Pratahkal-God, if not a Mahatma, then a man should become a good soul: Acharya Mahashraman

मुंबई । चातुर्मासिक मंगल प्रवेश से पूर्व तेरापंथ धर्मसंघ (Terapanth Sangh) के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) दो दिनों के प्रवास के लिए भायंदर पहुँचे।
अग्रवाल ग्राउण्ड में बने ‘महाश्रमण समवसरण’ में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि चार शब्द आते हैं- परमात्मा, महात्मा, सदात्मा और दुरात्मा। परमात्मा वैसी आत्माएं हैं जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त होकर शाश्वत स्थिति को प्राप्त कर चुकी हैं। दूसरे प्रकार की आत्मा- महात्मा कही जाती है। जिनके मन, वचन और काय में एकरूपता हो, अर्थात जिनके जीवन में साधुता, सरलता है वे महात्मा होते हैं। तीसरे प्रकार में वे आत्माएं होती हैं जो महात्मा तो नहीं बन सकतीं, किन्तु धर्म, ध्यान, साधना, सेवा और सद्विचारों से युक्त होकर जीवन जीते हैं, वे सदात्मा होते हैं। दूसरों को कष्ट देने वाले, दूसरों की शांति को भंग करने वाले, हिंसा, हत्या में रत आत्माएं दुरात्मा होती हैं! इसलिए आदमी को अणुव्रतों का पालन करते हुए जीवन में धर्म, ध्यान, साधना, तप, प्रवचन श्रवण के द्वारा सदात्मा बनने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस बार का चतुर्मास भी मीरा-भायंदर एरिया में ही होना है तो ऐसा मानना चाहिए कि यह पांच महीनों का चतुर्मास अच्छी आध्यात्मिक खुराक देने वाला बने। साध्वी राकेशकुमारी ने अपनी सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। आचार्य महाश्रमण ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया। स्थानीय तेरापंथी सभाध्यक्ष भगवती भण्डारी ने विचार रखे। साध्वी सुषमाकुमारी ने 21रंगी तपस्या के लिए उत्प्रेरित किया। स्थानीय विधायक नरेन्द्र मेहता ने भी विचार रखे।

Editorial

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