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इमरान की जगह लेंगे बिलावल
By EditorialPublished on
पिछली बार जब मैंने यह कॉलम लिखा था, तो मैं भारत (India) के पूर्वी राज्य ओडिशा (Odisha) में कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना (Express Train Accident) की भीषण त्रासदी पर दुखी थी। इस हफ्ते पाकिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका था, क्योंकि मुल्क यूनान में हुई एक त्रासदी पर शोक मना रहा था, जिसमें तुर्किये से इटली जा रहे अवैध प्रवासियों की समुद्र में जहाज डूबने से मौत हो गई थी।

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मरिआना बाबर
पिछली बार जब मैंने यह कॉलम लिखा था, तो मैं भारत (India) के पूर्वी राज्य ओडिशा (Odisha) में कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन दुर्घटना (Express Train Accident) की भीषण त्रासदी पर दुखी थी। इस हफ्ते पाकिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका था, क्योंकि मुल्क यूनान में हुई एक त्रासदी पर शोक मना रहा था, जिसमें तुर्किये से इटली जा रहे अवैध प्रवासियों की समुद्र में जहाज डूबने से मौत हो गई थी। अपने मुल्क में अपना कोई भविष्य न देखकर उन युवाओं ने यूरोप में बेहतर जिंदगी के लिए जान जोखिम में डाल दी। मानव तस्करी अंतरराष्ट्रीय माफिया के नियंत्रण में है और गिरफ्तारियों के बावजूद इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि युवा सड़क, हवाई या समुद्री मार्ग से पलायन नहीं करेंगे।
इस बीच पाकिस्तान (Pakistan) पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने दिवंगत प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो का 70वां जन्मदिन मनाया, जिनकी बहुत कम उम्र में मौत हो गई थी। पाकिस्तान में लोकतंत्र के प्रति उनकी सबसे बड़ी देन यही है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (पीएमएल एन) के प्रमुख नवाज शरीफ को लोकतंत्र के अधिकारपत्र (चार्टर) पर हस्ताक्षर करने के लिए मनाया। नवाज शरीफ को आज भी याद है कि सुरक्षा प्रतिष्ठान पीएमएल (एन) के खिलाफ पीपीपी का इस्तेमाल कर रहा था। वह जनता द्वारा चुनी हुई सरकार के वर्चस्व का दौर था और दो सबसे बड़े राजनीतिक (Political) दलों के लिए यह सुरक्षा प्रतिष्ठान की कठपुतली बनने से इन्कार करने का समय था।
बेनजीर भुट्टो अब इस दुनिया में नहीं हैं । उनके पति आसिफ अली जरदारी और उनके बेटे एवं पीपीपी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने और उनकी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए नवाज शरीफ और उनके भाई प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ से हाथ मिलाया था। बाद में दोनों दलों ने नई सरकार बनाने के लिए अन्य सहयोगी दलों से हाथ मिलाया। अलबत्ता, इस सप्ताह हमने देखा कि सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में दरारें दिखाई दे रही थीं और यह अपेक्षित है, क्योंकि इसी साल नवंबर में आम चुनाव होने की उम्मीद है, जबकि 15वीं नेशनल असेंबली के कार्यकाल में अभी कुछ ही हफ्ते बाकी हैं। वहीं इमरान खान अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं और इस बात के ज्यादा संकेत हैं कि उन्हें या तो अयोग्य ठहरा दिया जाएगा या जेल भेज दिया जाएगा। उनके अधिकांश वरिष्ठ समर्थकों ने उनका साथ छोड़ दिया है। ऐसे में, अब चुनाव के दौरान विपक्ष की भूमिका कौन निभाएगा?
इसका उत्तर कुछ हद तक तब मिला, जब विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने घोषणा की कि वह नेशनल असेंबली में चल रही राजकोष से संबंधित बहस में हिस्सा नहीं लेंगे, क्योंकि वित्तमंत्री ने सिंध के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अपने वादे के अनुसार धन आवंटित नहीं किया है, जबकि उन्होंने इसका वादा किया था। वर्ष 2022 की बाढ़ से सबसे अधिक तबाही सिंध में हुई और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है, पीपीपी को विशेष रूप से इस बात की चिंता है कि उसे अंदरूनी सिंध में लोगों को जवाब देना है, जिनके सिर पर अब भी छत नहीं है और वे लगातार विस्थापित हो रहे हैं। इससे प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ को बहुत शर्मिंदगी उठानी पड़ी, और उन्होंने तुरंत नुकसान की भरपाई के लिए आगे बढ़कर पीपीपी के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें कीं, लेकिन बिलावल भुट्टो इन बैठकों में शामिल नहीं हुए । अंग्रेजी दैनिक द डॉन ने लिखा, आखिरकार इस सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने की उम्मीद हमेशा से थी, जो राजनीतिक कारणों से एकजुट हुआ था। पीपीपी सिंध के दक्षिणी इलाके में काफी बेहतर स्थिति में है और उसे उम्मीद है कि वह वहां चुनावों में भारी जीत हासिल करेगी। विशेष रूप से अब जब पीटीआई को खत्म कर दिया गया है और पीएमएल (एन) की वहां बहुत मजबूत पैठ नहीं है। जमात-ए-इस्लामी और कुछ छोटी पार्टियां खेल बिगाड़ने का काम कर सकती हैं और प्रांतीय स्तर पर कुछ सीटें हासिल कर सकती हैं। पाकिस्तान में नेशनल असेंबली के साथ-साथ चार प्रांतीय विधानसभाओं - पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के लिए भी चुनाव होंगे।
इस बीच पीपीपी चुपचाप दक्षिणी पंजाब के क्षेत्र में काम कर रही है, जहां उसे परंपरागत रूप से कुछ सीटें मिलती रही हैं। अन्य दलों से अलग होने वाले राजनेता पीपीपी में शामिल हो गए हैं और उम्मीद है कि आगामी चुनावों में इसकी संभावना बेहतर हो सकती है। हाल ही में किंग्स पार्टी (जिसे सुरक्षा प्रतिष्ठान का समर्थन प्राप्त है) की घोषणा की गई है और यह उन असंतुष्ट वरिष्ठ नेताओं को मिलाकर बनाई गई है, जिन्होंने इमरान खान की पीटीआई छोड़ दी है। इसे आईईपी ( इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान) नाम दिया गया है और इसका नेतृत्व पंजाब के दिग्गज चीनी व्यापारी जहांगीर तरीन कर रहे हैं । एक समय पीटीआई के सबसे बड़े वित्तपोषक जहांगीर तरीन ने अब इमरान खान से नाता तोड़ लिया है। इस बात की प्रबल संभावना है कि कम से कम पंजाब में पीपीपी खेल बिगाड़ने का काम कर सकती है और और पीएमएल (एन) से सीटें छीन सकती है। ऐसी अफवाहें भी सुनी जा रही हैं कि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग के खिलाफ आईईपी से सीटों पर समझौते को लेकर कोई चुनावी साठगांठ भी कर सकती है। एक राजनीतिक टिप्पणीकार का कहना है, आईईपी को संभवत: सुरक्षा प्रतिष्ठान का आशीर्वाद प्राप्त है, जिसमें बड़े पैमाने पर पीटीआई के दलबदलू शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर पंजाब से हैं। शाहबाज शरीफ की विनाशकारी वित्तीय नीतियों के कारण पीपीपी खुद को पीएमएल (एन) से दूर रखना चाहती है। साथ ही, आईएमएफ की शर्तों के कारण पाकिस्तान के इतिहास में मुद्रास्फीति सर्वाधिक बढ़ गई है। यहां तक कि पीएमएल (एन) के नेताओं को भी अपने निर्वाचन क्षेत्रों में समर्थकों का सामना करने में कठिनाई हो रही है। यही वजह है कि पीएमएल (एन) अब लंदन से अपने सुप्रीमो नवाज शरीफ की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रही है, जहां वह आत्म निर्वासन में रह रहे हैं। उम्मीद है कि वह ईद के बाद लौटेंगे और निश्चित रूप से अपनी अलोकप्रिय पार्टी में कुछ जान डालेंगे ।

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