है। गहलोत सरकार भी इसी राह पर दिखाई दे रही है। सरकारें सत्ता में वापसी के लिए चुनावी साल में बड़े ऐलान करती हैं, मगर ऐन वक्त पर की गई घोषणाएं कई बार उन्हें वो सियासी फायदा नहीं दिला पातीं, जिसकी वो उम्मीद करती है। जाहिर है जादूगर एक बड़े वोट बैंक को साधने के लिए चौंकाने वाला फैसला जरूर करेंगे क्योंकि सवाल सत्ता में वापसी का है
Editorial

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