Pratahkal - Lekh Update - US tour full of achievements
विवेक देवराय, आदित्य सिन्हा

पिछले कुछ वर्षों के दौरान अमेरिका के साथ भारत के संबंध निरंतर प्रगाढ़ हुए हैं। इस दौरान वाणिज्य, रक्षा और प्रौद्योगिकी के स्तर पर दोनों देश में व्यापक सहयोग बढ़ा है। अपने पहले कार्यकाल से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की द्विपक्षीय रिश्तों को संवारने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। हाल में प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय अमेरिकी यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों में यह नई ऊंचाई प्रत्यक्ष रूप से नजर आई। इसमें वे कड़ियां स्पष्ट रूप से दिखीं जो दोनों देशों के लोगों को बहुत मजबूती से जोड़ती हैं। प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) के लिए राष्ट्रपति बाइडन (Biden) द्वारा दिए गए राजकीय भोज और अमेरिकी संसद को दूसरी बार संबोधित करने के अवसर ने इस दौरे को यादगार एवं ऐतिहासिक बना दिया। ऐसा मौका केवल अमेरिका के बेहद निकट सहयोगी मित्रों को मिलता है। कुछ साझा वैश्विक चिंताओं और चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर दोनों देशों की संवेदनशीलता ने भारत-अमेरिका रिश्तों को नया आयाम दिया है। दोनों देशों ने वाणिज्य और रक्षा उपकरणों समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया है। अमेरिका भी भारत के साथ रिश्तों को रणनीतिक एवं सकारात्मक निहितार्थों के नजरिये से देखता है। भारतवंशियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी से जुड़ी उम्मीदों को व्यक्त किया। उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देश 21वीं सदी को बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत हैं। इसी दिशा में प्रधानमंत्री का यह दौरा कई उपलब्धियों से भरा रहा, जिसमें रक्षा, वाणिज्य और रणनीतिक तकनीकी सहयोग के मुद्दों पर व्यापक सहमति बनी। इसी दौरान दिग्गज अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने भारत में निवेश और अपनी प्रस्तावित गतिविधियों का एलान किया। यह अमेरिका और भारत के बीच परस्पर नवाचार और आर्थिक गठजोड़ के भविष्य का संकेत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की उपलब्धियों की चर्चा करें तो इस दौरान रक्षा, तकनीक और निवेश के स्तर पर बहुत सकारात्मक संकेत मिले। सबसे पहले रक्षा की बात करें तो हालिया रूझानों से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि भारत की आधुनिक रक्षा जरूरतों की पूर्ति के लिए रूस पर निर्भरता उचित नहीं। ऐसे में अमेरिका के साथ रक्षा साझेदारी बिल्कुल सही समय पर आगे बढ़ रही है। इससे भारत की सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी होने के साथ ही दोनों देशों के बीच सामरिक गठजोड़ भी मजबूत होगा। प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान अत्याधुनिक ड्रोन्स की खरीद का एक महत्वपूर्ण समझौता भी हुआ। इससे सेना, नौसेना और वायुसेना की निगरानी एवं मारक क्षमताओं में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी । लड़ाकू विमानों के इंजन बनाने के लिए अमेरिकी दिग्गज जीई और हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड के बीच हुआ समझौता भी बड़े महत्व का है। इससे भारत की सामरिक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा बदलाव आएगा जो रक्षा उपकरणों की आपूर्ति के लिए मूल रूप से रूस पर निर्भर रही है। इससे आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण भी होगा ।
तकनीकी मोर्चे पर उपलब्धियों की बात करें तो भारत और अमेरिका रक्षा, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग, सह- विकास और सह-उत्पादन के अवसर तलाशने की दिशा में आगे बढ़े हैं। भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े आर्टेमिस अनुबंध को लेकर सहमति जताई और मानव अभियान के लिए भी नासा के साथ साझेदारी की है। अमेरिकी कंपनी भारत में विविधीकृत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम स्थापित करने के लिए भी तैयार हुई है। खनिज सुरक्षा साझेदारी में भारत को जोड़ने पर भी अमेरिका ने अपना समर्थन जताया है। साथ ही एडवांस कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआइ और क्वांटम इन्फोर्मेशन साइंस को लेकर भारत और अमेरिका ने संयुक्त रूप से काम करने के लिए एक ढांचा भी स्थापित किया है ।
पूंजी निवेश इस समय भारत की एक बड़ी आवश्यकता है तो उसकी पूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रमुख अमेरिकी उद्यमियों से इस मुद्दे पर आवश्यक मंत्रणा की। प्रधानमंत्री के इस दौरे ने अमेरिकी निवेशकों के बीच भरोसे और नीतियों को लेकर आश्वासन भरा ऐसा परिवेश बनाया, जिसके परिणामस्वरूप कई कंपनियां भारत में निवेश करने और अपने निवेश को बढ़ाने के लिए तत्पर हुईं। मिसाल के तौर पर गूगल ने डिजिटाइजेशन फंड के लिए 10 अरब डालर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई। इसी तरह एमेजोन ने 26 अरब डालर के निवेश से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की बात कही है। आने वाले समय में अमेरिका से भारत में होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई में भारी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। ऐसे में यह कहना अनुचित नहीं होगा कि प्रधानमंत्री के इस दौरे ने दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को नया क्षितिज प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई।
अमेरिका प्रवास को लेकर भारतीयों को पेश आने वाली मुश्किलों का हल भी प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे पर निकाला गया। इसके अंतर्गत अमेरिका में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को अपना एच1बी वीजा नवीनीकरण के लिए भारत आना जरूरी नहीं रह जाएगा। यह वास्तव में एक बहुत बड़ी राहत है। इसके अतिरिक्त, वीजा प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाने के लिए अमेरिका बेंगलुरू एवं अहमदाबाद में नए काउंसलेट स्थापित करने की योजना बना रहा है। वहीं, भारत भी इस वर्ष सिएटल के अतिरिक्त दो अन्य अमेरिकी शहरों में काउंसलेट स्थापित करने पर विचार कर रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि एक ऐसे दौर में जब भारत तेज आर्थिक वृद्धि के पथ पर अग्रसर है तब प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व और उनकी रणनीतिक अंतरराष्ट्रीय सक्रियता ने वैश्विक स्तर पर भारत के कद को बढ़ाया है। यह प्रगति भारत को एक ऐसे जीवंत एवं गतिशील लोकतंत्र के रूप में स्थापित करती है, जो वैश्विक विमर्शों को आगे बढ़ाने, साझा चुनौतियों से निपटने और वैश्विक ढांचे के भविष्य को आकार देने में सक्षम है।
Editorial

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