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रेलयात्रा 4 : अमेरिका में भारतीय समुदाय सर्वाधिक शिक्षित सम्पन्न
By EditorialPublished on
अभी तो सुबह ही थी फिर भी भूख लग आई थी। ट्रेन की ब चली नहीं कि भूख लग आती है। ट्रेन में पूड़ी-पराठे, आलू की साग और खाने का लुत्फ ही अलग है। मजे की बात यह थी कि ये तीनों चीजें मेरे पास थीं।न्यूयार्क की बिल्डिंगे खत्म ही नहीं हो रही थी। न्यूयार्क अमेरिका में सर्वाधि आबादी वाला शहर है। एक अनुमान के अनुसार यहां की आबादी दो से द 30 लाख के मध्य है। यह अजीब बात है कि न्यूयार्क का मेट्रोपोलीटन शहर ती प्रान्तों से मिलकर बनता है। न्यूयार्क के साथ इससे सटे न्यूजस प्रान्तों के सीमावर्ती भाग न्यूयार्क शहर के सब बन गये है

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अभी तो सुबह ही थी फिर भी भूख लग आई थी। ट्रेन की ब चली नहीं कि भूख लग आती है। ट्रेन में पूड़ी-पराठे, आलू की साग और खाने का लुत्फ ही अलग है। मजे की बात यह थी कि ये तीनों चीजें मेरे पास थीं।
न्यूयार्क की बिल्डिंगे खत्म ही नहीं हो रही थी। न्यूयार्क अमेरिका में सर्वाधि आबादी वाला शहर है। एक अनुमान के अनुसार यहां की आबादी दो से द 30 लाख के मध्य है। यह अजीब बात है कि न्यूयार्क का मेट्रोपोलीटन शहर ती प्रान्तों से मिलकर बनता है। न्यूयार्क के साथ इससे सटे न्यूजस प्रान्तों के सीमावर्ती भाग न्यूयार्क शहर के सब बन गये है। न्यूयार्क प्र न्यूयार्क शहर के 5 प्रमुख भाग है- ब्रुकलीन, क्वीन्स, मैनहट्टन, ब्रोन्क्स और स्टेटन आईलेन्ड। यह एक तरह से विश्व की राजधानी भी है क्यूंकि संयुक्त राष्ट्र संघ का मुख्यालय यहीं है। प्रति वर्ष सितम्बर के महीने में जब संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा का अधिवेशन होता है तो समूचे विश्व के तमाम राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष यहां एकत्र होते है। वाल स्ट्रीट के कारण यह विश्व की वित्तिय राजधानी भी कहलाती है।
न्यूयार्क में कम से कम 800 भाषाएं बोली जाती है। भाषाओं की इतनी बड़ विसंगती विश्व के किसी अन्य शहर में देखने को नहीं मिलती। सन 1624 में लोगों ने मैनहट्टन के निचले भाग को व्यापार का केन्द्र बनाया था और इसे न्यू एम्सटर्डम नाम दिया था। आदिवासियों से उन्होंने यह जमीन 60 गिल्डर्स यानि 24 डालरों में खरीदी थी। आज यहां की आवासीय भूमि की कीमत 1400 डालर प्रति वर्ग फुट से भी ज्यादा है। मेनहट्टन के इसी छोर ने कालान्तर में न्यूयार्क शहर को जन्म दिया।
अंग्रेजों ने डच लोगों से इसे छीन लिया। इन्हीं अंग्रेजों से कालान्तर में अमेरिकनों ने आजादी की लड़ाई लड़ी। न्यूयार्क ने अपने प्राकृतिक बंदरगाह की वजह से दुनिया भर के आप्रवासियों को आकर्षित किया। बाद में यही अंग्रेजों से संघर्ष और उनकी गुलामी की बेडियों से मुक्त होने का प्रतीक भी बना। फ्रान्स के लोगों ने इस हेतु अमेरिका को स्वतंत्रता की एक मूर्ति बनाकर भेंट की जिसे स्टेषु ओफ लिबर्टी के नाम से जाना जाता है। यह मूर्ति रोमन मुक्ति की देवी लिबर्टा का प्रतिनिधित्व करती है जो लबादा ओढे है और इसके हाथ में मशाल है। इसके पांवों टूटी हुई बेड़ियां पड़ी हैं, वहीं अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस 4 जुलाई 1778 की तिथि अंकित है। न्यूयार्क से निकल कर ट्रेन न्यूअर्क स्टेशन पर रूकी। यह है तो न्यू जर्सी में मगर न्यूयार्क शहर का प्रमुख भाग है। न्यूयार्क के जे एफ के व लाग्वार्डिया हवाई अड्डे अत्यन्त व्यस्त रहते हैं इसलिये न्यूअर्क का हवाई अड्डा विकल्प बन कर उभरा है। अगला स्टेशन ट्रेन्टन था जो न्यू जर्सी की राजधानी है।
न्यूजर्सी में भारतीय लोगों की अच्छी खासी आबादी है। इसका शहर एडीसन तो लघु भारत के रूप में विख्यात है। आज अमेरिका में कम से कम 35 लाख भारतीय रहते हैं। भारतीय समुदाय की यहां शिक्षित व सम्पन्न समुदाय के रूप में गिनती की जाती है। अमेरिका में कालेज में पढ़े लोगों का औसत सिर्फ 28 प्र.श. है जबकि भारतीयों का यही औसत 70 प्र.श. यानि ढाई गुना ज्यादा है। भारतीय यहां हाईली स्किल्ड फोरिन वर्कर्स के रूप में जाने जाते हैं। एक औसत भारतीय की आय यहां 88 हजार डालर प्रति वर्ष मानी जाती है जबकि अमरीकी औसत सिर्फ 49 हजार 500 डालर प्रति वर्ष का है।
लगभग 65 प्र.श. भारतीय यहां डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक हैं फिर भी जिन दो भारतीयों को गवर्नर बनने का मौका मिला, दोनों रिपब्लिकन पार्टी के हैं। बोबी जिन्दल लुइसीयाना व निकी हैली साउथ कैरोलाइना की गवर्नर बनी। निकी को तो राष्ट्रपति ओबामा के स्टेट ओफ दी यूनीयन भाषण का जवाब देने के लिये भी विपक्ष द्वारा चुना गया। दोनों ही हिन्दु धर्मावलम्बी थे लेकिन यहां आकर दोनों ने ईसाई परम्परा अपना ली। यहां एसे लोग कई हैं। कम से कम 18 प्र.श. भारतीय यहां आकर ईसाई मतावलम्बी बन गये। वर्तमान राष्ट्रपति चुनावों में भी भारतीयों का समर्थन ज्यादातर हिलेरी के पक्ष में ही दिखाई देता है। आम अमरीकी भी डोनाल्ड ट्रम्प का उपहास उड़ाता ही नजर आता है फिर भी आश्चर्य इस बात का है कि सर्वेक्षणों में वे हिलेरी को कड़ी चुनौती देते बताये जाते हैं। रिपब्लिकन नामांकन भी उन्होंने एसे ही उपहासों के बावजूद भारी मतों से जीता था।
न्यू जर्सी के ही अटलांटा शहर में कभी डोनाल्ड ट्रम्प ने ताजमहल नाम से कैसीनो खोला था। अमेरिका में हर प्रान्त को अपने अपने कानून बनाने का अधिकार है। फिर भी कुछ कानून हैं जो पूरे देश को मानने पड़ते हैं। यहां केन्द्रीय व्यवस्थाओं को फेडरल कहा जाता है। अमेरिका के 50 प्रान्तों में सिर्फ निवाडा ही एक एसा प्रदेश था जिसने गेम्बलिंग को वैधता प्रदान की थी। इस कारण लॉस वेगस शहर का उत्थान हुआ और यह विश्व का प्रमुख पर्यटन आकर्षण का केन्द्र गया। निवाडा पूरा का पूरा रेगिस्तान है मगर लॉस वेगस की वजह से यह अप सम्पन्न प्रदेश बन गया।
लॉस वेगस का पूरी दुनिया में कोई विकल्प नहीं था, इसका कारण हर जगह गेम्बलिंग का अवैध होना था मगर सुदूर पूर्व के चीन नियंत्रित द्वीप मकाऊ ने भी गेम्बलिंग वैध कर दी। लॉस वेगस के होटलों व केसीनो मालिकों को अपने व्यापार को विस्तार देने का अच्छा मौका मिल गया। मकाऊ हुबहू लास वेगस की तरह पनप गया। वो के वो होटल, वैसे के वैसे केसीनो, वेश्यावृति के अड्ड, मौज मस्ती के आरामगाह मकाउ में कुछ नहीं है फिर भी आज दुनिया के पूर्वी गोलार्ध के देशों के तमाम लोग मकाउ जा रहे हैं। यह पर्यटकों का स्वर्ग बन चुका है। जो लॉस वेगस जाने हेतु अमेरिका नहीं जा सकते वे सब मकाउ जाकर वही तृप्ति पाते हैं।
भारत में भी अण्डमान, निकोबार, लक्ष्यद्वीप जैसे कई छोटे छोटे द्वीप हैं। यहां क्यूं नहीं विशेष कानून बनाकर इन्हें वेगस या मकाउ जैसा रूप दिया जाता। वेगस पश्चिम में है तो मकाउ पूर्व में भारत बीच में अवस्थित हो अच्छा विकल्प दे सकता है। आखिर हम कब तक अपनी दकियानूसी नीतियों पर चलते रहेंगे। आज थोक में भारतीय मकाउ जा रहे हैं, उन्हें और जो नहीं जा पाते उन्हें भी हमारे यहां ही कोई विकल्प क्यूं नहीं मिले ?
निवाडा की देखा देखी न्यू जर्सी ने भी अपने प्रदेश में गेम्बलिंग वैध कर दी। इसके अटलान्टा शहर में धड़ाधड़ केसीनो खुलने लगे। डोनाल्ड ट्रम्प ने भी अपना ताजमहल केसीनो यहीं खोला। अटलान्टा की धूम कुछ साल तो चली मगर वह कायम नहीं रह सकी । अमेरिका आने वाला लॉस वेगस जाना ही ज्यादा पसन्द करता बनिस्पत अटलांटा जाने के। धीरे धीरे अटलांटा की चमक धूमिल पड़ने लगी। जिससे अन्य प्रदेश जो इसका अनुसरण करने की सोच रहे थे वे भी इससे विमुख हो गये।
विश्व विख्यात प्रिंसटन यूनिवर्सिटी भी न्यू जर्सी में ही है जहां प्रसिद्ध वेज्ञानिक अलबर्ट आइन्सटीन ने अपनी सेवाएं प्रदान की। ट्रेन चलती रही। शीघ्र ही हम पेनसिल्वेनिया प्रदेश में प्रवेश कर गये। अगला स्टेशन एतिहासिक नगर फिलेडेल्फिया था।

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