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रेलयात्रा 8 : अमेरिका का धान का कटोरा है - मिड वेस्ट
By EditorialPublished on
न्यूयार्क लास एंजलेस के बाद शिकागो अमेरिका का तीसरा सबसे बढ़ा शहर है। शिकागो का भारत से बहुत पुराना आध्यात्मिक सम्बन्ध है। सन 1893 में शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया था जिसे स्वामी विवेकानन्द ने सम्बोधित किया था। स्वामी भारत से चीन हेतु रवाना हुए थे। केन्टर चीन का बहुत मशहूर शहर था, आजकल इसे गोन् नाम से जाना जाता है, यहां उन्हें कई संस्कृत व बंगाली पाण्डुलिपियां देखने को मिली। वे बौद्ध विहारों में भी गये। इसके बाद वे जापान गये सबसे पहले नागासागी गये, जहां 52 वर्ष पश्चात परमाणु बम से हमला

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रेलयात्रा : न्यूयार्क लास एंजलेस के बाद शिकागो अमेरिका का तीसरा सबसे बढ़ा शहर है। शिकागो का भारत से बहुत पुराना आध्यात्मिक सम्बन्ध है। सन 1893 में शिकागो में प्रथम विश्व धर्म संसद का आयोजन किया गया था जिसे स्वामी विवेकानन्द ने सम्बोधित किया था। स्वामी भारत से चीन हेतु रवाना हुए थे। केन्टर चीन का बहुत मशहूर शहर था, आजकल इसे गोन् नाम से जाना जाता है, यहां उन्हें कई संस्कृत व बंगाली पाण्डुलिपियां देखने को मिली। वे बौद्ध विहारों में भी गये। इसके बाद वे जापान गये सबसे पहले नागासागी गये, जहां 52 वर्ष पश्चात परमाणु बम से हमला होने वाला था। ये टोक्यो सहित कई शहरों में गये और योकामा से कनाडा जाने वाले जहाज में सवार हो गये।
जहाज पर स्वामीजी की मुलाकात जमशेद जी टाटा से हो गई जो शिकागो जा रहे थे। टाटा ने चीन से अफीम का धन्धा कर बहुत धन कमाया था व भारत की पहली कपड़ा मिल खोली थी। वे व्यापार की नई योजनाएं जानने शिकागो जा रहे थे। स्वामी जी ने टाटा को भारत में शैक्षिक संस्थाएं खोलने को प्रेरित किया। उन्होंने भारत में स्टील की फैक्ट्री खोलने पर भी विचार किया। जहाज से वे बेनकूवर में उतरे, वहां से ट्रेन द्वारा शिकागो पहुँचे।
शिकागो में धर्म संसद में भाग लेने हेतु अधिकृत मान्यता आवश्यक थी जो स्वामी जी के पास नहीं थी। स्वामी जी निराश हो गए मगर उन्होंने आशा नहीं छोड़ी। संसद शुरू होने में अभी समय था। शिकागो से वे बोस्टन आ गये जो अपेक्षाकृत सस्ता था। यहां उनकी भेंट हारवर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जोन हेनरी राईट से हुई। प्रोफेसर राईट ने स्वामी विवेकानन्द को हारवर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण देने के लिये आमन्त्रित किया। स्वामी जी की जानकारी, बुद्धिमत्ता और प्रवीणता से राईट बहुत प्रभावित हुए, उन्होंने स्वामीजी से आग्रह किया कि वे विश्व धर्म संसद में हिन्दुत्व का प्रतिनिधित्व करें। जब राईट को पता चला कि स्वामी जी के पास मान्यता नहीं है तो उन्होंने कहा आपसे मान्यता मांगना सूर्य से चमकने का अधिकार मांगने जैसा है। अन्ततः स्वामीजी ने संसद को सम्बोधित किया और इतिहास बन गया। शिकागो शहर के डाउन टाउन इलाके में उनके नाम पर स्वामी विवेकानन्द वे आज भी है।
हम सब यात्री अपना अपना सामान लेकर उसके पीछे चलने लगे। हम उसी गलियारे में पहुँचे जिसके एक तरफ रेल्वे ट्रेक्स थे और दूसरी तरफ शो रूम, कमरे वगैराह । ये ट्रेक्स ही प्लेटफार्म थे। हर ट्रेक पर नम्बर लगे हुए थे और शीशे के दरवाजे से बन्द थे। हमें एक कमरा खोल कर उसमें बिठा दिया गया। यहां दो तरफ कुर्सियां लगी हुई थी, बीच में रास्ता था। हमें एक तरफ की कुर्सियों पर बिठाया गया। इस कमरे के एकदम पीछे एक बड़ा कमरा था, जिसमें कई यात्री प्रतीक्षारत थे, वे भी हमारी ही ट्रेन से यात्रा करने वाले थे मगर इन्हें हमसे बाद में ट्रेन में चढ़ने का अवसर मिलने वाला था। मैं अगर लाउन्ज का टिकिट नहीं लेता तो मैं भी इन्हीं के साथ होता।
हमारे साथ आये व्यक्ति ने इस कमरे का दरवाजा खोल कर तमाम वृद्ध यात्रियों को हमारे कमरे में स्थित सामने वाली कुर्सियों पर बिठा दिया। शीघ्र ही हमारी ट्रेन में बोर्डिंग की घोषणा हो गई। ट्रेक एकदम हमारे सामने ही था। सबसे पहले हमें कतार बना कर ट्रेक के दरवाजे के सामने खड़ा कर दिया गया, हमारे बाद वृद्ध जनों को और उनके बाद पीछे वाले कमरे के यात्रियों को। ट्रेन में सीट नम्ब नहीं थे इसलिये सबसे आगे वालों को अच्छी सीटें मिल जाती थी।
दरवाजा खुला और एक एक करके हमें प्लेटफार्म में प्रवेश दिया के डिब्बे स्लीपर कोच के थे, इनके यात्रियों को हमसे पहले प्रवेश दिया जा चुका था। इनके बाद आने वाले सबसे पहले डिब्बे के बाहर एक कन्डक्टर खड़ा था। उसने हमारा टिकिट देखा और सीट नम्बर दे दिये। शुरू शुरू में सबको वाली सीटें ही मिल रही थी। मुझे भी खिड़की वाली सीट मिली तो जी खुश हो गया जब सब खिड़की वाली सीटें भरा गई तो फिर बाकी की सीटें दी गई। मेरे साथ वाली सीट पर अत्यन्त वृद्ध व्यक्ति आकर बैठ गया, इसकी शकल बहुत डरावनी थी, पहले यह मेरे सामने वाली सीट की बाजू में बैठने लगा, यहां पर एक युवती बैठी थी. उसने इस वृद्ध को देखते ही मुँह बनाया, मगर वृद्ध ने सीट न. चेक किया तो फिर मेरे पास आकर बैठ गया। युवती ने राहत की सांस ली।
यह ट्रेन पहले वाली ट्रेन से बेहतर नजर आ रही थी। सीटें भी बेहतर थी, जगह भी ज्यादा थी, अगले तीन दिन इसी ट्रेन में इसी सीट पर गुजारने थे। इस ट्रेन में भी वाई-फाई सुविधा का वादा किया गया था मगर इसमें भी वही हाल था, दई फाई था मगर आता-जाता था। यह बड़ी आश्चर्य की बात थी कि इतनी आधुनिकता व उपलब्धियों के बावजूद रेल गाड़ियों को महज पहाड़ों और निर्जन स्थलों के नाम पर सिग्नलों से वंचित रखा हुआ था। आकाश में इतनी ऊंचाई पर भी विमानों के अन्दर निर्बाध वाई-फाई सेवाएं थीं मगर यहां नहीं।
मैं जब भारत से आया था तब मुम्बई से दुबई व दुबई से न्यूयार्क के बीच उड़ते हुए वाई फाई की सेवाओं का भरपूर उपयोग किया था। सिर्फ एक डालर में पासवर्ड मिल गया था। ट्रेन की तो इतनी लम्बी यात्राएं होती हैं फिर भी इनमें सिग्नलों का अभाव रेल सेवाओं के प्रति उदासीनता का ही द्योतक था।
मेरे पास वाला वृद्ध शीघ्र ही खरर्टि भरने लगा। सामने की सीट पर बैठी युवती यह देख हंस पड़ी और कहने लगी जब यह मेरे पास वाली सीट पर बैठने लगा तो मेरे तो प्राण ही सूख गये थे, आपको बुरा तो नहीं लगा, मैंने भी हंस कर कह दिया कि मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं भी थोड़ी देर बाद इससे भी जोर से खर्राटे लूंगा तब तुम्हें पता चलेगा। इस बीच उसके पास वाली सीट पर भी एक चीनी महिला आ गई।
थोड़ी ही देर में ट्रेन चल पड़ी तो तसल्ली आ गई कि अब तो इससे लोस एंजलेस जाकर ही उतरना है जहां मेरा भानजा मुनीश मुझे लेने आ जायगा। शिकागो, उत्तरी अमेरिका की पांच महान झीलों में से एक मिशीगन झील के दक्षिणी छोर पर अवस्थित है। ज्यू ज्यू महानगर पीछे छूटता जा रहा था प्राकृतिक सौन्दर्य से ओत प्रोत नदी, नाले, हरे भरे विशाल मैदान रेल के दोनों तरफ आते हुए मन मोह रहे थे।
अब हम अमेरिका के केन्द्रीय क्षेत्र में प्रवेश कर रहे थे जिसे मिड वेस्ट कहा जाता है। यह क्षेत्र अमेरिका के धान का कटोरा है। खेती ही यहां का प्रमुख व्यवसाय है। खेती के कारण पर्याप्त संख्या में उद्योग भी पनप गए हैं जिससे यह व्यापार का केन्द्र भी बन गया है। खेती अधिकांशतः मक्की की ही होती है जिसे यहां कोर्न कहते इसलिये इस इलाके को अमेरिका का कोर्न बेल्ट भी कहा जाता है। मक्की का तो मेवाड़ से अटूट नाता है। यह कहावत तो प्रसिद्ध है ही मक्की छोड़ न कई नी खाणो, मेवाड़ छोड़ न कोई नी जाणो मक्की के विशाल खेत देखकर बरबस ही मेवाड़ की याद आ जाती थी। आम मेवाड़ी की तरह मक्की के तमाम व्यंजन मुझे भी बहुत पसन्द हैं। सर्दियों में आये दिन घाट, मक्की की रोटी, ढोकले, बाटी, गेरीया खाने को मिल ही जाते हैं।
विश्व की चौथी सबसे लम्बी नदी मिसीसिपी मिड वेस्ट क्षेत्र के उत्तर से दक्षिण में बहती हुई मेक्सिको की खाड़ी में समाती है। यह अमेरिका की सबसे लम्बी नदी है। विश्व की अमेजन, नील और यंगटीसी नदियां ही इससे बड़ी हैं। मिड वेस्ट न केवल अमेरिका वरन समूचे विश्व का सबसे सघन कृषि क्षेत्र है। मक्की के साथ साथ यहां सोयाबीन भी प्रचुरता से बोया जाता है। गेहूं की खेती नगण्य सी है।
ज्यू ज्यूं ट्रेन आगे बढ़ती जा रही थी कभी खत्म नहीं होने वाले खेतों का सिलसिला जारी था। हमारा देश भी कृषि प्रधान देश है, मगर इस वास्तविकता के बावजूद हमारे देश के आधुनिक संस्थापकों ने इस तरफ ध्यान देने की बजाय भारी उद्योगों को स्थापित करने में सारा जोर लगाया। हमारी कृषि पूरी तरह मानसून पर आधारित है और मानसून का कोई भरोसा नहीं खराब मानसून के कारण देश को सूखा दर सूखा भुगतना पड़ा। यदि देश के कर्णधार, आजादी मिलते ही अपना सारा ध्यान कृषि की तरफ लगाते और मानसून के विकल्प के रूप में देश भर के खेतों को सिंचाई की नहरों, नालीयों से पाट देते तो स्थिति कुछ ओर होती। आज भी नदियों को एक करने की बातें तो बहुत होती हैं मगर उसे अमली जामा पहनाने की कोशिश नहीं। समस्या यह है कि योजना तनिक भी दुर्गम हो नहीं कि वह ठंडे बस्ते में चली जाती है।

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