Pratahkal - Lekh Update - Divided opposition and AAP
आर राजगोपालन
आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) 26 क्षेत्रीय दलों को जोड़ने की कवायद में लगे हैं। छह दिनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान (Bhagwant Singh Maan) के साथ छह राज्यों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने शरद पवार, एम के स्टालिन, ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन और के चंद्रशेखर राव के साथ मुलाकात की और 2024 के सेमी फाइनल के रूप में देखे जा रहे दिल्ली अध्यादेश (दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल ) को राज्यसभा में रोकने को लेकर चर्चा की। जब संसद का मानसून सत्र जुलाई, 2023 के मध्य में नए भवन में शुरू होगा, तब तक सेमी फाइनल सिंड्रोम का उत्साह खत्म हो गया होगा, फिर भी आप दिल्ली अध्यादेश के मुद्दे को उठाए हुए है।
कांग्रेस (Congress) के कुछ नेताओं ने मजाक में टिप्पणी करते हुए कहा कि पंजाब और दिल्ली के मुख्यमंत्री डबल इंजन हैं और वे दोनों पंजाब के एक ही विमान में यात्रा करते हैं। लेकिन उन्होंने दिल्ली के मेयर को क्यों मझधार में छोड़ दिया ? इन्हें चाहिए था कि दिल्ली के मेयर को भी भारत जोड़ो दर्शन के लिए विमान से क्षेत्रीय दलों के नेताओं से मिलाते। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार बनाम एलजी मामले में आदेश पारित किया था, जिसमें उसने दिल्ली सरकार को कानून बनाने और अफसरों के ट्रांसफर- पोस्टिंग का अधिकार दिया था। सर्वसम्मत फैसले में शीर्ष अदालत की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 मई को कहा था कि सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि जैसे विषयों को छोड़कर दिल्ली सरकार के पास राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण होगा। लेकिन केंद्र सरकार ने इसके उलट अध्यादेश जारी कर दिया। ऐसे में केजरीवाल अधिकारियों को व्यवस्थित करने के लिए अपने सरकारी अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। हालांकि अरविंद केजरीवाल अपने 60 करोड़ के शानदार घर के बारे में एक निजी टीवी चैनल के सवाल पर चुप हो गए । अध्यादेश के खिलाफ इस लड़ाई में मूल मुद्दा उसी शीशमहल से बनी नकारात्मक छवि को दूर करना है । यही नहीं, इस मुद्दे पर पंजाब में एक महिला पत्रकार को गिरफ्तार भी किया गया।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने तमिलनाडु के समकक्ष एमके स्टालिन से मुलाकात की और केंद्र सरकार के विवादास्पद अध्यादेश के खिलाफ अपने अभियान में समर्थन मांगा, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाओं पर नियंत्रण पाना है। लेकिन द्रमुक ने आप को 'इल्लै' (तमिल में इल्लै का अर्थ 'नहीं' होता है) का संकेत दिया है। इसकी वजह साफ है कि द्रमुक की आप के साथ कोई प्रतिबद्धता नहीं है। कांग्रेस को अभी अपने यूपीए सहयोगियों से इस पर बात करनी है और यह भी विश्लेषण करना है कि द्रमुक को राज्यसभा में आप का समर्थन क्यों करना चाहिए। क्या यह तमिलनाडु की राजनीति में एक तमाशा नहीं बनाएगा?
कांग्रेस पार्टी ने अभी तक राज्यसभा में दिल्ली (Delhi) अध्यादेश पर अपने रूख की पुष्टि नहीं की है। आप के शीर्ष नेताओं के अनुसार, पार्टी दो तरह की बातें करेगी। कांग्रेस राज्यसभा में इसका विरोध करेगी, लेकिन सुविधाजनक तरीके से बहिर्गमन करेगी या तटस्थ रहेगी। अनिर्णय की ऐसी स्थिति आखिरकार भाजपा को ही फायदा पहुंचाएगी और अध्यादेश पारित हो जाएगा। असल में, दिल्ली में अजय माकन और पंजाब में प्रताप सिंह बाजवा द्वारा संभावित विद्रोह को रोकने के लिए पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को उन्हें साथ लेकर चलना ही होगा । भगवंत मान की उपस्थिति में स्टालिन के साथ बैठक के बाद केजरीवाल ने कहा, यदि निर्वाचित सरकार का अफसरों पर नियंत्रण नहीं है, तो निर्वाचित सरकार होने का कोई मतलब नहीं है। इतिहास में पहली बार, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को रद्द किया है। यह असांविधानिक और अलोकतांत्रिक है। केजरीवाल ने बताया कि यह अध्यादेश मानसून सत्र में आएगा। राज्यसभा में उनके समर्थन में 93 सीटें हैं, अगर सभी गैर-भाजपा दल साथ आते हैं, तो हम उन्हें परास्त कर पाएंगे। मैं एमके स्टालिन के समर्थन के लिए आभारी हूं। हर गुजरते दिन के साथ मैं अधिक आत्मविश्वास महसूस कर रहा हूं और यह 2024 का सेमी फाइनल है।
केजरीवाल का उद्देश्य विपक्षी दलों को अध्यादेश के खिलाफ एकजुट करना और संसद के उच्च सदन में उसे रोकना है, जहां विपक्ष के पास भाजपा और उसके सहयोगियों की तुलना में अधिक सीटें हैं। इसी क्रम में केजरीवाल ने बीते शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी मुलाकात की। केजरीवाल जब ममता बनर्जी, शरद पवार और हेमंत सोरेन जैसे नेताओं से मिले, तो उन्हें अध्यादेश के खिलाफ राज्यसभा में मतदान करने के लिए भारी समर्थन मिला। पर केजरीवाल ने महसूस किया है कि कांग्रेस के मजबूत समर्थन के बिना कांग्रेस से निकले ये क्षेत्रीय संगठन खरगे के इशारे पर चलेंगे और आप के दावे को झुठला देंगे। इससे अरविंद केजरीवाल द्वारा इसे 2024 का सेमी फाइनल बताने जैसे बयानों को झटका लगेगा । वास्तव में कांग्रेस का असली रंग अब सामने आ गया है, जिसे आप नेता भी महसूस कर रहे हैं।
दक्षिण भारत की सियासत की चर्चा तेलुगू देशम पार्टी का जिक्र किए बिना पूरी नहीं हो सकती है। आंध्र प्रदेश में पुनर्गठबंधन की राजनीतिक चर्चाओं के बीच तेलुगू देशम पार्टी के नेता चंद्रबाबू नायडू ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह से मुलाकात की।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी इस बैठक में मौजूद थे, जो गृहमंत्री के आवास पर हुई थी। भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगी तेदेपा के बीच संभावित गठबंधन की अटकलों के बीच हुई इस बैठक में माना जाता है कि इन नेताओं ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में एक साथ चुनाव लड़ने पर चर्चा की। नायडू की पार्टी आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी पार्टी है। अगस्त के मध्य में विजयवाड़ा में चंद्रबाबू नायडू एक विशाल बैठक में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत कर सकते हैं। तेदेपा का वोट बैंक सिकुड़ गया है। उस खालीपन मशहूर उभरते नायक पवन कल्याण ने भरा है। उनकी पार्टी का नाम जन सेना पार्टी है। वह भी एनडीए के साथ गठबंधन करना चाहते हैं ।
Editorial

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