✕
मोक्ष की प्राप्ति हो जीवन का लक्ष्य
By EditorialPublished on
कांदिवली में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर शुक्रवार प्रातःकाल आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने प्रस्थान किया। कांदिवलीवासियों ने कृतज्ञता अर्पित की तो उन्हें आशीष प्रदान किया। मार्ग में अनेक स्थानों पर दर्शनार्थियों पर आशीष वृष्टि करते हुए वे मलाड की ओर गतिमान थे। लगभग छह किलोमीटर का विहार कर आचार्य महाश्रमण अपनी धवल सेना संग विट्टी इण्टरनेशनल स्कूल के प्रांगण में पहुंचे तो मलाडवासियों व स्कूल प्रबन्धन ने अभिनंदन किया।

x

मुंबई । कांदिवली में ज्ञान की गंगा प्रवाहित कर शुक्रवार प्रातःकाल आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने प्रस्थान किया। कांदिवलीवासियों ने कृतज्ञता अर्पित की तो उन्हें आशीष प्रदान किया। मार्ग में अनेक स्थानों पर दर्शनार्थियों पर आशीष वृष्टि करते हुए वे मलाड की ओर गतिमान थे। लगभग छह किलोमीटर का विहार कर आचार्य महाश्रमण अपनी धवल सेना संग विट्टी इण्टरनेशनल स्कूल के प्रांगण में पहुंचे तो मलाडवासियों व स्कूल प्रबन्धन ने अभिनंदन किया।
स्कूल परिसर में आयोजित कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि एक प्रश्न हो सकता है कि जीवन का लक्ष्य क्या हो? यह प्रश्न थोड़ा जटिल-सा हो सकता है। जन्म सभी प्राणी लेते हैं और मृत्यु भी सबकी होती है। किन्तु चौरासी लाख जीव योनियों में श्रेष्ठ मानव जीवन प्राप्त करना विशेष है तो इस मानव जीवन का लक्ष्य भी निर्धारित होना चाहिए। किसी अच्छे उद्देश्य से जीवन जीना श्रेष्ठ बात होती है। शास्त्रों में मानव जीवन का परम लक्ष्य बताया गया कि मानव जीवन में अध्यात्म की साधना के द्वारा जन्म-मृत्यु की परंपरा से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति हो जाए। ज्ञान, दर्शन और चारित्र की साधना और कषायों से मुक्त होकर ही मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। साधु न बनने पर भी गृहस्थ भी अपने जीवन में साधना कर मोक्ष की दिशा में गति कर सकता है।
तेरापंथ धर्मसंघ के दसवें अधिशास्ता आचार्य महाप्रज्ञ के 104वें जन्मदिवस पर उन्होंने कहा कि आज आषाढ़ कृष्णा त्रयोदशी है। आषाढ़ महीने में दो त्रयोदशी तिथि आती है। आषाढ़ शुक्ला त्रयोदशी को आचार्य भिक्षु का जन्मदिवस है तो आषाढ़ कृष्णा त्रयोदशी को गुरुदेव महाप्रज्ञ का जन्मदिवस है। वे तेरापंथ के विलक्षण आचार्य थे। उन्होंने प्रेक्षाध्यान, जीवन विज्ञान का प्रारम्भ किया। आज मैं उनके प्रति श्रद्धा अर्पण करता हूं। आपके जीवन से लोगों को अपने जीवन का अच्छा लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा प्राप्त हो। साध्वी प्रमुखा ने भी अपनी विनयांजलि समर्पित की। दलपत बाबेल, स्कूल के संस्थापक डॉ. विनय जैन, प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री सुरेंद्र कोठारी ने भावनाओं की अभिव्यक्ति दी। नवी मुम्बई के पहले मेयर संजीव नाईक ने आचार्य महाश्रमण के दर्शन के उपरान्त विचार रखे। इस अवसर पर धर्मचंद जैन, संजीव नाईक, विनय जैन का स्वागत प्रवास व्यवस्था समिति अध्यक्ष मदनलाल तातेड महामंत्री सुरेंद्र कोठारी ख्यालीलाल तातेड राजेंद्र मुनोत पुखराज सिरोहिया मनोज सिंघवी ने किया।

Editorial
Next Story
Related News
X
