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आदमी ऐसा प्रयास करे कि उसके भीतर अशुद्ध भाव न आएं
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तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) सोमवार प्रातः नायगांव स्थित लोढ़ा धाम से विहार कर मिरा रोड (Mira Road) पहुंचे। इससे पूर्व सुबह उत्साही श्रद्धालु अपने आराध्य की अगवानी को विहार से पूर्व ही लोढ़ा धाम पहुंच गए थे। रास्ते में अनेक स्थानों पर लोगों ने गुरुदेव के दर्शन लिए। लगभग साढे बारह किलोमीटर का विहार कर आचार्य महाश्रमण जैसे ही मिरा रोड की सीमा में प्रविष्ट हुए, सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने उनका भावभीना स्वागत किया। स्वागत जुलूस के साथ वे मिरा रोड स्थित वर्धमान स्थानकवासी उपाश्रय पहुंचे।

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मुम्बई । तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) सोमवार प्रातः नायगांव स्थित लोढ़ा धाम से विहार कर मिरा रोड (Mira Road) पहुंचे। इससे पूर्व सुबह उत्साही श्रद्धालु अपने आराध्य की अगवानी को विहार से पूर्व ही लोढ़ा धाम पहुंच गए थे। रास्ते में अनेक स्थानों पर लोगों ने गुरुदेव के दर्शन लिए। लगभग साढे बारह किलोमीटर का विहार कर आचार्य महाश्रमण जैसे ही मिरा रोड की सीमा में प्रविष्ट हुए, सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने उनका भावभीना स्वागत किया। स्वागत जुलूस के साथ वे मिरा रोड स्थित वर्धमान स्थानकवासी उपाश्रय पहुंचे।
इसके बाद वे प्रवचन के लिए प्रवास स्थल से सेक्टर-6 ग्राउंड में बने महावीर समवसरण पहुंचे। वहां उन्होंने कहा कि पुरुष अनेक चित्तों वाला होता है। आदमी की भावधारा बदलती रहती है। शांत रहने वाला आदमी कभी गुस्से में होता है तो कभी हिंसक आदमी के भीतर भी करुणा के भाव जागृत हो सकते हैं। भावधाराओं के इस आरोह-अवरोह को जैन आगमों में लेश्या के रूप में बताया गया है। छह प्रकार की लेश्याओं का वर्णन किया गया है। जिसे कृष्णता और शुक्लता द्वारा प्रदर्शित किया गया है। आदमी को ऐसा प्रयास करना चाहिए कि उसके भीतर अशुद्ध भाव न आए। असत् से सत की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर और मृत्यु से अमरत्व की दिशा में गति करने का प्रयास करना चाहिए। मनुष्य अच्छी भावधारा के माध्यम से परम गति को भी प्राप्त कर सकता है। सद्भावना व नैतिकता का विकास हो तथा नशामुक्त जीवन हो तो सद्गति संभव हो सकती है। उन्होंने मिरा रोड वासियों से कहा कि यहां के लोगों में खूब अच्छी धार्मिकता का विकास होता रहे। गुरुदर्शन करने वाली साध्वियों को भी उन्होंने आशीर्वाद प्रदान किया। प्रवचन के उपरान्त पांच वर्षों बाद गुरुदर्शन करने वाली साध्वी पीयूषप्रभा ने भाव व्यक्त करते हुए सहवर्ती साध्वियों के संग गीत का संगान किया। साध्वी जिनरेखा ने भी गुरुदर्शन से हर्षित भावों को अभिव्यक्त करते हुए सहवर्ती साध्वियों संग गीत का संगान किया। राहुल चौधरी, घेवरचन्द सुराणा, मूर्तिपूजक समाज की ओर से हस्तीमल पामेचा व स्थानकवासी समाज के फूलचंद नाहर ने विचार रखे। तेरापंथ महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। कन्या मण्डल व ज्ञानार्थियों ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में स्थानीय विधायक गीता जैन भी उपस्थित रहीं।

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