Pratahkal - Main News Update - Rain became a disaster
नई दिल्ली : कुछ दिन पहले पूरा देश गर्मी की तपिश से हांफ रहा था। लगातार चल रही लू के थपेड़ों ने लोगों को परेशान कर दिया था । कुछ ही दिनों में तस्वीर पूरी तरह बदल गई है । देशभर में मॉनसून (Monsoon) की बारिश ने गर्मी को कम कर दिया है। पिछले कुछ दिनों देश के विभिन्न राज्यों में लगातार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। राजस्थान (Rajasthan), हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, उत्तर प्रदेश, गोवा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र (Maharashtra) के बड़े इलाकों में बारिश जारी रहेगी।
कहीं ढहा पुल तो कहीं बहीं गाड़ियां
हिमाचल में भी बुरा हाल
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में भी वज्रपात के साथ भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 1 जुलाई तक लगातार बारिश (Heavy Rain) हो सकती है। राज्य के कई हिस्से पहले ही बारिश के कारण बाढ़ की चपेट में हैं। नदी का जलस्तर बढ़ गया है। सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो गए। फसलें भी नष्ट हो गई हैं। हिमाचल में पिछले 24 घंटे में बारिश के कारण 6 लोगों की मौत हो गई। राज्य और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया दल आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बचाव अभिय चला रहे हैं।
बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त
उत्तराखंड (Uttarakhand) के पहाड़ी इलाकों में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। अमरनाथ यात्रा भी बाधित हुई। देहरादून में मध्यम से भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। उत्तराखंड के कुल आठ जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने कहा कि उत्तराखंड में 5 जुलाई तक बारिश जारी रहेगी। ऐसे में लोगों को जितना हो सके घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। अमरनाथ यात्रा के मार्ग पर राज्य और राष्ट्रीय आपदा बलों को तैनात किया गया है। भारी बारिश के बावजूद जनहानि से बचने के लिए प्रशासन सक्रिय है।
बाढ़ से जूझ रहा असम
वहीं असम के बारपेटा जिले में बाढ़ ने लोगों की खुशियों पर पानी फेर दिया है। बारपेटा जिले के 93 गांवों के 67,000 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की रिपोर्ट के अनुसार, बारपेटा जिले में 225 हेक्टेयर फसल भूमि वर्तमान में पानी में डूबी हुई है। पिछले 48 घंटों में जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से तीन बच्चों की मौत हो गई, जिससे राज्य में मरने वालों की संख्या छह हो गई है।


Editorial

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