Pratahkal - Mumbai News Update - Acharya Mahashraman reached Kelve Road making Palghar holy
मुंबई : बृहत्तर मुंबई को पावन बनाने अग्रसर तेरापंथ धर्मसंघ (Agrasar Terapanth Dharmasangh) के अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) का शनिवार शाम केलवे रोड पदार्पण हुआ। महाराष्ट्र (Maharashtra) की जनता में सदाचार की शिक्षा प्रदान करते हुए अणुव्रत यात्रा के साथ गुरुदेव निरंतर एक-एक क्षेत्र को पावन बनाते हुए गतिमान हैं। प्रातः उन्होंने पालघर से विहार किया। मार्ग में आशीर्वाद प्रदान करते हुए वे गंतव्य की ओर गतिमान हुए। आज का उनका विहार मार्ग मुखयत: रेलवे लाइन के निकट निर्माणाधीन सड़क पर था। एक ओर दूर से नजर आते विशालकाय पर्वत, हरे भरे मैदान नयनाभिराम दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे, वहीं रेलवे लाइन से गुजरती ट्रेनें पदयात्रियों के आकर्षण का विषय बनी। लगभग 9.5 किमी विहार कर आचार्य महाश्रमण केलवे रोड स्थित जिला परिषद पाठशाला
(District Council School)
में प्रवास हेतु पहुंचे। चतुर्दशी के अवसर पर गुरुदेव द्वारा हाजरी का भी वाचन किया गया।

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धर्मसभा में मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मनुष्य जीवन को सबसे दुर्लभ कहा गया है। व्यक्ति समय मात्र भी प्रमाद ना करे और जागरूकता रखे। समय को साधारणतया टाइम के रूप में जाना जाता है, पर जैन दर्शन में समय को काल की लघुतम इकाई के रूप में उल्लेखित किया गया है। वर्तमान में अप्रमत्त संयत गुणस्थान एक बार में एक मुहूर्त से ज्यादा समय तक नहीं टिकता। कम से कम वह अवस्था बार बार आए ये तो प्रयास हो। समय का सम्यक उपयोग करे यह अपेक्षा है।
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प्रसंगवश उन्होंने आगे कहा कि उड़ीसा में ट्रेन दुर्घटना हुई है। कितने लोग मृत्यु के शिकार भी हो गये। कितने ही उससे प्रभावित हुए हैं। मानव मात्र के प्रति करुणा व सेवा की भावना रहे। इसे समय में सरकार और भी ध्यान देती है और भी वर्ग ध्यान देते है। यह भी एक लौकिक सेवा है। सांसारिक संदर्भ में लौकिक सेवा का अपना महत्व है। हमारे साधु-साध्वियां भी एक दूसरे की सेवा करते रहें। सेवा के सामने बाकी कार्य भी गौण हैं। यह सेवा की भावना सभी की भीतर में रहे। संघ के सभी सदस्य संघ की मर्यादाओं के प्रति जागरूक रहे। तीन चीजों से हमारा लगाव रहे – हमें अपने साधुपन से प्यार हो, संघ से प्यार हो और फिर गुरु से प्यार हो। इन तीनों के प्रति निष्ठा, श्रद्धा, समर्पण रहना चाहिए। तत्पश्चात साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा का उद्बोधन हुआ।
Editorial

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