Pratahkal-Acharya Mahashraman rainy season started with 7 initiations

मुंबई । तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने वर्ष 2023 के चातुर्मास के लिए नन्दनवन परिसर में प्रवेश के दूसरे दिन ही गुरुवार को दो श्रेणी आरोहण (समणी से साध्वी दीक्षा), चार समणी दीक्षा व एक साधु दीक्षा प्रदान की। सात दीक्षाओं को देख जनमानस हर्षविभोर था।
गुरुवार को नन्दनवन में निर्धारित समयानुसार आचार्य महाश्रमण के महामंत्रोच्चार के साथ दीक्षा समारोह का शुभारम्भ हुआ। मुमुक्षु मानवी और मुमुक्षु भाविका ने दीक्षार्थियों का परिचय दिया। समणी अक्षयप्रज्ञा ने श्रेणी आरोहण करने वाली समणीद्वय का परिचय दिया। पारमार्थिक शिक्षण संस्था के अध्यक्ष बजरंग जैन ने दीक्षार्थियों के आज्ञा पत्र का वाचन किया। दीक्षार्थी विपुल जैन, मुमुक्षु संजना, मुमुक्षु समता, मुमुक्षु आयुषी व मुमुक्षु अंकिता ने अपने विचार रखे। समणी विनीतप्रज्ञा और समणी जगतप्रज्ञा ने गीत का संगान किया।
साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने तेरापंथ की दीक्षा प्रणाली और इसके महत्त्व के बारे में बताया। इसके उपरान्त आचार्य महाश्रमण ने कहा कि चातुर्मासकाल प्रारम्भ होने से पूर्व यह दीक्षा समारोह मंगल सूचक है। संयम रत्न के समक्ष दुनिया की समस्त संपदा तुच्छ होती है। आचार्यश्री ने दीक्षार्थियों के परिजनों को सम्मुख उपस्थित होने का इंगित प्रदान किया। उपस्थित परिजनों से मौखिक रूप में भी दीक्षा की आज्ञा ली तथा दीक्षार्थियों की मानसिक दृढ़ता का अंतिम परीक्षण किया।

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इसके बाद उन्होंने आचार्य भिक्षु, आचार्य तुलसी व आचार्य महाप्रज्ञ का स्मरण करने के उपरान्त दीक्षा प्रदान कर दी। उन्होंने ने नवदीक्षित साधु का केशलोच किया तो साध्वीप्रमुखा ने नवदीक्षित साध्वीद्वय का केशलोच किया। तदुपरान्त नवदीक्षित साधु-साध्वियों को रजोहरण भी आचार्यश्री और साध्वीप्रमुखा ने प्रदान किया। हर एक विधि पर ‘ओम अर्हम्’ की ध्वनि से वातावरण गुंजायमान हो रहा था। नवदीक्षित साधु, साध्वियों व समणियों को आचार्यश्री ने नए नाम प्रदान किए- मुमुक्षु विपुल जैन- मुनि विपुलकुमार, समणी विनीतप्रज्ञाजी- साध्वी वैराग्यप्रभा, समणी जगतप्रज्ञाजी- साध्वी समत्वप्रभा, मुमुक्षु समता- समणी समत्वप्रज्ञा, मुमुक्षु आयुषी- समणी आर्जवप्रज्ञा, मुमुक्षु अंकिता- समणी अभयप्रज्ञा, मुमुक्षु संजना- समणी स्वातिप्रज्ञा।
आचार्यश्री ने नवदीक्षित साधु, साध्वियों व समणियों से कहा कि अब संयम का पालन करने का प्रयास हो। चलने, बोलने, उठने, बैठने, खाने-पीने, सोने अर्थात् सभी कार्य संयमपूर्वक हों। नवदीक्षित साध्वियों को साध्वीप्रमुखा की सन्निधि में, नवदीक्षित मुनि को मुनि दिनेशकुमार के संरक्षण व नवदीक्षित समणियों को साध्वीवर्याज के संरक्षण में प्रदान कर उन्हें अपने नवजीवन के विकास की प्रेरणा प्रदान की।
इस दौरान आचार्यश्री ने मुमुक्षु कल्प को साधु प्रतिक्रमण सीखने की अनुमति भी प्रदान की। चार नई मुमुक्षुओं को मंगलपाठ सुनाया। साध्वी सुषमाकुमारी ने अभिव्यक्ति दी। साध्वी मधुस्मिता ने सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया।
Editorial

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