Suresh Goyal

बेवरली हिल्स शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा पता होगा जिस पर कई फिल्में व टी.वी. सीरीयल बने। हमारे यहां आवास के लिये मशहूर है मगर जिस तरह बेवरली हिल्स के नाम से ही होलीवुड सितारों का आभास होता है वैसा जूहु बान्द्रा से नहीं होता।
हम भारतीय रेस्टोरेन्ट की तलाश में इसकी सड़कों पर घूम रहे थे, अचानक हम रोडियो ड्राइव पर पहुंच गये। यह विश्व का सबसे महंगा बाजार है। आपने अगर रिचार्ड गेर की "प्रेटी वूमन " फिल्म देखी हो तो उसका वह प्रसिद्ध दृश्य जिसमें जूलिया रोबटर्स एक शानदार शो रूम में शोपिंग करने जाती है और सेल्स गर्ल उसके कपड़े देखकर ही उसे बाहर कर देती हैं। वह रोडियो ड्राइव का ही शो रूम था।
दुनिया के हर प्रसिद्ध ब्राण्ड का शोरूम यहां है। एक से एक चकार्बोध से परिपूर्ण रेस्टोरेन्ट, वस्त्रों, आभूषणों, उपहारों और स्त्रियोचित प्रसाधनों के अत्याधुनिक कक्ष बरबस ही मन मोह लेते हैं। पर्यटक यहाँ घूम कर इसका रोमांच मात्र लेते हैं, किसी शो रूम में घुसने की हिम्मत नहीं होती।
यहां के रेस्टोरेन्ट बहुत मंहगे हैं इसलिये यहां खाने का तो सवाल ही नहीं था, हमने यहां से बाहर निकल कर कोई रेस्टोरेन्ट ढूंढने की सोची। रास्ते में कई खुली कसें नजर आई, जिनकी छत पर बैठे पर्यटक इस क्षेत्र से गुजर कर गर्व का अनुभव वार रहे थे। शीघ्र ही हम बेवरली हिल्स पुलिस स्टेशन के बाहर से गुजरे। यह वही थाना है जो होलीवुड के मशहूर कोमेडियन एडी मरफी की फिल्म "बेबरली हिल्स कोय" में दर्शाया गया था। यह फिल्म बहुत चली थी तथा इसके तीन भाग बने थे। "बेवरली हिल्प कोप 4" अभी निर्माणाधीन है।
बेवरली हिल्स पर एक सीरीयल भी बहुत चला था जो इसके पिन कोड नं.. 90210 के नाम पर बना था। आजकल जिस तरह 'फ्रेन्ड्स' सीरीयल बहुत लोकप्रिय है पहले बेवरली हिल्स 90210 भी युवा समुदाय में उतना ही लोकप्रिय था। बेवरली हिल्स में बोम्बे पेलेस, निर्वाण, चक्र, गंगादीन, सेफरन, तंजोर आदि कई भारतीय रेस्टोरेन्ट हैं मगर ये बहुत मंहगे थे। नेट पर एक रेस्टोरेन्ट देख कर उसे जी.पी.एस. पर डाला और हम वहां पहुँच गये।
यह रेस्टोरेन्ट एक बंगलादेशी द्वारा चलाया जा रहा था मगर नाम इसका फ्लेवर ओफ इंडिया रखा हुआ था। दोपहर के 4 बजने जा रहे थे, हमने सोचा लंच खतम हो गया होगा फिर भी हम अन्दर घुस गये। लंच वाकई खतम हो गया था मगर डिनर 5 बजे शुरू होने वाला था। हमने उससे विनती की कि हमें तो सिर्फ रोटी- साग चाहिये और कुछ नहीं तो वो तैयार हो गया। तन्दूरी रोटी और गोभी की साग ठीक ही थे। यहां अपनी क्षुधा शांत कर हम आगे बढे ।
बेवरली हिल्स की तरह सनसेट बुलवाई भी हॉलीवुड से जुड़ा प्रसिद्ध सनसेट बुलवार्ड पर भी कई फिल्में बनी हैं। यहीं होलीवुड और बेवरली हिल्स से जुड़ा ढाई कि.मी. का मार्ग सनसेट स्ट्रीप अपनी नाईट लाइफ के लिये जाना जाता है। यहां कई नामी गिरामी रोक क्लब बुटिक, रेस्टोरेन्ट व नाईट को इन स्थानों के रंग बिरंगी रोशनी में चमचमानियन साईन इसके अभिवृद्धि कर देते हैं। पर्यटकों व युवाओं का हुजुम और शाम होते ही बढ़ने लगता है। जो सितारों की एक झलक पाकर ही निहाल हो जाता है। लोगों की भीड़ में चलते हुए कब कोई होलीवुड स्टार नजर आ जाता है पता ही नहीं चलता।
इन सबके अलावा यहां लगे बड़े बड़े होर्डिंग्स का आकर्षण अलग ही है। इन्हें यहाँ बिलबोड्र्स कहा जाता है। बेली हिल्स से होलीवुड जाने का रास्ता यही है। इस कारण कई बिल बोर्ड होलीवुड के प्रोडूसरों का ध्यान आकर्षण करने को लगाए जाते हैं। एक लक्जरी कार के होर्डिंग में तो 30 हजार डालर के असली नोट प्रदर्शित हैं, एक सिक्यूरिटी गार्ड इस पर निगाह रखने के लिये निरन्तर तैनात रहता है।
सनसेट बुलबार्ड के पास ही होलीवुड बाक ओक फेम मार्ग है। इस दो कि.मी. लम्बे मार्ग पर लगभग ढाई हजार होलीवुड की हस्तियों के नाम के चौके जड़े हुए हैं। इसमें अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, संगीतकार, तक्नीशियन आदि शामिल है। यह मार्ग होलीवुड चेम्बर ऑफ कामर्स द्वारा प्रायोजित है। किसी भी कलाकार को उसका यहां चौका लगा कर सम्मानित करने का निर्णय चेम्बर ही करता है। प्रसिद्ध कलाकारों के नाम के इन चौकों पर चलते हुए प्रशंसक अत्यन्त प्रसन्नता की अनुभूति करते हैं।
एक छोटे से इलाके में एक साथ इतने कलाकारों के स्मारक बनना अनूठा तरीका है। बोलीवुड कलाकारों के भी इस तरह के स्मारक मुम्बई के जुहू या बान्द्रा इलाके में प्रायोजित किये जा सकते है मुम्बई में भी अभी ले दे कर शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकान्त प्यारेलाल, किशोर कुमार, मोह. रफी वगैरह के नाम पर चौराहे हैं जबकि हमारे यहां भी बोलीवुड ने अनगिनत एक से आला एक कलाकार को जन्म दिया है।
यहाँ वह प्रसिद्ध चाइनीज थियेटर भी है जिसके प्रांगण में कई होलीवुड सितारों के हाथों और पांवों के निशान मढे हुए हैं। इस थियेटर में प्रीमीयर होने वाली फिल्मों के सितारों के हाथों के निशान गीले सीमेन्ट में लिये जाते हैं, कई सितारे यहाँ अपने हस्ताक्षर भी कर देते हैं तो कई अपने पांवों के निशान अंकित करते हैं। कई अभिनेत्रियों ने अपने उपरी अन्तर्वस्त्र खोलकर अपने स्तनों के प्रिन्ट भी यहां छोड़े हैं। मजे की बात यह है कि एसी अभिनेत्रियों की दीवानी कई युवतियां भी अपने उपरी अन्तर्वस्त्र खोल अपने स्तन इन प्रिन्टस में डालकर तुलना करती है।
इसके छोर से ही विश्व प्रसिद्ध होलीवुड नगरी शुरू हो जाती है जहाँ एक से एक रोप मनोरंजक, एतिहासिक और वैज्ञानिक फिल्मों का सृजन हुआ हैं। कई होलीवुडवासियों ने एक जनमत संग्रह द्वारा लॉस एंजलेस से अलग होने की मंग की थी मगर अधिकांश हॉलीवुड वासियों ने ही इसके खिलाफ वोट दिये। नया भर के आकर्षण का केन्द्र बने ओस्कर एवार्ड यहाँ आयोजित किये जाते हैं। कहने के कारण यहां हर दिन कोई न कोई शो होता ही रहता है. जिनमें नामी सितारे भाग लेते हैं।
लॉस एंजलेस होलीवुड के अलावा होलीवुड के प्रसिद्ध प्रोडक्शन हाउसेज द्वारा पर्यटकों के मनोरंजन के लिये बनाये गये यूनिवर्सल स्टूडियोज, एम.जी.एम. और डिजनीलेण्ड जैसे एम्यूजमेन्ट पार्कों के लिये भी मशहूर है। इनमें इन स्टूडियोज द्वारा बनाई गई प्रसिद्ध फिल्मों पर आधारित शो तो होते ही हैं मगर फिल्म निर्माण से मुझे कई रोचक तथ्य भी प्रदर्शित होते हैं। हमारा बोलीवुड भी फिल्म निर्माण में दुनिया भर में अपनी विशिष्ट जगह रखता है मगर अफसोस है कि इतने बड़े बड़े फिल्म निर्माता होने के बावजूद किसी ने यूनिवर्सल स्टूडियोज वगैराह की तरह पर्यटकों के मनोरंजन के लिये इस तरह के एम्यूजमेन्ट पार्क नहीं बनाये घोषणाएं तो बहुत होती हैं स्वयं सरकार ने भी की मगर यह कागजों तक सिमट कर रह जाती है। काश हमारे निर्माता होलीवुड की फिल्मों की नकल करने के साथ साथ इस क्षेत्र में भी नकल करते।
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