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लॉस एंजलेस 3 : तीन मंजिला होलीवुड साइन शहर की पहचान बना
By EditorialPublished on
हॉलीवुड (Hollywood) की सड़कों पर फिल्मी सितारों के घरों के नक्शों सहित उनके पते दर्शाते फोल्डर धड़ल्ले से बिकते नजर आते हैं। होलीवुड की वह प्रसिद्ध पहाड़ी जहां बड़े बड़े अक्षरों में होलीवुड लिखा हुआ है, लॉस एंजलेस (Los Angeles) के मध्य में अवस्थित है। पहाड़ी उंची होने तथा अक्षर बहुत बड़े बड़े होने के कारण दूर दूर से नजर आते हैं। इन अक्षरों को होलीवुड साईन कहते हैं। विश्व में यह अपने तरह की अलग ही पहचान है। 1925 में जब पहली बार बेन हर फिल्म आई तब यह साईन बनाये गये थे। अभी पिछले महीने ही बेन हर की नवीनतम फिल्
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हॉलीवुड (Hollywood) की सड़कों पर फिल्मी सितारों के घरों के नक्शों सहित उनके पते दर्शाते फोल्डर धड़ल्ले से बिकते नजर आते हैं। होलीवुड की वह प्रसिद्ध पहाड़ी जहां बड़े बड़े अक्षरों में होलीवुड लिखा हुआ है, लॉस एंजलेस (Los Angeles) के मध्य में अवस्थित है। पहाड़ी उंची होने तथा अक्षर बहुत बड़े बड़े होने के कारण दूर दूर से नजर आते हैं। इन अक्षरों को होलीवुड साईन कहते हैं। विश्व में यह अपने तरह की अलग ही पहचान है। 1925 में जब पहली बार बेन हर फिल्म आई तब यह साईन बनाये गये थे। अभी पिछले महीने ही बेन हर की नवीनतम फिल्म प्रदर्शित हुई मगर वह ज्यादा चल नहीं पाई।
1984 के ओलम्पिक खेलों के दौरान पहली बार इस होलीवुड साईन रोशनी से सुसजित किया गया। ये साईन इतने ऊंचे हैं कि कई लोग इस आत्महत्या कर लेते हैं। जिस तरह हमारी मुम्बई की फिल्म नगरी में संघर्ष करने हे देश भर के युवा आते है और निराश होकर कोई कोई आत्महत्या कर घटनाएं होलीवुड में भी होती है। इसे देखते हुए प्रशासन ने इस पर चढ़ने लगा दी है तथा इसके चारों तरफ रेजर वायर, इन्फ्रा रेड, मोशन सेन्सर व अलार्म लगा दिए हैं। हेलीकोप्टर पेट्रोल करते हुए इसकी चौकसी करते हैं।
1976 में किसी नशेड़ी ने साईन पर चढ़कर होलीवुड के दो 'ओ' अ एक तरफ काले पर्दे टांग दिये व अक्षर के बीच में सफेद पर्दे की पट्टी तान इन्हें आ की जगह ई बना दिया। इस कारण दूर से यह होलीवीड पढा जाने लगा। वीड यहाँ गांजे-भांग को कहते हैं, उसका यह प्रयास केलीफोर्निया में उदार नशीले द्रव्य कानून बनाने पर बल देने हेतु था।
होलीवुड के ये अक्षर चार मंजिले ऊंबे है, 450 फीट लम्बे और 240 23 जनी हैं। सभी नौ अक्षर 45-45 फीट ऊंचे हैं, सबसे घौड़ा अक्षर डब्ल्यू के 40 फीट है। बाकी सभी 33 से 35 फीट चौडाई के हैं। प्रसिद्ध पत्रिका प्लेके मालिक हम हेफनर ने चन्दा र होलीवुड साईन के पीछे की 135 एकड़ भूमि खरीद कर ट्रस्ट को दे दी जिससे यह स्मारक सुरक्षित रहे।
होलीपुड़ मुनीश के घर से दूर और स्टेशन के समीप था इसलिये ट्रेन से उतरते ही इसे निपटा दिया। शाम होने लगी, हम घर की तरफ अग्रसर हो गए। लॉस एजलेस का अर्थ है फरिस्तों का शहर वाकई यह शहर इस उक्ति से किसी बदर कम नहीं था। शनिवार की शाम थी, सड़कों पर भयंकर ट्राफिक था। 8 लेन का म था, 4 आने के 4 जाने के फिर भी वाहन सड़कों पर समा नहीं रहे थे और दूर दूर तक लम्बी लम्बी कतारें बन गई थी।
हमारी कार में हम दो जने थे इसलिये हमें पहली कतार में जाने की सुविधा थी। इस कतार को कार पूल कहते हैं। जिन वाहनों में दो से अधिक सवारियां हो उन्हें ही इस कतार में चलने की सुविधा प्राप्त थी। इसके द्वारा लोगों को अपनी कारें पूल करने के लिये प्रोत्साहित किया जाता था ताकि लोग एक दूसरे की कारों में जायें और सड़कों पर कम वाहन उतरें। इस कतार में कम वाहन थे इसलिये हमें जगह जगह नजर आ रहे ट्राफिक जाम का सामना नहीं करना पड़ा।
शहर बहुत बड़ा और फैला हुआ है फिर भी सड़क पर एक व्यक्ति तक का नामों निशां नजर नही आ रहा था। चारों तरफ वाहन ही वाहन, कोई कहीं रूक कर किसी से कुछ पूछना भी चाहे तो उसकी कोई गुंजाइश नहीं थी, बस चलते रहो, सन बोर्ड देखो और चलते रहो एसी स्थिति में एक्जिट लेकर सड़क से उतरना है एक मात्र विकल्प बचता था। सड़क के बीच बीच बस्तियां भी थी तो उन्हें सड़क की दोनों तरफ दीवारे खड़ी करके अवरुद्ध कर दिया गया था जिससे बस्ती से कोई सड़क पर नहीं आ सके।
हमारे यहां हाईवेज के बीच में कोई बस्ती आ जाती है तो उसे अलग थलग करने के प्रयास नहीं किये जाते वरन आसानी से बेरियर खड़े कर दिये जाते हैं। जिससे वाहनों व चालकों को घोर असुविधा होती है। बस्तीयों का हाईवेज से कोई सीधा सम्पर्क होना ही नहीं चाहिये वरन बस्ती में जाने के लिये हाईवे से अलग एक्जिट निकलना चाहिये जिसे हम सर्विस रोड कहते हैं।
अक्सर बस्तीवासियों के दबाव में व्यस्त हाईवेज पर बैरियर बना दिये जाते है। उदयपुर में देबारी के बाहर इसी तरह के दबाव के चलते एसे खतरनाक बैरियर बना दिये गये हैं कि उन पर गाड़ी चलाना भी मुश्किल हो जाता है। गाड़ियों को पहुँचने वाले नुक्सान की बात नहीं भी करें तो भी दुर्घटना की संभावना बनी रहती हैं। ये बैरियर अपराधिक कार्रवाई है और हाईवे अधिकारियों को इस तरफ ध्यान देना चाहिये। बस्तीवासियों को सुरक्षा देनी ही है तो सर्विस रोड बना दो, जगह नहीं है तो हाईवे की दोनों तरफ दीवार खड़ी कर दो ताकि बस्तीवासियों की मुर्गियां तक सड़क पर नहीं आ सकें।
घर पर मुनीश की पत्नी प्रीति ने भाव विभोर होकर मेरा स्वागत किया। वह अत्यन्त प्रसन्नचित्त और हंसमुख महिला है, उसका व्यक्तित्व ही एसा है उसकी झलक मात्र से खुशियों का संचार हो जाता है। जैसे छूत की बीमारी होती है उसी तरह खुशियों की कोई बीमारी हो तो प्रीति के सान्निध्य में आकर लग जाती है। प्रीति बहुत अच्छी कवियित्री भी है। छोटी छोटी बातों को शब्दों में पिरोकर ऐसा गूंथ देती है कि चित्त प्रसन्न हो जाता है। मेरे स्वागत में भी एक कविता लिख कर उसने डाइनिंग टेबल पर लगा रखी थी, पहले तो मेरा ध्यान गया ही नहीं जब देखा तो उसकी प्रतिभा और वात्सल्य का कायल हो गया।
चार दिन की लम्बी यात्रा के बाद घर जैसा सूकून मिल रहा था। सबसे पहले मैंने अपने पेन्ट शर्ट से निजात पाई और कुर्ता-पाजामा पहना। ऐसा लग किसी कैद से आजाद हो गया हूँ। केलीफोर्निया इस साल भी सूखे के चपेट में मौसम विज्ञानियों ने अल नीनो प्रभाव से अच्छी वर्षा की भविष्यवाणी की थी वह फलित नहीं हुई। हमारे यहां अल नीनो से वर्षा कम होती है, यहां विपरीत सूखे के कारण पानी के उपयोग में कटौती की घोषणा की गई है। लोगों से कहा गया है कि अधिक से अधिक जल का संरक्षण करें। इस वजह से लोगों के घरों के बाहर के लोन्स को पानी देने को धोने आदि में होने वाली पानी की पर रोक लग गई है।
पिछले चार वर्षों से पानी की कमी चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक किसी वर्ष अत्यधिक वर्षा नहीं आयगी हालात सामान्य नहीं हो पायेंगे। एक तरफ जल की निरन्तर कमी, दूसरी तरफ जनसंख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि से हालात और बिगड़ने के आसार हैं। लॉस एंजलेस शहर की जलापूर्ति पूर्ण करने के लिय अभी दूसरे राज्यों से पानी मंगाया जा रहा है। कोई आश्चर्य नहीं कि यही हालात रह तो यहां भी हमारे तरह टेंकर माफीयाओं का उदय हो जाये।

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