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अमरखजी में जय घोष के साथ जगद्गुरू शंकराचार्य ने की शिखर कलश और ध्वजदण्ड की प्रतिष्ठा
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अमरखजी महादेव मंदिर (Amarakhji Mahadev Temple) में 28 मई से चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों के अन्तर्गत गुरुवार को अंतिम दिन प्रातः 6.50 पर अमरखजी महादेव मंदिर पर शिखर कलश और ध्वजदण्ड की प्रतिष्ठा ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के जगदुरू शंकराचार्य (Jagadguru Shankaracharya) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के हाथों की गई ।

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उदयपुर : अमरखजी महादेव मंदिर (Amarakhji Mahadev Temple) में 28 मई से चल रहे धार्मिक अनुष्ठानों के अन्तर्गत गुरुवार को अंतिम दिन प्रातः 6.50 पर अमरखजी महादेव मंदिर पर शिखर कलश और ध्वजदण्ड की प्रतिष्ठा ज्योतिर्मठ बद्रिकाश्रम के जगदुरू शंकराचार्य (Jagadguru Shankaracharya) स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के हाथों की गई । ब्रह्ममुहूर्त में वैदिक विद्वानों के द्वारा पूजन अनुष्ठान सम्पन्न किये गए। कलश और ध्वजदण्ड के पूजन और परिक्रमा के साथ उपस्थित जन समुदाय ने हर-हर महादेव, जय एकलिंगनाथ, नमः शिवाय का जय घोष किया। इसी के साथ मंदिर परिसर में मौजूद जगदम्बा भवानी मंदिर शिखर पर भी कलश और ध्वजदण्ड की प्रतिष्ठा हुई। प्रतिष्ठा के साथ ही पण्डितों ने यज्ञ मण्डपों में पिछले 5 दिनों से निरंतर चल रहे महारूद्र होम और शतचण्डी यज्ञ की पूर्णाहुति की जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मंदिर की परिक्रमा की और यज्ञ मण्डप की परिक्रमा करते हुए मण्डप में प्रवेश किया जहां बंशीलाल कुम्हार, अशोक कुमावत, उमेश चन्द्र शर्मा, प्रो. नीरज शर्मा, अनन्त गणेश त्रिवेदी ने पादुका पूजन किया। धर्मसभा में सैकड़ों भक्तों की मौजूदगी रही जहां जगद्गुरू स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में नेम और प्रेम दोनों बराबर है।
जगद्गुरू शंकराचार्य शारदापीठ द्वारका सदानंद सरस्वती के आशीर्वाद और संदेश का वहां से प्रतिष्ठा आये संस्कृत कॉलेज प्राचार्य डॉ. कुलदीप पुरोहित ने वाचन किया। सभा को आमंत्रित संत महंतों के साथ सुविवि के प्रो. नीरज शर्मा, शान्तिपीठ व अमरखजी संरक्षण मण्डल के अनन्त गणेश त्रिवेदी, उद्योगपति अरविन्द सिंघल, यज्ञाचार्य पण्डित जगदीश श्रीमाली, समाजसेवी बंशीलाल कुम्हार ने भी सम्बोधित किया । प्रतिष्ठा महोत्सव में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने अपना शुभकामना संदेश भेजा। महोत्सव में सूरजकुण्ड, राजसमन्द के चैतन्यगिरी अवशेधानंद जी महाराज व इनके साथ आये महंत, और महंत प्रयागगिरी महाराज, महंत नरपतरामजी महाराज के शिष्य, बड़ा रामद्वारा, चांदपोल आदि का पादुका पूजन एवं आशीर्वाद प्राप्त किया गया।

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