Pratahkal-MumbaiMeRajasthan-Acharya Mahashraman auspicious debut in Safale
मुंबई । आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) का रविवार को सफाले में मंगल पदार्पण हुआ। वे मुंबई (Mumbai) चातुर्मास हेतु गतिमान हैं। प्रातः गुरुदेव ने केलवा रोड से प्रस्थान किया। स्थानीय जैन उपाश्रय में उन्होंने स्थानीय जैन समाज को आशीर्वाद दिया। उन्होंने क्षेत्र से संबंधित मुनि प्रिंस कुमार के ज्ञातिजनों के निवास पर उन्हें उपासना का अवसर दिया। मार्ग में जैन उपाश्रय एवं जैन स्थानक के समक्ष भी उन्होंने मंगलपाठ प्रदान प्रदान किया। इस दौरान स्थानकवासी साध्वी विरागसाधनाश्री आदि साध्वियों ने उनकी सुखसाता पूछी।
सफाले प्रवास में लगभग 8 वर्षों के बाद मुनि अजीत कुमार, मुनि जंबू कुमार, मुनि अभिजीत कुमार आदि ने आचार्य महाश्रमण के दर्शन किए। मुनि मोहजीत कुमार आदि मुनिवृंद भी गुरु सन्निधि में पहुंचे। लगभग 8.5 किमी विहार कर उनका एच. एम. पंडित हाईस्कूल में पदार्पण हुआ।
भिक्षु समवसरण में आयोजित कार्यक्रम में गुरुदेव ने कहा कि शरीर की सक्षमता के रहते-रहते आदमी को धर्म का समाचरण कर लेना चाहिए। शरीर असक्षम हो जाए तो धर्म के कार्य करने में बाधा उत्पन्न हो जाती है। इन्द्रियहीनता न आए, तब तक धर्म कर लेना चाहिए। इस दुर्लभ मानव जीवन का अच्छा उपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। जो आदमी साधु बन जाता है, मानों वह अपने शरीर का कितना अच्छा उपयोग कर लेता है। अक्षम, रुग्ण और सेवासापेक्ष की सेवा करना बहुत अच्छी साधना होती है। इसलिए आदमी को शरीर को सक्षम रहते हुए ही धर्माचरण कर अपने जीवन का कल्याण करने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम को साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी उद्बोधित किया। स्थानकवासी समाज की साध्वी विरागसाधना ने भी अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया। स्थानीय तेरापंथी सभा (Terapanthi Sabha) के पदाधिकारियों ने विचार रखे। महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। तेरापंथ कन्या मण्डल व ज्ञानार्थियों ने आचार्य महाश्रमण की अभिवंदना की।

Editorial

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