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नालासोपारा ज्योतिचरण के आगमन से हुआ आलोकित
By EditorialPublished on
तेरापंथ धर्मसंघ के अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्य महाश्रमण का मुम्बई महानगर के उपनगर नालासोपारा में आगमन हुआ तो क्षेत्र में निवासित जनता महासंत के दर्शन को उमड़ पड़ी। शुक्रवार प्रातः विरार से आचार्य महाश्रमण ने मंगल प्रस्थान किया। मायानगरी में अध्यात्म की गंगा प्रवाहित कर जन-जन के मानस को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के लिए पदयात्रा करते हुए महासंत को देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं था। अपने आराध्य की मार्ग सेवा में संलग्न श्रद्धालु भी उनके चरणों का अनुगमन कर रहे थे। वे आशीर्वाद प्रदान करते हुए गंतव्य की ओर गत

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मुंबई । तेरापंथ धर्मसंघ के अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्य महाश्रमण का मुम्बई महानगर के उपनगर नालासोपारा में आगमन हुआ तो क्षेत्र में निवासित जनता महासंत के दर्शन को उमड़ पड़ी। शुक्रवार प्रातः विरार से आचार्य महाश्रमण ने मंगल प्रस्थान किया। मायानगरी में अध्यात्म की गंगा प्रवाहित कर जन-जन के मानस को आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के लिए पदयात्रा करते हुए महासंत को देखना किसी आश्चर्य से कम नहीं था। अपने आराध्य की मार्ग सेवा में संलग्न श्रद्धालु भी उनके चरणों का अनुगमन कर रहे थे। वे आशीर्वाद प्रदान करते हुए गंतव्य की ओर गतिमान थे। नालासोपारावासी उनके अभिनंदन में पलक पांवड़े बिछाए खड़े थे। स्वागत जुलूस के साथ आचार्य महाश्रमण नालासोपारा स्थित डिवाइन प्रोविडेंस हाईस्कूल पहुँचे।
मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में आचार्य महाश्रमण ने अपनी कहा कि मानव जीवन में शिक्षा का परम महत्त्व है। शिक्षा साधु समुदाय में भी महत्त्वपूर्ण है तथा गृहस्थों के जीवन में भी शिक्षा का महत्त्व है। कितने विद्यार्थी शिक्षा प्राप्ति के लिए अपने परिवार, माता-पिता से दूर रहते हैं, कई विदेश चले जाते हैं। सभी शिक्षा प्राप्ति का प्रयास करते हैं। साधु संस्था में भी शास्त्रों का अध्ययन, भाषा का अध्ययन आदि का प्रयास होता है। कई संत भी दसवीं, बारहवीं, बी.ए., एम.ए, पी.एच.डी. आदि करते हैं। पूर्व में भी चौदह पूर्वों के ज्ञान के बात बताई गई है। अनेक-अनेक धर्मग्रन्थ हैं, उनके अध्ययन से ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है। हमारे यहां 32 आगम प्रमाण के रूप में हैं।
ज्ञान की प्राप्ति में पांच बाधक तत्त्व हैं। इनमें पहला तत्त्व है-अहंकार। ज्ञान प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग करना होता है। आकर्षण, नम्रता, सम्मान का भाव और ज्ञानप्रदाता के प्रति भी विनय, नम्रता और श्रद्धा का भाव होता है तो ज्ञान प्राप्ति हो सकती है। बुद्धि के प्रति भी सम्मान का भाव हो तो बुद्धि आ सकती है। ज्ञान प्राप्ति का दूसरा बाधक तत्त्व है-क्रोध। गुस्से का भाव है तो भी शिक्षा की प्राप्ति संभव नहीं हो सकती। तीसरा बाधक तत्त्व है-प्रमाद। पढ़ाई के समय खेल में लग जाना, बात में लग जाना आदि प्रमाद में समय लगे तो शिक्षा की प्राप्ति कैसे संभव हो सकती है। ज्ञान प्राप्ति का चौथा बाधक तत्त्व है-बीमारी। शरीर और मन में बीमारी हो जाए तो ज्ञान प्राप्ति संभव नहीं है। पांचवा बाधक तत्त्व है-आलस्य। ज्ञान प्राप्ति के लिए आदमी को आलस्य का त्याग करने का प्रयास करना चाहिए। इन पांचों तत्त्वों से बचने वाला आदमी अच्छा ज्ञान प्राप्त कर सकता है। ज्ञान अच्छा हो तो उसके साथ-साथ आचरण भी अच्छा हो, संस्कार अच्छे हों, नैतिकता के प्रति रुझान हो तो जीवन सुन्दर बन सकता है। आचार्य तुलसी ने अणुव्रत आन्दोलन की बात बताई। छोटे-छोटे अच्छे संकल्पों को अपने जीवन में स्वीकार कर लिया जाए तो जीवन अच्छा बन सकता है। शिक्षा संस्थानों में शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को अच्छे संस्कार भी देने का प्रयास हो। साधुओं की संगति, साहित्य की संगति और सज्जनों की अच्छी संगति हो तो जीवन अच्छा बन सकता है। आदमी को अपने जीवन में ज्ञान और आचार दोनों के विकास का प्रयास करना चाहिए।
आचार्य महाश्रमण ने नालासोपारावासियों से कहा कि आचार्य महाप्रज्ञ करीब बीस वर्ष पूर्व यहां पधारे थे। दो दशक बाद यहां आना हुआ है। यहां के लोगों में खूब अच्छी धार्मिक जागरण बनी रहे। खूब अच्छा विकास होता रहे। साध्वीप्रमुखा ने भी लोगों को उद्बोधित किया। स्वागत में स्थानीय तेरापंथी सभा के अध्यक्ष लक्ष्मीलाल मेहता, मंत्री पारस बाफना, प्रवास व्यवस्था समिति के सीपी धाकड, अनिल परमार, युवक परिषद अध्यक्ष किशन कोठारी, मंत्री दिनेश धाकड, पूर्व उपमहापौर उमेश नाईक, प्रवीण वीरा (जैन संघ प्रमुख) इसाई समाज से फादर माइकल, स्थानकवासी समाज के नरेन्द्र लोढ़ा, बाह्मण समाज के प्रतिनिधि बाबू सिंह राजपुरोहित ने आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी।
स्वागत अध्यक्ष रमेश फतेहलाल हिरण परिवार के जितेश हिरण ने मांगलिक के प्रभाव की घटना सुना कर गुरुदेव की आध्यात्मिक शक्ति पर प्रकाश डाला। महिला मण्डल ने स्वागत गीत का संगान किया। कन्या मण्डल व ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
- भिक्षु भक्ति संध्या में झूमे
आचार्य महाश्रमण के प्रवचन के बाद शाम को भिक्षु भक्ति संध्या का आयोजन रखा गया। गायक निलेश बाफना ने गुरु भक्ति से जुडे भजनों को गाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। भक्ति संध्या में मुंबई के विभिन्न उपनगरों से बडी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही।
- दो किलोमीटर लंबी थी रैली
आचार्यश्री के स्वागत के लिए नालासोपारा ईस्ट और वेस्ट की मुख्य सड़कों को दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस दौरान नालासोपारा में सर्व समाज की उपस्थिति के कारण हजारों की संख्या में लोग पहुंच गए जिसके चलते रैली का स्वरूप 2 किलोमीटर लंबा हो गया।
- विभिन्न धर्म गुरु और समाजों के लोग हुए सम्मिलित
महाराष्ट्र प्रवास के बाद यह पहला मौका रहा जब आचार्य महाश्रमण की धवल सेना का स्वागत करने के लिए मुस्लिम समाज सिख समाज क्रिश्चियन समाज मराठी कोली समाज जैसे तकरीबन 15 विभिन्न समुदायों के धर्मगुरुओं ने आगे आकर आचार्यश्री का अभिनंदन किया। धर्मगुरुओं ने अणुव्रत यात्रा की रैली के दौरान मेवाड़ स्थानकवासी समाज नालासोपारा के तमाम पदाधिकारी भी सक्रिय रहे। उन्होंने व्यवस्था में भी पूर्ण रूप से सहयोग किया।
- इनका रहा सहयोग
1 दिन से प्रवास को कामयाब बनाने में तेरापंथ समाज नालासोपारा की विभिन्न संस्थाओं का विशेष सहयोग रहा जिसमें आयोजन के सहयोगी स्वागाध्यक्ष रमेशकुमार हिरण परिवार चातुर्मास बस प्रायोजक व भिक्षु भक्ति संध्या प्रायोजक व सभा संरक्षक मिश्रीमल चोरडिया परिवार व पुष्पा देवी हस्तीमल सोलंकी परिवार सहित आचार्य महाश्रमण प्रवास व्यवस्था समिति सभा से संयोजक चंद्रप्रकाश धाकड़, सह-संयोजक अनिल परमार, तेयुप संयोजक जितेश हिरण तेरापंथ सभा अध्यक्ष लक्ष्मीलाल मेहता, मंत्री पारस बापना, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सोलंकी, तेयुप अध्यक्ष किशन कोठारी, मंत्री दिनेश धाकड़, कोषाध्यक्ष मनोज सोलंकी, महिला मंडल संयोजिका वनिता सोलंकी, सह संयोजिका वर्षा धाकड़, ज्योति हिरण, कोषाध्यक्ष मीना सोलंकी, किशोर मंडल संयोजक विदित ढालावत, सह संयोजक यश सोलंकी, कन्या मंडल संयोजिका आँचल ढालावत सह संयोजिका खुशी सोलंकी, स्नेहा छाजेड़ सहित नालासोपारा के पूरे तेरापंथ समाज की उपस्थिति व सहयोग रहा। यह जानकारी मोहन कुमठ व कमलेश बोराणा ने दी।

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