Pratahkal - Lekh Update - A rosy picture of the Economy
अजय बग्गा
वित्त वर्ष 2023 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था (Economy) के रूप में उभरा है। विकास की तमाम उम्मीदों को छोड़ते हुए जनवरी से मार्च, 2023 की तिमाही में भारतीय जीडीपी (JDP) 6.1 फीसदी की दर से बढ़ी। इसने संपूर्ण वित्त वर्ष 2023 के लिए सकल घरेलू उत्पाद की समग्र वृद्धि को 7.2 फीसदी के स्तर पर पहुंचा दिया। अन्य शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में भारत के बाद इंडोनेशिया का स्थान है, जिसने पिछले वर्ष 5.3 फीसदी की दर से विकास किया। सरकारी व निजी पूंजीगत खर्च में बढ़ोतरी, कृषि एवं सेवा क्षेत्र में बेहतर विकास के कारण भारत की जीडीपी उम्मीद से ज्यादा रही, जबकि निजी खपत की दर सुस्त रही। विभिन्न क्षेत्रों के प्रदर्शन को देखें, तो विनिर्माण क्षेत्र में सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि मार्च तिमाही में बढ़कर 4.5 प्रतिशत हो गई, जबकि एक साल पहले यह 0.6 प्रतिशत थी। खनन क्षेत्र में चौथी तिमाही में जीवीए वृद्धि पिछले वर्ष के 2.3 प्रतिशत की तुलना में 4.3 प्रतिशत थी । निर्माण क्षेत्र मार्च तिमाही में 10.4 प्रतिशत बढ़ा, जो 2021-22 की इसी अवधि में 4.9 प्रतिशत था । कृषि क्षेत्र की वृद्धि पिछले वर्ष के 4.1 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गई । व्यापार संतुलन में भी सुधार हुआ है, क्योंकि निर्यात की तुलना में आयात में अधिक गिरावट आई। इसने जीडीपी के आंकड़े को बढ़ावा दिया । उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में गिरावट ने भी विकास दर को ऊपर उठाने में मदद की।
जीडीपी (JDP) के आंकड़े विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत के लिए उम्मीद बढ़ाते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम नहीं है। विशेष रूप से मानसून के रूख और वैश्विक मंदी के जोखिमों को लेकर चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, लेकिन इस शानदार प्रदर्शन ने वित्त वर्ष 2024 में आर्थिक गतिविधियों के विकास की गति को छह फीसदी से अधिक होने की उम्मीद बढ़ा दी है।
भारत के प्रमुख आर्थिक सलाहकार का मानना है कि चालू वित्त वर्ष 2024 में अर्थव्यवस्था में ठोस प्रदर्शन देखने को मिलेगा उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण मांग में सुधार के संकेत हैं, और शहरी मांग कायम है और यात्री वाहनों की बिक्री बढ़ रही है। बढ़ती ग्रामीण मजदूरी, रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन, और कम खाद्य मुद्रास्फीति की उम्मीद ग्रामीण मांग दृष्टिकोण के लिए अच्छा संकेत है। हालांकि, मानसून के मौसम में अल नीनो की स्थिति कृषि उत्पादन और ग्रामीण आय के लिए एक प्रमुख जोखिम है। मानसून में देरी हुई है, पर अब भी मौसम विभाग सामान्य मानसून की भविष्यवाणी कर रहा है। मानसून संबंधी किसी भी जोखिम या भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को छोड़कर, भारत की अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की वृद्धि के प्रारंभिक अनुमान को पार कर सकती है । अल नीनो द्वारा मॉनसून की बारिश को प्रभावित करने पर इसमें 0.5 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।
उम्मीद है कि जीडीपी के शानदार आंकड़े को देखते हुए रिजर्व बैंक इस साल की दूसरी छमाही में संभावित वैश्विक मंदी के जोखिमों के बावजूद अपने नीतिगत रूख पर कायम रहेगा । चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में प्रमुख संकेतकों पर पकड़ बरकरार है, जिसमें जीएसटी संग्रहण, पीएमआई (विनिर्माण से ज्यादा सेवा क्षेत्र में वृद्धि), उद्योग ॠण में वृद्धि, स्टील एवं सीमेंट का उत्पादन और व्यापार घाटे में कमी, आदि शामिल हैं। मॉर्गन स्टेनली की एक हालिया रिपोर्ट में वर्ष 2013 से 2023 के बीच भारत में दस प्रमुख आयामों पर बदलाव की प्रशंसा की है, जिसमें आपूर्ति पक्ष नीति सुधार, अर्थव्यवस्था का औपचारिककरण, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, सामाजिक हस्तांतरण का डिजिटलीकरण, दिवालिया कानून, मुद्रास्फीति पर लचीला लक्ष्य, एफडीआई पर फोकस, भारत के लाभ उठाने का क्षण, कॉर्पोरेट मुनाफे के लिए सरकारी समर्थन, आदि शामिल हैं। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया है, जो अगले दशक और उससे भी आगे मजबूती से बढ़ने के लिए तैयार है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2023 के लिए अपनी वार्षिक रिपोर्ट में, इस बात पर प्रकाश डाला है कि भारत धीमी वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक विकास का एक द्वीप रहा है, लेकिन उस लाभ को बनाए रखने के लिए संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। मुद्रास्फीति कम हो रही है और बाहरी खाता मजबूत है। इस बात को लेकर व्यापक सहमति है कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए विकास की गति मुद्रास्फीति के दबाव के बावजूद 2023-24 में बनी रहेगी, भले ही वैश्विक विकास धीमा होने के साथ-साथ लंबे भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय बाजार की अस्थिरता में संभावित उछाल नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकता है।
रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2024 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जो मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक कारकों, वित्तीय स्थितियों और पिछले सुधारों से अपेक्षित लाभांश में मदद करता है। वैश्विक स्तर पर उपभोक्ता वस्तुओं और खाद्य कीमतों में नरमी, अच्छी कृषि, संपर्क- गहन सेवाओं में निरंतर उछाल और पूंजीगत व्यय पर सरकार का निरंतर ध्यान विकास की गति बनाए रखने में मदद कर रहा है, भले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल हो । उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ रहा है, जैसा कि आरबीआई के मार्च 2023 के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण में दिखाया गया है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, बुनियादी ढांचे और पूंजीगत व्यय पर सरकार की नीति जीडीपी को बड़ा बढ़ावा देगी। रिजर्व बैंक ने कहा कि पूंजीगत व्यय के लिए उच्च आवंटन के अलावा, विकास की गति को बढ़ावा देने के लिए बजट में कई घोषणाएं की गईं, जिसमें सफल उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी शामिल है। अमेरिका और यूरोप में बैंकों के विफल होने के बावजूद भारतीय बैंकिंग क्षेत्र लचीला बना हुआ है। बैंकों और कॉरपोरेट की बैलेंस शीट काफी हद तक साफ हो गई है और विकास की गति अगले दशक और आगे भी जारी रहेगी। इन गुलाबी अनुमानों के लिए मानसून एक बड़ा जोखिम है। निरंतर वृद्धि और विकास के लिए सामान्य मानसून जरूरी है, इसलिए सबकी नजरें आसमान पर टिकी हैं कि मानसून के बादल आएं और जीवनदायी पानी बरसाएं।
Editorial

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