Pratahkal-Mumbai-Acharya Mahashraman-Purification of consciousness possible through Self Study and Meditation

मुंबई । बुधवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) खाणिवडे से प्रस्थान कर शिरगांव में स्थित विवा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIVA Institute of Technology) में पहुंचे। यहाँ आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि स्वाध्याय और ध्यान से चेतना की शुद्धि हो सकती है और भीतर का परमात्मा प्रकाशित हो जाता है। शरीर में शीर्ष का जो स्थान है, वृक्ष में मूल का जो स्थान है, उसी प्रकार साधुत्व में ध्यान का होता है। ध्यान में एकाग्रता होती है तो चेतना की निर्मलता बन सकती है। तेरापंथ में प्रेक्षाध्यान के नाम से ध्यान की पद्धति प्रचलित हैं। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ द्वारा प्रेक्षाध्यान का प्रयोग कराया जाता था। ध्यान में आदमी जितना स्थिर हो सकता है, ध्यान अच्छा हो सकता है। आदमी को सदैव स्वाध्याय करने का प्रयास करना चाहिए। स्वाध्याय में रत रहने से विचारों का गमनागमन कम हो जाता है। आदमी के विचारों में निर्मलता रहे, भावक्रिया शुद्ध हो तो चेतना की निर्मलता बनी रह सकती है और आत्मा पर लगा पूर्वकृत मल भी साफ हो सकता है। गुरुदर्शन करने वाली साध्वी निर्वाणश्री ने अपने विचार व्यक्त किए तथा अपने सहवर्ती साध्वियों संग गीत का संगान किया।
Editorial

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