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जुलाई के पहले सप्ताह से असर दिखा सकता है अल नीनो, कम हो सकती बारिश
By EditorialPublished on
भारत (India) की सबसे अप्रत्याशित मौसमी घटना (Unexpected Weather Event) यानी 'अल नीनो' जुलाई (July) के पहले सप्ताह में असर दिखा सकता है। 'अल नीनो' की स्थिति बनने से दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर असर दिख सकता है। मौसम विभाग ने मंगलवार को ये जानकारी दी।

नई दिल्ली : भारत (India) की सबसे अप्रत्याशित मौसमी घटना (Unexpected Weather Event) यानी 'अल नीनो' जुलाई (July) के पहले सप्ताह में असर दिखा सकता है। 'अल नीनो' की स्थिति बनने से दक्षिण पश्चिम मॉनसून पर असर दिख सकता है। मौसम विभाग ने मंगलवार को ये जानकारी दी।
बताया जा रहा है कि 'अल नीनो' की स्थिति बनने के पीछे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) या चक्रवात बिपरजॉय बड़े कारण हैं। आईएमडी (IMD) ने पहले कहा था कि 'अल नीनो' की स्थिति बनने के बावजूद दक्षिण पश्चिम मॉनसून (South West Monsoon) के दौरान सामान्य सामान्य वर्षा होने की उम्मीद है। दक्षिण अमेरिका के पास प्रशांत महासागर में पानी के गर्म होने से ‘अल नीनो' की स्थिति बनती है, जो आमतौर पर भारत में मॉनसूनी हवाओं के कमजोर होने और शुष्क मौसम से जुड़ा है। 'सामान्य' मॉनसून का आईएमडी के अनुमान का यह मतलब नहीं है कि देश के हर हिस्से में मौसम के दौरान अच्छी वर्षा हो। अल-नीनो हवाओं के दिशा बदलने, कमजोर पड़ने तथा समुद्र के सतही जल के ताप में बढ़ोत्तरी की विशेष भूमिका निभाती है। एल नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणामस्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है। असर सीजन के अंत तक जारी रहेगा मॉनसून पर भारत का लगभग आधा कृषि क्षेत्र निर्भर करता है। हालांकि अधिकांश समय यह निर्धारित गति और समय से आगे बढ़ता है। चार महीने यानी जून-सितंबर का मॉनसून मौसम देश के जलाशयों, भूजल, बिजली उत्पादन क्षमता, समग्र अर्थव्यवस्था और लोगों की खुशहाली को फिर से भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, इस वर्ष इसका आना कुछ असामान्य रहा है। इस साल अल नीनो कारक के कारण मानसून पर असर पड़ने की आशंका है। अल नीनो का प्रभाव जुलाई के पहले सप्ताह के आसपास ध्यान देने योग्य हो जाएगा। सूखे जैसी स्थिति तो नहीं होगी लेकिन बारिश कम होगी और पूर्वी तथा उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश होगी। इसका असर सीजन के अंत तक जारी रहेगा। मॉनसून इस समय सक्रिय है आईएमडी वैज्ञानिक सोमा सेन ने बताया, पिछले 4-5 दिनों में तेजी से आगे बढने के साथ ही मॉनसून इस समय सक्रिय है। उत्तर पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो मॉनसून का असर लगभग पूरे देश पर पड़ा है। पूरा गुजरात और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान मॉनसून की चपेट में आ गया है। अगले दो दिनों में उम्मीद है कि दक्षिण पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के शेष हिस्से भी कवर हो जाएंगे। आईएमडी के अनुसार, 21 जून 1961 (62 साल) के बाद पहली बार रविवार को दिल्ली और मुंबई में एक साथ मौसमी बारिश हुई। हालांकि यह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में मॉनसून निर्धारित समय से दो दिन पहले पहुंच गया, लेकिन देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में इसका आगमन लगभग दो सप्ताह की देरी से हुआ।

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