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श्रवण शक्ति का करें सदुपयोग : आचार्य महाश्रमण
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गोरेगांव के बांगुर विद्या भवन में प्रवास कर रहे आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) प्रातःकाल का मंगलपाठ दिया तो गोरेगांववासी प्रसन्नता से खिल उठे। रविवार को प्रवास स्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित बांगुर स्पोर्टस काम्पलेक्स में बने महावीर समवसरण में उनके मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशा व साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभा ने भी उद्बोधित किया।

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मुंबई । गोरेगांव (Goregaon) के बांगुर विद्या भवन में प्रवास कर रहे आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) प्रातःकाल का मंगलपाठ दिया तो गोरेगांववासी प्रसन्नता से खिल उठे। रविवार को प्रवास स्थल से लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित बांगुर स्पोर्टस काम्पलेक्स में बने महावीर समवसरण में उनके मंगल प्रवचन से पूर्व साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशा व साध्वीप्रमुखा साध्वी विश्रुतविभा ने भी उद्बोधित किया।
आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपने प्रवचन में कहा कि मनुष्य कान से सुनता है। यह श्रवण शक्ति ज्ञान प्राप्ति का माध्यम बनती है। इसलिए आदमी को श्रवण शक्ति का सदुपयोग करने का प्रयास करना चाहिए। आंखों से देखकर, पढ़कर और कानों से सुनकर ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। सुनकर आदमी अच्छी बात अर्थात कल्याण और बुरी बात अर्थात पाप को भी जान लेता है। ज्ञान लेने के आदमी के लिए जो श्रेय हो, श्रेष्ठ हो, अनुकरणीय हो उसे करने का प्रयास करना चाहिए। आदमी को अच्छी बातों को सुनने और उसे ग्रहण करने का प्रयास करना चाहिए। बुरी बातों के श्रवण में रस नहीं लेना चाहिए। साधु-संतों की वाणी के श्रवण से कितना ज्ञान प्राप्त हो सकता है। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ की मंगलवाणी से कितनों को लाभ, मार्गदर्शन व समाधान भी प्राप्त हुआ होगा। उन्होंने गोरेगांवासियों को आशीष प्रदान करते हुए कहा कि यहां खूब अच्छा धार्मिक-आध्यात्मिक विकास होता रहे। स्थानीय विधायक विद्या ठाकुर ने उनके अभिनंदन में अपनी अभिव्यक्ति दी।
संसारपक्ष में गोरेगांव से सम्बद्ध साध्वी लाव्यप्रभा, साध्वी भव्ययशा, साध्वी संगीतप्रभा ने अपने आाराध्य के समक्ष अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। साध्वी कैलाशवती की सहवर्ती साध्वी पंकजश्री ने सहवर्ती साध्वियों संग गीत का संगान किया।

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