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मौत का मजहब ने किया भावुक
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भारतीय लोक (Indian folk) कला मण्डल, उदयपुर में रविवार शाम को उदयपुर के लाडले और देश के प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. आलम शाह खान कि कहानी 'मौत का मज़हब' (Religion of death) का मेला ग्राउण्ड में मंचन किया गया। कहानी मौत का मजहब 80 के दशक में भोपाल में हुई गैस त्रासदी पर आधारित है जिसमें हज़ारों कि संख्या में सरकारी आकड़ों के अनुसार 3000 तो सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 10000 से अधिक लोगों कि जान गई थी ।

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उदयपुर : भारतीय लोक (Indian folk) कला मण्डल, उदयपुर में रविवार शाम को उदयपुर के लाडले और देश के प्रसिद्ध कहानीकार डॉ. आलम शाह खान कि कहानी 'मौत का मज़हब' (Religion of death) का मेला ग्राउण्ड में मंचन किया गया। कहानी मौत का मजहब 80 के दशक में भोपाल में हुई गैस त्रासदी पर आधारित है जिसमें हज़ारों कि संख्या में सरकारी आकड़ों के अनुसार 3000 तो सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 10000 से अधिक लोगों कि जान गई थी । दृश्यों को युवा अभिनेता एवं नाट्य निर्देशक कविराज लईक के निर्देशन में एनवायरमेन्टल थियेटर शैली में कब्रिस्तान एवं शमशान बनाकर जहाँ लाशों को दफनाया जा रहा था तथा अन्तिम संसकर किया जा रहा था एनवायरमेन्टल थियेटर शैली में यह राजस्थान में प्रथम बार कोई प्रस्तुति हुई जिसने दर्शकों को भावुक करने के साथ अन्दर से झकझोर दिया है। दि परफोरमर्स कल्चरल सोसायटी एवं भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर कि प्रस्तुति में निम्नलिखित कलाकारों ने भाग लिया। शिवांगी तिवारी, पायल मेनारिया, धीरज जींगर, प्रग्नेश पण्डया, पूनम कुंवर देवड़ा, दिविशा पालीवाल, चिनमय चतुर्वेदी, खुशी, धैर्या व्यास, भवदीप मलकानी, हुसैन आर. सी., विपुल, मानद, विशाल चित्तौड़ा, दिव्यांशु नागदा, सुदांशु, भूपेन्द्र सिंह, विधी शुक्ला, पंकज, ईशान, कृतिका, दिशान्त, दीपराज आदि । लाईट एवं प्रकाश व्यवस्था- सैयद आरिफ, संगीत पर कुणाल मेहता थे ।

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