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आचार्य महाश्रमण का कांदिवली में अभूतपूर्व स्वागत
By EditorialPublished on
2003 में आचार्य महाप्रज्ञ के मर्यादा महोत्सव के लगभग बीस वर्षों बाद तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के पदार्पण से कांदिवली (Kandivali) तेरापंथ भवन मंगलमय बन गया। कांदिवलीवासियों ने आराध्य का स्वागत जुलूस के साथ अभिनंदन किया। मंगल शंख ध्वनि, गूंजते जयघोष और मेघों की गड़गड़ाहट से वातावरण महाश्रमणमय बन रहा था। महाराष्ट्र (Maharashtra) प्रवेश के बाद कांदिवली प्रथम स्थान है, जहां आचार्य महाश्रमण त्रिदिवसीय प्रवास करेंगे।

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मुम्बई । 2003 में आचार्य महाप्रज्ञ के मर्यादा महोत्सव के लगभग बीस वर्षों बाद तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशम अधिशास्ता आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) के पदार्पण से कांदिवली (Kandivali) तेरापंथ भवन मंगलमय बन गया। कांदिवलीवासियों ने आराध्य का स्वागत जुलूस के साथ अभिनंदन किया। मंगल शंख ध्वनि, गूंजते जयघोष और मेघों की गड़गड़ाहट से वातावरण महाश्रमणमय बन रहा था। महाराष्ट्र (Maharashtra) प्रवेश के बाद कांदिवली प्रथम स्थान है, जहां आचार्य महाश्रमण त्रिदिवसीय प्रवास करेंगे।
इसके पूर्व मंगलवार को प्रातःकाल मिरा रोड स्थित वर्धमान स्थानकवासी उपाश्रय से आचार्य महाश्रमण दस किलोमीटर का विहार कर कांदिवली स्थित तेरापंथ भवन पहुंचे। भवन परिसर में बने ‘सिद्ध मर्यादा समवसरण’ में आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि शास्त्रों में एक बात बताई गई कि आदमी को कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए, जिसमें थोड़ा लाभ और ज्यादा हानि हो। आदमी लाभ के लिए काम करे तो वह उसकी बुद्धिमत्ता और जिसमें मात्र हानि ही हानि हो, ऐसा करना उसकी बुद्धिहीनता होती है। उदाहरण के लिए जैसे कोई संयमी, तपस्वी कोई साधु किसी छोटी बात को लेकर साधुत्व को छोड़ गृहस्थावस्था में चला जाता है तो मानो थोड़े से गृहस्थ सुख के लिए सम्पूर्ण जीवन को सुखी बनाने वाले मार्ग का त्याग कर दिया। दुनिया की करोड़ों-करोड़ों की सम्पत्ति साधुत्व की संपदा के आगे नाकुछ-सी होती है। किसी गृहस्थ के पास भी साधुत्व जैसी अतुलनीय संपदा न भी हो तो गृहस्थ भी अपने जीवन में संयम और साधना, व्रत आदि के माध्यम से आध्यात्मिक संपदा को प्राप्त कर सकता है। श्रावकों के लिए बारह व्रत और सुमंगल साधना की बात बताई गई है, जिसके माध्यम से श्रावक अपने जीवन को प्रकर्ष की ले जा सकता है।
उन्होंने पूर्व में आचार्य महाप्रज्ञ के कांदिवली भवन में विराजने के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि इस भवन में धार्मिक-आध्यात्मिक गतिविधियां चलती रहें, लोगों का धार्मिक उत्थान होता रहे। साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभा ने भी विचार रखे। साध्वी विद्यावती (द्वितीय) ने सहवर्ती साध्वियों के संग गीत का संगान किया। साध्वी सोमलता व साध्वी संयमलता ने भी हृदयोद्गार व्यक्त करते हुए सहवर्ती साध्वियों के संग गीत का संगान किया। विधायक प्रकाश सुर्वे ने भी विचार रखे। तेरापंथ महिला मण्डल व तेरापंथ समाज-कांदिवली ने स्वागत गीत का संगान किया। ज्ञानार्थियों ने अभिव्यक्ति दी।
तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद बोहरा ने दो दशक पहले आचार्य महाप्रज्ञ एवं युवाचार्य महाश्रमण के सानिध्य में हुए सिद्ध मर्यादा महोत्सव की स्मृति प्रस्तुत की। उन्होंने चार्तुमास का एक महीना या शेषकाल के बाद का एक महीना तेरापंथ भवन में प्रवास करने का आग्रह किया। मंत्री मनीष कोठारी ने कहा कि आपके आगमन से ये विराट भवन भी आज छोटा पड़ गया। सहमंत्री प्रकाश धाकड़ कोषाध्यक्ष संजय बड़ौला कांदिवली सभाध्यक्ष पारसमल दुग्गड मंत्री अशोक हिरण मालाड अध्यक्ष इंदरमल कच्छारा कांदिवली युवक परिषद् अध्यक्ष नवनीत कच्छारा मुंबई महिला मंडल अध्यक्ष रचना हिरण मालाड अध्यक्ष मनोज लोढ़ा कांदिवली संयोजिका नीतू नाहटा मालाड संयोजिका अरुणा चोरड़िया ने भी विचार रखे।
इस अवसर पर प्रवास व्यवस्था समिति के मुख्य प्रबंधक मनोहरलाल गोखरू महामंत्री सुरेंद्र कोठारी युवक परिषद के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी भलावत भारत जैन महामंडल के पूर्व अध्यक्ष रमेश धाकड़ तेरापंथी सभा कार्याध्यक्ष नवरत्न गन्ना निवर्तमान अध्यक्ष नरेंद्र तातेड पूर्व अध्यक्ष विनोद कच्छारा ख्यालीलाल तातेड मंत्री दीपक डागलिया फाउंडेशन के पूर्व अध्यक्ष के एल परमार अशोक तलेसरा सुरेंद्र कोठारी अर्जुनलाल चौधरी महासभा के पूर्व अध्यक्ष किशनलाल डागलिया जगदीश उमरिया महावीर डूंगरवाल प्यारचंद मेहता शांतिलाल कोठारी मेघराज धाकड़ बाबूलाल समदरिया मौजूद थे।
आचार्य महाश्रमण साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा मुख्य मुनि महावीर कुमार साध्वीवर्या संबुद्ध यशा एवं धवल वाहिनी कांदिवली पहुँचे। रैली ने नेशनल पार्क से चल तेरापंथ भवन में प्रवेश किया।
फाउंडेशन उपाध्यक्ष गणेश लाल कोठारी राकेश बड़ौला बाबूलाल राठौड़ महावीर डूंगरवाल रमेश मेहता विवेक बोहरा कन्हैयालाल मेहता जितेंद्र सियाल मीठालाल श्रीश्रीमाल चुन्नीलाल पगारिया धनराज नाहटा धनराज सिंघी सुगनचंद हिरण जवरीमल नौलखा योगेश चौधरी नवनीत कच्छारा मनोज लोढ़ा अशोक हिरण सुदर्शन बांठिया विनीत सिंघवी अशोक कोठारी अनिल चोरड़िया हस्ती भंडारी रौनक कोठारी दिनेश सिंघवी विकास भूतोड़िया पंकज कच्छारा अजय डांगी सुशील बोहरा राजेन्द्र दुग्गड़ साहिल कोठारी पंकज लोढा कपिल चंडालिया राजकिरण बाफना कमलेश बोहरा जीतेन्द्र कोठारी भरत भंडारी हितेश कोठारी अनिल चोरड़िया हसमुख मेहता विमल चोरड़िया योगेश कोठारी संदीप राठौड़ रमेश दुग्गड पुलकित कोठारी सुनील बोथरा प्रकाश हिरण कमलेश कोठारी राजेंद्र ढेलरिया सुदर्शन बांठिया संदीप राठौड़ ज्ञानमल भंडारी बाबूलाल दुग्गड अरुन सोलंकी महेश मेहता विकास बापना राकेश कोठारी शांति लाल धोका गोतम भंडारी अशोक कोठारी भीमराज कच्छारा पुखराज सिरोहिया बाबूलाल लोढ़ा महेश मेहता अनिल परमार भरत लोढ़ा राकेश मांडोत विनोद सोलंकी सुनील संचेती विनोद कोठारी नरेंद्र कोठारी कमलेश कोठारी चांदमल कुमठ चंद्रेश मादरेचा नवीन नाहटा विपिन सामोता कमलेश बोहरा संदीप पिंचा कांतिलाल बापना अंश कोठारी मीठालाल धाकड़ अलका पटावरी निशा दुग्गड विद्या मेहता उर्मिला भंडारी का सहयोग रहा।

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