Pratahkal - Lekh Update - Politics ignited by the arrest of the minister
एस श्रीनिवासन
तमिलनाडु (Tamil Nadu) में 7 मई को दो साल पूरे करने वाली द्रमुक सरकार (Government) अपने सबसे बड़े राजनीतिक संकट (Political Crisis) का सामना कर रही है। क्या मुख्यमंत्री एम के स्टालिन इसे अवसर में बदल सकेंगे ? यह लाख टके का सवाल है, जिसका जवाब पार्टी ही नहीं, तमाम कार्यकर्ता जानना चाह रहे हैं। दरअसल, करुणानिधि परिवार के काफी करीबी माने जाने वाले राज्य के हाई-प्रोफाइल मंत्री सेंथिल बालाजी को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है। भाजपा की नजर में यह करूणानिधि परिवार के भ्रष्टाचार (Corruption) को परदा करने का एक मौका है। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के खिलाफ, और पश्चिम बंगाल, दिल्ली व तेलंगाना जैसे राज्यों में भ्रष्टाचार के खिलाफ हमलावर भाजपा अपनी इस रणनीति को अब तमिलनाडु में भी आजमाना चाह रही है। मगर द्रमुक ने फिलहाल आक्रामक रूख अपनाने का फैसला किया है। वह न सिर्फ अपने दागी मंत्री का बचाव कर रहा है, बल्कि केंद्र पर हमले कर रहा है।
यह स्पष्ट नहीं है कि यह टकराव आखिर किस दिशा में जाएगा? मगर, द्रमुक में एक तबका इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र को बेनकाब करने का एक मौका मान रहा है। उसके मुताबिक, यह कार्रवाई पार्टी के उन नेताओं को खामोश करने का प्रयास है, जो 2024 के आम चुनाव में विपक्षी एकता की कोशिश के लिए भाजपा की हिंदुत्ववादी राजनीति के खिलाफ मुखर हैं । इस गतिरोध ने राज्य के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है। अन्नाद्रमुक राज्य में भाजपा की सहयोगी है, और द्रमुक, मुख्यमंत्री स्टालिन व उनके परिवार पर पुरजोर हमलावर है। उसकी चिंता यह भी है कि भाजपा मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में खुद को स्थापित करने का प्रयास कर रही है, जबकि परंपरागत रूप से द्रमुक के खिलाफ अन्नाद्रमुक खड़ा रहा है। इसके अलावा, अन्नाद्रमुक यह भी नहीं चाहता कि सूबाई राजनीति में नाममात्र की मौजूदगी रखने वाली भाजपा इस पूरे घटनाक्रम से अपने पक्ष में हवा बना ले जाए ।
राज्यपाल आरएन रवि भी इस विवाद में कूद पड़े हैं और बालाजी की गिरफ्तारी के बाद उनको मंत्री बनाए रखने से मना कर दिया है। रवि का द्रमुक सरकार से छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। मुख्यमंत्री ने बालाजी के मंत्रालयों का प्रभार दो अन्य सहयोगियों को देने की सिफारिश की थी, लेकिन इसके लिए मुख्यमंत्री ने जो वजह बताई थी, राज्यपाल ने उसे नकार दिया है। उसमें कहा गया था कि मंत्री जी दिल की बीमारी के कारण अपने विभागों को संभालने में सक्षम नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को अपने 29 मई के पत्र की याद दिलाई, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का हवाला देते हुए मंत्री की बर्खास्तगी की बात कही थी।
इससे पहले राज्य भाजपा प्रमुख व पूर्व आईपीएस अधिकारी के अन्नामलाई ने द्रमुक सांसद, विधायक, मंत्री व अन्य पार्टी नेताओं द्वारा किए गए काले कारनामों का एक संकलन 'डीएमके फाइल्स' जारी किया है। भ्रष्टाचार को राज्य की राजनीति का अभिशाप बताते हुए उन्होंने इसे खत्म करने का वादा किया है। उनके नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विशेष रूप से बालाजी के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए द्रमुक शासन के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किया था। इसके बाद करूणानिधि परिवार की करीबी एक रियल एस्टेट कंपनी पर आयकर के छापे पड़े थे। प्रवर्तन निदेशालय ने मुख्यमंत्री के बेटे के परिजनों द्वारा चलाए जाने वाले ट्रस्ट उदयनिधि स्टालिन फाउंडेशन की अचल संपत्ति और बैंक खातों को भी सील कर दिया था।
सेंथिल बालाजी, जिनके पास आबकारी मंत्रालय था, मिलावटी शराब के कारण हुई मौतों के बाद निशाने पर हैं। उनके खिलाफ हमला तब चरम पर पहुंच गया, जब 11 जून को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) राज्य के दौरे पर आए। यह आश्चर्य की बात थी कि जब अमित शाह अपनी कार से बाहर निकले और अपने समर्थकों का अभिवादन स्वीकार करते हुए आगे बढ़ रहे थे, बिजली गुल थी और चारों तरफ अंधेरा था। राज्य सरकार ने इसे तकनीकी भूल बताया, लेकिन भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए यह एक साजिश थी। इससे पहले सेंथिल के गृह शहर करूर में एक महिला राजस्व अधिकारी पर हमला किया गया था, जब आयकर अधिकारी ने उनके भाई के घर पर छापा मारा था।
मंत्री के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों को भाजपा व केंद्रीय एजेंसियों द्वारा मुख्यमंत्री और उनके करीबियों को निशाना बनाने की सुनियोजित कोशिश मानी गई। स्टालिन ने केंद्र को आड़े हाथों लेते हुए जवाब दिया है। अपने पिता एम करुणानिधि की जन्म शताब्दी कार्यक्रम के तहत साल भर चलने वाले आयोजनों का उद्घाटन करते हुए स्टालिन ने केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्षी एकता का आह्वान किया। हालांकि, टकराव जैसे ही बढ़ा, केंद्रीय गृह मंत्री की वापसी के दो दिन बाद प्रवर्तन निदेशालय ने मंत्री के आवास पर छापा मारा और 17 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। बिलखते मंत्री को अस्पताल ले जाने का दृश्य नाटकीय था। मंत्री की शिकायत थी कि उनके सीने में दर्द हो रहा है। हालांकि, सरकारी डॉक्टरों ने भी पुष्टि की कि उनकी धमनियों में 90 फीसदी ब्लॉकेज है और उन्हें ओपेन हार्ट सर्जरी करानी होगी।
इस बीच, ईडी के अधिकारी राज्य सचिवालय आए और मंत्री के कार्यालय पर छापा मारा। इसने मुख्यमंत्री को आश्चर्य में डाल दिया। अर्द्धसैनिक बलों की सहायता से ईडी के अधिकारी मंत्री के कार्यालय से फाइलें और दस्तावेज ले गए। मगर इस छापे ने द्रमुक को नाराज कर दिया। अगले दिन मुख्यमंत्री ने किसी भी मामले की जांच के लिए सीबीआई को दी जाने वाली सामान्य सहमति वापस ले ली, और इस तरह तमिलनाडु देश का 10वां राज्य बन गया, जहां केंद्रीय एजेंसी को राज्य में कोई जांच करने से पहले राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी।
बेशक, सेंथिल बालाजी के खिलाफ कई आरोप हैं, मगर जिस मामले में केंद्रीय एजेंसियां सक्रिय हैं, वह 2011 का मामला है, जब वह जयललिता सरकार (अन्नाद्रमुक) में मंत्री हुआ करते थे। परिवहन मंत्री के रूप में तब उन पर रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया था । पीएमएलए अधिनियम के तहत मंत्री के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था । हालांकि, बालाजी पर भाजपा के हमले का एक मकसद दरअसल पश्श्चिमी तमिलनाडु में उनका प्रभाव खत्म करना भी है। भाजपा के अन्नामलाई इसी क्षेत्र से हैं और यहां सफलता पाने की कोशिश कर रहे हैं । द्रमुक जाहिर तौर पर इसे संघीय अधिकारों की लड़ाई और भाजपा के विरूद्ध विपक्ष को एकजुट करने का आधार बना रहा है।

Editorial

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