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विरार को आध्यात्मिकता से भावित करने पहुंचे आचार्य महाश्रमण
By EditorialPublished on
गुरुवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ विरार की सीमा में प्रविष्ट हुए तो उनके अभिनंदन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। स्वागत के बाद जुलूस के साथ वे ओल्ड विवा कॉलेज में पहुंचे। यहाँ अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मानव जीवन अपने आप में पूंजी होती है।
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मुंबई : गुरुवार को आचार्य महाश्रमण (Acharya Mahashraman) अपनी धवल सेना के साथ विरार की सीमा में प्रविष्ट हुए तो उनके अभिनंदन में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। स्वागत के बाद जुलूस के साथ वे ओल्ड विवा कॉलेज में पहुंचे। यहाँ अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि मानव जीवन अपने आप में पूंजी होती है। इस पूंजी को कुछ मनुष्य पाप, हिंसा, अनाचार आदि में लगाकर नष्ट कर देते हैं और नरक गति को प्राप्त करते हैं। कुछ मनुष्य न तो ज्यादा पाप करते हैं और न ही ज्यादा पुण्य करते हैं, सामान्य रूप से जीवन जीते हैं वो मरने के उपरान्त मनुष्य गति में जन्म लेते हैं और जो मनुष्य अपने मानव जीवन रूपी पूंजी को धर्माचरण, सेवा, स्वाध्याय, साधना कर पूंजी को बढ़ाता है, वह इस जन्म के बाद उत्तम गति में जा सकता है, अथवा कर्म निर्जरा कर मोक्ष की दिशा में भी आगे बढ़ सकता है और कभी मोक्षश्री (Mokshashri) का वरण भी कर सकता है। आदमी को अपने जीवन में धर्माचरण करने का प्रयास करना चाहिए। साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा ने जनमानस को उत्प्रेरित किया।
गुरुदेव के स्वागत में स्कूली बच्चों के साथ एक रैली निकाली गई। जिला परिषद नेहरू हिंदी विद्यालय के लगभग 75 छात्र रैली में मौजूद रहे। स्थानीय तेरापंथ समाज, महिला मण्डल, कन्या मण्डल व किशोर मण्डल द्वारा स्वागत गीतों का संगान किया गया। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने भावपूर्ण प्रस्तुति दी।
इस अवसर पर तेरापंथ सभा विरार के अध्यक्ष रमेश हिंगड़ (President Ramesh Hingad) ने कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि गुरुदेव पूर्व काल में विरार में तेरापंथ समाज के कुछ घर ही थे, लेकिन आज 160 घरों का विशाल परिवार यहां है। जो गुरुदेव द्वारा प्रदत सामाजिक व आध्यात्मिक दिशानिर्देशों को आगे बढ़ाकर मनुष्य जीवन को सफल करने में जुटा हुआ है। 2003 में जब युवाचार्य के रूप में आचार्यश्री का आगमन हुआ था, उस समय की स्मृति ताजा करते हुए हिंगड़ ने कहा कि आप के सानिध्य में ही तेरापंथ भवन के लोकार्पण हुआ था और आज 20 वर्ष बाद पुनः आपका स्वागत करते हुए पूरा तेरापंथ समाज आपके चरणों में नतमस्तक है। सभा मंत्री व समारोह स्वागताघ्यक्ष अजयराज फुलफगर ने कहा कि मनुष्य को अपने पाप धोने के लिए गंगा किनारे जाना पड़ता है लेकिन गुरु के चरणों में जन्म जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।
इस अवसर पर विधायक हितेंद्र ठाकुर, पंकज ठाकुर, जीतू शाह, यज्ञेश्वर पाटिल, संजय पींगुलकर सहित स्थानकवासी समाज, मूर्ति पूजक समाज, लगभग 20 संघों के पदाधिकारी, ज्वेलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी, विवा के पदाधिकारी उपस्थित रहे। विधायक हितेंद्र ठाकुर व युवक परिषद् अध्यक्ष हेमंत धाकड़ ने भी विचार रखे। कार्यक्रम सफल बनाने सभा कोषाध्यक्ष विनोद कोठारी, उपाध्यक्ष राकेश परमार, रमेश झोठा, राजेश सोलंकी, पूनमचंद हिरण, लक्ष्मीलाल डांगी, गणेशलाल सोलंकी, भंवरलाल परमार,सागर हिंगड़, विनोद हिंगड, सुखलाल चौहान, भगवतीलाल सोलंकी, जीवराज सांखला, नरेश बोहरा, विशाल बैंगानी, तेजराज हिरण, महिला मंडल संयोजिका हेमा सिंघवी, सहसंयोजिका लीना सोलंकी, साधना फुलफगर, कोषाध्यक्ष चंदा चौहान किरण हिंगड, श्रेया हिरण, ममता धाकड़, कविता धाकड़, रचना नाहटा, पूर्णिमा लोढ़ा,मंजू सोलंकी, चेतना धाकड़, पूजा धाकड़, वैशाली राठोड़, संगीता राठोड़, युवक परिषद अध्यक्ष हेमंत धाकड़, मंत्री विजय धाकड़, कोषाध्यक्ष संतोष हिरण, अशोक धाकड़, भगवतीलाल सिंघवी भावेश दुग्गड, चेतन चोरडीया, दीपक हिंगड़, दिनेश सिंघवी प्रवीण धोका, हितेश हिंगड़ नितिन हिंगड़ मनीष बाफना सचिन चौरडिया नरेंद्र नाहटा राजा हिरण विवेक सांखला संजय धाकड़ अंकित डांगी अणुव्रत क्षेत्रीय सहसंयोजक मनोज हिंगड़, ज्ञानशाला संयोजिका मयुरी सोलंकी, किशोर मंडल से दर्शन सोलंकी एवं टीम कन्या मंडल से निकिता चौहान एवं टीम व तेरापंथ समाज विरार के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।

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