Pratahkal - News Update - Now the children of class 5 and 8 will have to take the exam
मुंबई : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) के अनुपालन में राज्य सरकार ने कक्षा 5 और 8 के लिये वार्षिक परीक्षा आयोजन का निर्णय किया है। इसके जरिये राज्य सरकार अपनी नो- डिटेंशन पॉलिसी (No-Detention Policy) से अलग हट रही है। नो-डिटेंशन पॉलिसी के तहत प्राथमिक शिक्षा यानि कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को फेल नहीं करने का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि 29 मई को महाराष्ट्र (Maharashtra) बाल निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार नियम (Right to Compulsory Education Rules), 2011 में संशोधन करते हुये 29 मई को एक अधिसूचना जारी की गई थी। इसी संशोधन के तहत अब कक्षा 5 और 8 के बच्चों को वार्षिक परीक्षा देनी होगी। इस परीक्षा में असफल होनेवाले बच्चों के लिये एक और मौका होगा। महज दो महीनों के भीतर ही उनके लिये पुनर्परीक्षा होगी जिसे उत्तीर्ण कर वे अगली कक्षा में प्रवेश ले सकेंगे। इस परीक्षा और पुनर्परीक्षा का प्रारूप और प्रक्रिया राज्य शिक्षा अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद द्वारा निर्धारित किया जायेगा. आरटीई एक्ट के तहत प्राथमिक शिक्षा कक्षाओं अर्थात कक्षा 1 से 8 तक बच्चों को फेल कर उसी कक्षा में पुन: रखने पर पाबंदी थी। वर्ष 2019 में इसमें संशोधन कर कक्षा 5 और 8 के बच्चों को डिटेन करने की अनुमति का प्रावधान किया गया था। इसके जरिये राज्य सरकारों को यह निर्णय करने का अधिकार दिया गया कि वे नॉन- डिटेंशन पॉलिसी अपने यहां लागू रखना चाहते हैं या नहीं। चूंकि महाराष्ट्र सरकार ने इस कानूनी संशोधन को नहीं अपनाया था, लिहाजा यहां सभी स्कूल अपने यहां बच्चों को फेल किये बिना अगली क्लास में प्रमोट करने में जुटे रहे। लेकिन अब 29 मई के बाद राज्य सरकार ने भी इस संशोधन को अपना लिया है। अब कक्षा 5 और 8 के बच्चों के लिये वार्षिक परीक्षा होगी और फेल होनेवाले बच्चों को दो महीने के भीतर पुनर्परीक्षा के जरिये कामयाबी हासिल कर अगली कक्षा में जाने का एक और अवसर होगा। यदि इसमें भी बच्चे असफल होते हैं तो फिर यह स्कूल पर होगा कि वह बच्चे को डिटेन करता है या प्रमोट करता है। हालांकि कक्षा 8 तक किसी भी बच्चे को स्कूल या शिक्षा से निष्कासित करने की अनुमति नहीं होगी। कई शिक्षाविद इस नये संशोधन और नियम का स्वागत कर रहे हैं। जबकि कुछ शिक्षाविदों के मुताबिक, फिलहाल बच्चों का मूल्यांकन पूरे साल के दौरान उनके प्रदर्शन और पढाई के आधार पर किया जाता है। यह उनके लिये ठीक भी है। लेकिन अब जब वार्षिक परीक्षा के जरिये यह
मूल्यांकन होगा तो इससे बच्चों और पैरेंट्स पर दबाव बढ़ेगा। बोर्ड परीक्षा की तर्ज पर इस तरह से वार्षिक परीक्षा बच्चों के लिये तनावपूर्ण साबित होगी। उधर सीबीएसई और सीआईएससीई जैसे नॉन – स्टेट बोर्ड्स भी कक्षा 8 तक नॉन-डिटेंशन पॉलिसी को अपनाये हुये हैं। इससे भी स्टेट बोर्ड द्वारा इस तरह डिटेंशन पॉलिसी और वार्षिक परीक्षा के नई सिस्टम को लेकर सवाल खड़े किये जा रहे हैं।
Editorial

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