Pratahkal-Tax evasion of Rs 30,000 crore exposed!

मुंबई । गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स अधिकारियों ने टैक्सचोरी (Tax evasion) के खिलाफ जारी अपने देश‍व्यापी अभियान के तहत करीब 30 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का भंडाफोड किया है। इस अभियान के तहत बेहद बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और फर्जीवाडे में शामिल नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक, टैक्स चोरी के खिलाफ जारीइस अभियान के तहत 4 हजार से ज्यादा फर्जी कम्पनियों का खुलासा हुआ है। इस दौरान जीएसटी (GST) विभाग द्वारा 30 हजार करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। करीब 16 हजार से ज्यादा फर्जी जीएसटी पंजीकरण का पता चला है। अधिकारियों के मुताबिक, फर्जी और बेजा तरीके से इस्तेमाल किये जा रहे 18 हजार से ज्यादा पैन कार्ड और आधार कार्ड पकड़े गये हैं। इस पूरे अभियान में अब तक सात लोगों की गिरफ्तारी की गई है। दरअसल जीएसटी विभाग की ओर से देश में लगातार बढ़ रही जीएसटी और टैक्स चोरी के खिलाफ 16 मई से एक खास अभियान शुरु किया गया था। यह अभियान पूरे देशभर में शुरु किया गया था। जीएसटी विभाग ने अपने इस अभियान में अन्य महत्वपूर्ण विभागों जैसे कि इनकम टैक्स विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय इत्यादि को भी साथ लिया है। हालांकि ये सभी विभाग अपने – अपने स्तर पर लगातार टैक्स चोरी के खिलाफ कार्रवाई अभियान करते रहते हैं लेकिन जीएसटी विभाग ने अपने अभियान में इन सभी विभागों के सहयोग के साथ एक समन्वित कार्यवाही शुरु की है। अभियान के पहले ही सप्ताह में करीब 10 हजार से ज्यादा फर्जी पंजीकरणों का खुलासा हुआ है। कार्यवाही में 4 हजार से ज्यादा फर्जी कंपनियां पाई गई और कुल करीब 16 हजार से ज्यादा फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामले उजागर हुये हैं। राष्ट्रीय किसान विकास पत्र, पीएम किसान, ग्रामीण रोजगार योजना और अन्य योजनाओं के लाभार्थियों के डाटा का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियों के जरिये मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी को अंजाम दिया जा रहा था। खास बात यह है कि यह सारा काम बाकायदा एक उद्योग क्षेत्र की तरह पूरी तरह से प्रबंधित और कुशलता से संचालित किया जा रहा था। करीब 16 राज्यों में इस फर्जीवाडे का नेटवर्क विस्तारित था। लोगों के डाटा चुराये जा रहे थे और कई मामलों में लोगों को उनकी जानकारी के बगैर ही कंपनी के निदेशक बनाकर हेराफेरी को अंजाम दिया जा रहा था।
फर्जी कंपनियों द्वारा फर्जी चालान और बिल बनाये जा रहे थे जिनको इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के लिये विभिन्न कंपनियों को बेचा जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, इसके पीछे संगठित गिरोह की भूमिका है और यह कई राज्यों में इस हेराफेरी और जालसाजी को अंजाम दे रहा है। जेम एंड जूलरी, टेक्सटाइल्स, तम्बाकू और ऑटो पार्ट्स सेक्टर में इस तरह की फर्जी कंपनियां ज्यादा फल-फूल रही हैं। गुजरात जीएसटी अधिकारियों ने सबसे पहले एक फर्जी चालान रैकेट का पर्दाफाश किया था जिसके बाद यह देशव्यापी अभियान शुरु किया गया। गुजरात के बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, पंजाब और हरियाणा में टैक्स चोरी और फर्जीवाडे की रोकथाम के लिये छापेमारी, जांच और तलाशी कार्यवाही को तेजी से और बड़े पैमाने पर अंजाम दिया गया। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि इस पूरे ऑपरेशन में बेहद सावधानी और सतर्कता बरतते हुये पूरी तरह दस्तावेजी कागजातों के आधार पर पूरी तस्दीक करने के बाद ही कार्यवाही की जा रही है। ऐसा इसलिये किया जा रहा है कि इस अभियान के दौरान बिना वजह टैक्सपेयर्स और निर्दोष कारोबारियों और कंपनियों को दिक्कत ना हो।

Editorial

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