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यूएस एयरपोर्ट्स पर अब भारतीयों को नहीं करना पड़ेगा लंबी कतार में इंतजार, नियम बदल दिए अमेरिकी सरकार ने
By EditorialPublished on 27 Jun 2023 5:30 AM IST
अमेरिकी एयरपोर्ट्स (American Airports) के इमिग्रेशन काउंटर (Immigration Counter) पर अब पहले से अनुमोदन (Approval) प्राप्त भारतीय यात्रियों को लाइन में खड़े होकर इंटरव्यू देने की जरूरत नहीं होगी। घरेलू यात्रियों के लिए डिजीयात्रा के समान, पूर्व-अनुमोदित भारतीयों की एक चुनिंदा श्रेणी अब ऐसी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए स्वचालित कियोस्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय (International) आगमन की सुविधा प्राप्त कर सकती है।
नई दिल्ली : अमेरिकी एयरपोर्ट्स (American Airports) के इमिग्रेशन काउंटर (Immigration Counter) पर अब पहले से अनुमोदन (Approval) प्राप्त भारतीय यात्रियों को लाइन में खड़े होकर इंटरव्यू देने की जरूरत नहीं होगी।
घरेलू यात्रियों के लिए डिजीयात्रा के समान, पूर्व-अनुमोदित भारतीयों की एक चुनिंदा श्रेणी अब ऐसी प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए स्वचालित कियोस्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय (International) आगमन की सुविधा प्राप्त कर सकती है। अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा पहल के हिस्से के रूप में पहले से अनुमोदन प्राप्त कम जोखिम वाले भारतीय यात्रियों को ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम के तहत इमिग्रेशन काउंटर पर त्वरित मंजूरी देने का फैसला लिया गया है। अब ऐसे भारतीय बिना रोकटोक और लंबी प्रक्रिया के सीधे अमेरिकी हवाई अड्डों पर कियोस्क के जरिए इमिग्रेशन (Immigration) ले सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि यह प्रक्रिया कुछ साल पहले शुरू हुई थी। इसके तहत कुल 24,000 आवेदनों का निपटारा किया गया है। उनमें से कई शीर्ष नौकरशाह, राजनेता और व्यापारियों के परिवार के सदस्य हैं, जबकि कई नियमित तौर पर अपने परिजनों से मुलाकात करने अमेरिका आने वाले यात्री हैं। सूत्रों ने बताया कि अमेरिकी व्यवस्था डिजीयात्रा से अलग है। डिजीयात्रा में जहां आपको सीआईएसएफ से व्यक्तिगत जांच से बचने के लिए केवल आधार सत्यापन की आवश्यकता होती है, वहीं अमेरिकी हवाई अड्डों पर स्वचालित कियोस्क के माध्यम से गुजरने के लिए पूर्व-अनुमोदित आवेदक को कम से कम 11 भारतीय खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों से पूर्व मंजूरी प्राप्त करना जरूरी होगा। अमेरिकी सरकार की इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए भारतीय (Indian) आवेदक को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा और 100 डॉलर की फीस का भुगतान करना होगा। उसके बाद उस आवेदन को भारत में विदेश मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। इसके बाद विदेश मंत्रालय प्रत्येक आवेदन को कम से कम एक दर्जन खुफिया और प्रवर्तन एजेंसियों से क्लियरेंस लेने के लिए उसे गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भेजेगा। अनुमोदन प्राप्ति के लिए जिन एजेंसियों से क्लियरेंस की आवश्यकता है, उनमें प्रवर्तन निदेशालय, राजस्व खुफिया निदेशालय, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय सुरक्षा और विनिमय बोर्ड, जीएसटी खुफिया महानिदेशालय, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, आयकर, सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो शामिल हैं। इसके अलावा गृह मंत्रालय और उसकी खुफिया एजेंसियों से भी इनपुट लिया जा सकता है। वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ 2022-23 में भारतीयों द्वारा जीईपी के लिए मंजूरी चाहने वाले कम से कम 6,073 आवेदनों पर कार्रवाई की गई है।

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