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रेलयात्रा 10 : होलीवुड फिल्मों की कार्यस्थली से गुजरने का रोमांच
By EditorialPublished on
गोरों द्वारा उत्पीड़ित किये जाने, सताये जाने, भेद भाव किये जाने का ही परिणाम है कि अमरीकी भारतीय राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रम्प के घोर विरोधी हैं। भारत में तो डेमोक्रेटिक प्रत्याशी हिलेरी की तुलना में ट्रम्प के ज्यादा समर्थक है उसका कारण हिलेरी के भारत विरोधी रहने और ट्रम्प का मुखर मुस्लिम विरोधी होना है।

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रेलयात्रा : गोरों द्वारा उत्पीड़ित किये जाने, सताये जाने, भेद भाव किये जाने का ही परिणाम है कि अमरीकी भारतीय राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रम्प के घोर विरोधी हैं। भारत में तो डेमोक्रेटिक प्रत्याशी हिलेरी की तुलना में ट्रम्प के ज्यादा समर्थक है उसका कारण हिलेरी के भारत विरोधी रहने और ट्रम्प का मुखर मुस्लिम विरोधी होना है।
अमेरिका आते ही पांच सात दिनों में ही जब यह बात मुझे स्पष्ट हो गई तो आश्चर्य हुआ कि भारतीय ट्रम्प के इतने खिलाफ क्यू है? ट्रम्प का नाम आते ही लोग उसकी मजाक उड़ाने लगते। टी.वी. चेनलें राष्ट्रपति चुनाव की खबरों से भरी पड़ी रहती हैं. ट्रम्प की चर्चा होते ही उसके प्रति लोगों की नफरत और हिकारत उभर आती है।
भारतीयों और यहां पीढीयों से रह रहे भारत वंशियों के साथ साथ ही तमाम गैर गोरी नस्ल के लोगों को आशंका है कि ट्रम्प राष्ट्रपति बना नहीं कि गोरों का उनके प्रति उत्पीड़न और बढ़ जायगा दे अपने जीवन काल में कभी न कभी या कई बार गोरों द्वारा सताये जाने के किस्से याद कर कर के ही कांपने लगते हैं।
दरअसल ट्रम्प को मिले व्यापक समर्थन के पीछे गोरे लोगों की उस बहुत बही जमात का हाथ है जो अवसर मिलते ही तमाम गैर गोरों को अमेरिका से निकाल बाहर फेंकना चाहते हैं। अमेरिका में पैदा हो जाने से भारतीयों का रंग रूप नहीं बदल जाता, वो भले ही अमरीकियों की तरह बोलते चालते खाते-पीते हैं, यह कौन जानता है, शकल देखते ही गोरे फिकरे कसने लगते हैं। यह भेदभाव स्कूलों में तो बहुत ज्यादा नजर आता है। हर व्यक्ति स्कूल गया ही है और अपने गोरे सहपाठियों के हाथों जलील हुआ ही है। उपर से कोई नहीं बताता मगर कभी सामूहिक चर्चा चल पड़ती है तो सब एक एक कर अपने घाव उघाड़ने लग जाते हैं।
भारतीयों की तरह ही अश्वेत अफ्रीकी अमरीकी, लेटीनो, मेक्सिकन, पूर्वी एशियाई, चीनी वगैरा तमाम गैर गोरे ट्रम्प से नफरत करते हैं जिनके वोट उसे मिलना मुश्किल ही नजर आता है। ट्रम्प की इस तरह की साम्प्रदायिक और नस्लभेदी छवि के कारण ही हिलेरी की तमाम बुराईयां ढक गई है और उसके जीतने के आसार नजर आते हैं।
न्यूयार्क से चल कर ज्यू ज्यू में अमेरिका के पश्चिमी भाग की तरफ अग्रसर होता जा रहा था त्यू त्यू समय बदलता जा रहा था। पूरा अमेरिका मुख्यतः 4 समय क्षेत्रों में बंटा हुआ है, न्यूयार्क का समय ई.एस.टी. कहलाता है, ईस्टर्न स्टेण्डर्ड टाईम जिस तरह भारत में इण्डियन स्टेण्डर्ड टाईम है। भारत में भी पूर्व से पश्चिम तक देशान्तरों में बहुत अन्तर है फिर भी देश भर में एक ही टाईम जोन रखा हुआ है । बंगलादेश हमसे आधे घन्टे आगे है फिर भी बंगलादेश से भी पूर्व में स्थित हमारे। पूर्वोत्तर राज्यों का समय उससे आधे घन्टे पीछे है जिससे वहां के लोगों को बहुत परेशानियां उठानी पड़ती है। सूर्योदय सुबह जल्दी हो जाता है, उसी तरह सूर्यास्त भी। पूर्वोत्तर राज्यों का समय आधे घन्टे आगे करने की मांग बहुत लम्बे समय से चल रही है फिर भी देश में दो टाईम जोन नहीं रखने के हठ के कारण इसे पूरा नहीं किया जा रहा।
अमेरिका में ई.एस.टी. के बाद सी. एस. टी. है जो न्यूयार्क से एक घंटा प है, इसके बाद एम. एस. टी. है- माउन्टेन स्टेण्डर्ड टाईम जो दो घंटे पीछे है व पी. एस. टी. पेसिफिक स्टेण्डर्ड टाईम जो तीन घन्टे पीछे है देश की राज वाशिंगटन में जब सुबह 9 बज रहे होते हैं तब लास एंजलेस में सुबह 6 बज रहे होते हैं, यदि यहां के लोगों को न्यूयार्क वाशिंगटन में कोई काम हो तो सुबह 6 बजे उठ कर ही लग जाना पड़ता है। आजकल तो कई ओफिस लोगों के घर से ही चलते हैं, लोस एंजलेस जैसे पश्चिमी प्रदेशों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या ही बदल जाती है। इनका कार्यकाल सुबह 6 से दिन को दो बजे हो जाता है। ये व्यावहारिक दिक्कतें हैं मगर सबको इसी तरह चलना पड़ता है। अलास्का तो और भी पश्चिम में है, वह एक घन्टा और पीछे है।
मेरे पास घड़ी तो थी नहीं, मोबाईल फोन था, जिसकी घड़ी अपने आप पीछे होती जा रही थी। मुझे पता ही नहीं चल पा रहा था। कोलोरेडो प्रान्त में प्रवेश करते ही बाहर का दृश्य एकदम बदल गया। लम्बे चौड़े हरे भरे खेतों-मैदानों का स्थान प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण पहाड़ों, रेगिस्तानों, घाटियों, दरों, नदी-नालों ने लेना शुरू कर दिया।
विश्व प्रसिद्ध रोकी पर्वत श्रृंखला जिसे रोकीज कहते है, शुरू हो चुकी थी। समूचे उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के पश्चिमी भाग को दो महान पर्वत श्रृंखलाओं ने घेर रखा है। दक्षिणी अमेरिका में यह एण्डी पर्वत श्रृंखला है। संक्षेप में इन्हें एण्डीज व रोकीज कहा जाता है। करीब 2330 कि.मी. लम्बी कोलोरेडो नदी इसी क्षेत्र से गुजरती है जिसके नाम पर यह प्रान्त है। ज्यूं ज्यूं दिन चढ़ता गया ओशन ठेक में लोगों की भीड़ बढ़ती गई। कोई इधर उधर होता तो झट से -उसकी सीट अन्य कोई ले लेता। एक टी.वी. चेनल का फोटोग्राफर भी बाहर आ रहे • दृश्यों का निरन्तर वीडियो लिये जा रहा था, उसने अपना केमरा फिक्स कर एक जगह लगा दिया था।
दोपहर होते होते हम एक अन्य राज्य न्यू मेक्सिको में प्रवेश कर गये। दूर दूर तक रेगिस्तान और टाटले मगरे, एसा लग रहा था जैसे राजस्थान के ही किसी प्रदेश से गुजर रहे हैं। कमेन्टेटर निरन्तर क्षेत्र का विवरण दिये जा रहा था। यह क्षेत्र होलीवुड की कई प्रसिद्ध वेस्टर्न मूवीज की शूटिंग के लिये प्रयुक्त हो चुका था। क्लिन्ट ईस्टवुड, जोन वेयन जैसे नामी सितारों की एक के बाद एक फिल्मों के नाम लेकर वह बता रहा था कि किस फिल्म का कौन सा शोट इन इलाकों में फिल्माया गया था।
ईलाका स्पेनिश बहुल था। स्पेनिश यहां की द्वितीय भाषा है। दक्षिणी अमेरिकी या हिस्पैनिक मूल के लोगों की बस्तियां यहां प्रचुरता से हैं। यहां के स्थानों के नामों में भी स्पेनिश का प्रभाव एकदम नजर आ जाता है। अधिकतर नाम लॉस, सेन्टा, सेन्ट, सेन आदि से शुरू होते थे। अगला स्टेशन लास वेगस आया तो मैं चौंक गया क्यूंकि यह तो हमारे रास्ते में था ही नहीं। लास वेगस अपने केसीनो के लिये विश्व प्रसिद्ध है मगर यह वो लास वेगस नहीं था, उसी नाम का एक अन्य छोटा सा शहर था।
हमारी ट्रेन लेट चल रही थी, यात्रियों को बाहर के दृश्यों का रसास्वादन करवाने इसकी गति धीमी ही रखी गई थी। इस ट्रेन में दूसरा दिन था, यात्री कमोबेश वही थे, इस कारण जगह जगह गन्दगी नजर आने लगी थी। साफ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी, हमारे यहां तो स्लीपर ट्रेनों तक में झाड़ू बुहारने, सफाई करने का काम होता रहता है। यहां कचरा पात्र रखे हुए थे, लोगों पर ही था कि वे अपना कचरा लाकर उसमें डालें मगर कोई कचरा कहीं बिखर जाता है तो उसे उठाने वाला कोई नहीं था। इतनी शानदार ट्रेन में इस तरह की गन्दगी बहुत अजीब लग रही थी।
अचानक बादल घिर आये और टप टप वर्षा गिरने लगी। ओब्जर्वेशन डेक की आधी छत भी पारदर्शी थी इस कारण गिरती बन्दों को देखने का आनन्द अनूठा ही था। वर्षा ज्यादा देर नहीं रही, रेगीस्तानी निर्जन इलाका जारी था, दूर दूर तक ज्वालामुखी जैसे पहाड़ नजर आ रहे थे। ये कभी सक्रिय रहे थे मगर अभी सुशुप्त थे। सेन्टा के इस प्रदेश की राजधानी है, महिला सन्तों पर रखे गये नाम सेन्ट कहलाते है जबकि अन्य सेन्ट 19 वीं शताब्दी में यहां की सेन्टा केल प्रसिद्ध थी जो कि एक व्यावसायिक मार्ग था। लोग इस निर्जन क्षेत्र से बैल गाड़ियों में सामान लाद लाद कर अन्य घने बसे क्षेत्रों में बेचने ले जाते थे।

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