✕
Home>
रेलयात्रा 11 : इंजन खराब हो जाने से कई घंटों ट्रेन पड़ी रही
By EditorialPublished on
न्यू मेक्सिको की पहाड़ियों का सिलसिला जारी था। दोपहर चार बजे के लगभग हम अलबुकरकी शहर पहुँचे। यहां ट्रेन घन्टे भर रुकने वाली थी। अलबुकरकी प्राचीन शहर है और अपनी विशिष्ट स्पेनिश पहचान के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। यहां काफी यात्री उतरे और नये चढे भी ट्रेन इतनी के रूकी फिर भी उतर कर बाहर तफरी नहीं कर सकते थे। स्टेशन के दोनों तरफ शहर प्रतीत होता था, ट्रेन के अन्दर से ही रंग बिरंगे वस्त्र पहने लोग नजर आ रहे थे। जिस तरह हमारे यहां रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले लोग चटक लाल पीले रंगों के वस्त्र पहनते

x

रेलयात्रा : न्यू मेक्सिको की पहाड़ियों का सिलसिला जारी था। दोपहर चार बजे के लगभग हम अलबुकरकी शहर पहुँचे। यहां ट्रेन घन्टे भर रुकने वाली थी। अलबुकरकी प्राचीन शहर है और अपनी विशिष्ट स्पेनिश पहचान के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। यहां काफी यात्री उतरे और नये चढे भी ट्रेन इतनी के रूकी फिर भी उतर कर बाहर तफरी नहीं कर सकते थे। स्टेशन के दोनों तरफ शहर प्रतीत होता था, ट्रेन के अन्दर से ही रंग बिरंगे वस्त्र पहने लोग नजर आ रहे थे। जिस तरह हमारे यहां रेगिस्तानी इलाकों में रहने वाले लोग चटक लाल पीले रंगों के वस्त्र पहनते हैं, जिससे निर्जन क्षेत्रों में दूर से नजर आ जाएं, कुछ वैसा ही यहां भी प्रतीत हो रहा था।
एक घन्टा तो कब का बीत गया मगर ट्रेन चलने का नाम ही नहीं ले रही थी. तभी घोषणा हुई कि ट्रेन का इंजन फेल हो गया है, इसे इंजिनियर लोग ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं। इंजन ठीक होते ही ट्रेन चल पड़ेगी। यह सुनते ही मुझे हंसी आ गई, अमरीकी ट्रेन में भी मुझे वे तमाम अनुभव हो रहे थे जो अक्सर भारतीय ट्रेनों में यात्रा करते हुए सामने आते हैं।
एक घन्टा, दो घन्टे में और दो घन्टे चार घन्टों में पलट गये मगर ट्रेन चलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे। लोग डाइनिंग कार, केफे व ओब्जर्वेशन डेक में एकत्र हो वक्त बीता रहे थे। एक टेबल पर लोग ताश खेल रहे थे तो एक अन्य पर शतरंज कुछ अपने लेपटोपों व मोबाइल फोनों पर व्यस्त थे। ट्रेन में क्लब सा माहौल बन गया था, ट्रेन कब चलेगी, क्या हो गया है इसका जिक्र तक नहीं।
इन सबके बीच सीयाटल जाने वाला बास्केटबाल प्रेमी अत्यन्त चिन्तित नजर आ रहा था। हमारी ट्रेन अगली सुबह 8 बजे लोस एंजलेस पहुँचने वाली थी, उसकी दोपहर 12 बजे सियेटल की फ्लाईट थी। इस हिसाब से दोपहर 12 बजे के पहले तो लॉस एंजलेस पहुंचने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे। उसने कन्डक्टर से भी बात की थी तो यही जवाब मिला कि पहले ट्रेन तो चले, उसके बाद ही पता चलेगा कि कितनी लेट है तथा इसे कैसे कवर करना है। वो लॉस एंजलेस में रात बिताना नहीं चाह रहा था।
शाम की 8 तो यहीं बज गई थी। हिसाब से इस वक्त हम एरिजोना प्रान्त के अत्यन्त खूबसूरत शहर फ्लेग स्टाफ में होने थे। एरिजोना अमेरिका में शामिल होने वाला 48 वां राज्य है। अलास्का व हवाई के पहले यही शामिल हुआ था। एरिजोना के ग्राण्ड कैन्यन के कारण दुनिया भर के पर्यटक यहां आते हैं। आज भी इस राज्य के एक चौथाई हिस्से में अमेरिका के मूल आदिवासी जिन्हें इण्डियन कह कर पुकारा जाता है, रहते हैं।
ग्राण्ड केन्यन लगभग 450 कि.मी. लम्बा और 30 कि.मी. चौड़ा पर्वत श्रृंखलाओं का क्षेत्र है। ये पर्वत कोलोरेडो नदी के निरन्तर घर्षण से विशाल दर्रे बन दर हैं। दोनों तरफ ऊंचे ऊंचे पहाड़ बीच में विशाल दरें और खाई तथा नीचे बहती कोलोरेडो नदी । प्रकृति की इस अनूठी रचना का अवलोकन करने के लिये पर्यटक हेलीकोप्टरों में बैठ कर इस दर्रे से गुजरते हैं और रोमांचित होते हैं। कई स्थानों पर ऐसे मंच भी बनाए गए हैं जहां पर खड़े हो कर पर्यटक दर्रे का आनन्द लेते हैं। जो लोग हेलीकोप्टर नहीं ले सकते वे बसों द्वारा एसे मंचों तक आते हैं।
फ्लेग स्टाफ में भी प्रकृति की इसी तरह की सुन्दरता के दर्शन होने वाले थे मगर ट्रेन अभी भी रवाना हो जाती तो भी रात को 12 बजे तक वहां पहुँचती, ऐसे में कुछ नजर नहीं आता। इस ट्रेन के एरिजोना प्रदेश से गुजरने के कारण यात्रियों को काफी उत्सुकता थी मगर अब तो समूचा एरिजोना प्रदेश रात को ही गुजरने वाला था।
धीरे धीरे रात घिर आई, ट्रेन चलने का नाम ही नहीं ले रही थी। कई लोग अपनी अपनी सीटों पर जाकर सो गए। मैं भी थोड़ी देर इधर उधर चक्कर लगा कर अपनी सीट पर लौटा, बगल वाला वृद्ध मेरी अनुपस्थिति में दोनों सीटों पर आरामी से सो गया था। मुझे उसे उठाने में संकोच हो रहा था मगर सामने वाली सीट पर बैठी युवती ने मुझे उकसाया कि संकोच क्यूं कर रहे हो. इसे उठा दो, आपकी सीट है, आप ही उस पर बैठो। मैंने वृद्ध को उठाया और अपनी सीट पर बैठ सोने की तैयारी करने लगा। अब वह वृद्ध बार बार सोते सोते मेरे शरीर पर लुढक जाए। अपने यहां की ट्रेनों के जनरल डिब्बों में अक्सर एसा होता है कि पास बैठा व्यक्ति नींद में इधर उधर के यात्रियों पर लुढकता रहता है, वही दृश्य यहां मेरे साथ भी रहा था। मैंने वृद्ध की झोड़ा तो वह बड़बड़ाते हुए एक तरफ हुआ। शीघ्र ही नींद के आगोश में चला गया। रात को कब ट्रेन चल पड़ी कुछ पता ही नहीं चला।
सुबह 7 बजे के करीब मेरी नींद अपने फोन की घंटी से खुली। लॉस एंजलेस से मेरे भानजे मुनीश का फोन था, यह स्टेशन पर मुझे लेने आने वाला था। उ बताया कि ट्रेन 2 घंटे लेट चल रही है। वक्त के अनुसार सुबह 8 बजे पहुंचने वाल थी, अब 10 बजे तक पहुँचेगी। मैंने सोचा रात भर में ट्रेन ने काफी देरा कवर कर ली लगती है। इस हिसाब से तो बास्केटबाल प्रेमी अपनी सियाटल की फ्लाईट पकड़ पायेगा।
मैं अपने स्थान से उठा और ओब्जर्वेशन डेक की तरफ गया। एरिजोना र में ही निकल चुका था और हम केलिफोर्निया प्रदेश में प्रवेश कर चुके थे। ट्रेन रात नील्स स्टेशन पर रुकी हुई थी। वक्त के अनुसार यह स्टेशन रात की एक ब आने वाला था और अभी सुबह की 7 से ज्यादा समय हो गया था। इस हिसाब से तो ट्रेन 6 घन्टे लेट चल रही थी, 10 बजे तक तो एल. ए. पहुंचने का सवाल ही नहीं था। मुनीश का घर स्टेशन से बहुत दूर है इसलिये वह कहीं स्टेशन के लिये निकल। न पड़े इस कारण मैंने तुरन्त उसे फोन किया कि गाड़ी 6 घन्टे लेट चल रही है. मेरे से बात करके ही घर से निकले। गनीमत थी कि हम स्टेशन पर ही थे इसलिए फोन काम कर रहे थे।
अब तक हम अमेरिका के 18 प्रदेशों से गुजर चुके थे, केलिफोर्निया 19 वां तथा अन्तिम प्रदेश था। न्यूयार्क से शिकागो तक की यात्रा 1835 कि.मी. द शिकागो से एल. ए. तक की यात्रा 3624 कि.मी. थी। चार दिनों की यह रेल यात्रा करीब साढ़े चार हजार कि.मी. की होने वाली थी। इतने दिनों की इतनी लम्बी यात्रा सकुशल अकेले पूर्ण होने का संतोष था।
बास्केटबाल प्रेमी अभी भी कन्डक्टर से बात कर रहा था मगर उसने आस छोड़ दी थी। ट्रेन की गति साधारण ही थी फिर भी कन्डक्टर कह रहा था कि ह बक अप करने की कोशिश कर रहे हैं। बाहर हमारे राजस्थान की तरह ही नंगी पहाड़ियां और सूखे निर्जन क्षेत्र नजर आ रहे थे। केलिफोर्निया में वर्षा का अभाव रहता है इसलिये प्रदेश को अक्सर सूखे का सामना करना पड़ता है। इस वर्ष भी पिछले तीन सालों से पड़ रहा सूखा जारी था। यहां की औसत वर्षा ही 7-8 इच रहती है, वह भी पूरी नहीं गिरे तो संकट हो जाता है।
भौगोलिक दृष्टि से केलिफोर्निया विविधिता से भरा प्रदेश है। यह प्रशान्त महासागर के छोर पर स्थित है जिसकी तट रेखा लगभग 1500 कि.मी. है। इसके तट ऊंची ऊंची चट्टानों से घिरे हैं। विश्व को मनोरंजन प्रदान करने वाली होलीवुड की नगरी इसी प्रदेश के लॉस एंजलेस शहर में है।

Editorial
Next Story
Related News
X
