Pratahkal-Bharatpur-Sports festival gives opportunity to talents of remote areas - Om Birla

भरतपुर (प्रा.सं.) । नौजवानों की ऊंचा, सामर्थ्य और हौसले की बदौलत देश खेलों के क्षेत्र में खूब नाम कमा रहा है। यही वजह है कि विदेशी धरती पर भी तिरंगा लहरा रहा है। भरतपुर (Bharatpur) ने हमेशा खेलों में दमखम दिखाया है। भरतपुरी पहलवानी के किस्से खूब मशहूर हैं। सफलता-असफलता की झिझक के बीच खिलाड़ी लक्ष्य साधते हुए आगे बढ़ते हैं तो वह एक दिन जरूर इतिहास लिखते हैं। यह बात लोकसभा अध्यक्ष ओम बिडला (Om Birla) ने कही। बिडला रविवार को लोहागढ़ स्टेडियम में खेलो इंडिया क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे ।
उन्होंने कहा कि खेलो इंडिया के तहत हुए खेल महोत्सव से दूरदराज क्षेत्र की प्रतिभाओं को मौका मिला है। उनकी योग्यता को अवसर मिलने से उनमें निश्चित रूप से निखार आया होगा। खेलों में अब भारत का वर्चस्व बढ़ रहा है। आने वाले समय में खिलाड़ी देश का भाल और ऊंचा करेंगे। जुनून और लडने की काबिलियत के चलते खिलाड़ी एक दिन लक्ष्य जरूर हासिल करते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी सामर्थ्यवान होंगे तो देश खेलों में और आगे बढ़ेगा। बिडला ने कहा कि भरतपुर शौर्य और महाराजा सूरजमल की धरती है। भरतपुर का खेलों में हमेशा दबदबा रहा है। ऐसे आयोजनों से गांवों की प्रतिभाओं को एक मंच मिला है। इससे यहां के खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपना लोहा मनवाएंगे। सांसद रंजीता कोली ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और खेल मंत्री अनुराग ठाकुर खेलों को बढ़ावा देने के लिए पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इनके जरिए गांव और ढाणी की प्रतिभाएं आगे आ रही हैं और देश-विदेश में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं। खेलो इंडिया कार्यक्रम के संयोजक यश अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन पीएम नरेन्द्र मोदी एवं खेल मंत्री अनुराग ठाकुर का खेलो इंडिया जैसा महामंच देने पर आभार जताया। अग्रवाल ने कहा कि इस आयोजन से यहां के खिलाडियों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। आने वाले समय यहां के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा की बदौलत जीत के झंडे गाढ़ेंगे। इस मौके पर भाजपा जिलाध्यक्ष ऋषि बंसल, मंदिर के महंत रोहित महाराज, पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. शैलेष सिंह, अलवर के पूर्व विधायक बनवारीलाल सिंघल, दीपराज सिंह, नेता प्रतिपक्ष रूपेन्द्र सिंह, पंकज गोयल, प्रेमपाल, नरेन्द्र सिंघल, विष्णु लोहिया, देवेन्द्र चामड़ आदि मौजूद रहे ।

Editorial

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