Pratahkal-Acharya Mahashraman reached Lodha Dham
मुंबई । मुंबई चातुर्मास के लिए अग्रसर आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) ने रविवार को वसई रोड स्थित तेरापंथ भवन (Terapanth Bhawan) से प्रस्थान किया। वे लगभग बारह किलोमीटर का विहार कर नायगांव ईस्ट स्थित लोढ़ा धाम (Lodha Dham) पहुँचे तो उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनका भावभीना अभिनंदन किया। श्वेताम्बर जैन मंदिर परिसर में तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता का आगमन श्रद्धालुओं को हर्षविभोर बना रहा था। बुलंद जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान हो उठा।
मंदिर परिसर में ही आयोजित कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण ने कहा कि सृष्टि में दो ही तत्त्व हैं-जीव और अजीव। आत्मा अविनाशी है, इसका अस्तित्व तीनों कालों में विद्यमान रहने वाला है तो शरीर विनाशी है। आत्मा और शरीर का संयोग ही जीवन है। इस जीवन को चलाने के लिए आदमी को पदार्थों को ग्रहण करना होता है। शरीर को टिकाए रखने के लिए भोजन की आवश्यकता होती है। भोजन से भी आवश्यक पानी होता है। इसलिए कहा गया है कि इस पृथ्वी पर तीन रत्न हैं- पानी, अन्न और सुभाषित। शरीर को चलाने के लिए पानी और अन्न से भी ज्यादा महत्त्वपूर्ण है-हवा। भोजन और पानी के बिना तो फिर भी कुछ समय तक जीवित रह सकता है, किन्तु हवा अर्थात् प्राणवायु न मिले तो जीव क्षण मात्र भी जीवित नहीं रह सकता। जीवन के लिए हवा, पानी और भोजन की आवश्यकता होती है, किन्तु कई लोग नशीले पदार्थों का भीसेवन करने लगते हैं। आदमी अपने परिवार की प्रेक्षा करे कि कोई सदस्य नशीले पदार्थों का सेवन तो नहीं कर रहा है। स्वयं भी नशीले पदार्थों के सेवन से बचते हुए परिवार को सदस्य भी नशीले पदार्थों से बचे रहें, इसका प्रयास करना चाहिए। आदमी को आध्यात्मिक रूप में अपने प्रभु के आराधन का नशा हो, सामायिक, गुरुदर्शन आदि का नशा हो तो जीवन का कल्याण हो सकता है।
प्रवचन के उपरान्त सम्बोधि उपवन में कालधर्म हुए मुनि अजयप्रकाश की स्मृतिसभा का आयोजन हुआ। आचार्य महाश्रमण ने उनके जीवन परिचय देते हुए उनकी आत्मा के लिए मंगलकामना की। साध्वीप्रमुखा, मुख्यमुनि, मुनि अजयप्रकाश की संसारपक्षीया पुत्री साध्वी तन्मयप्रभा, मुनि राजकुमार, मुनि अक्षयप्रकाश, मुनि अनेकांतकुमार व मुनि अजयप्रकाश की संसारपक्षीया बहन संगीता बोथरा ने श्रद्धांजलि अर्पित की।


Editorial

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