Pratahkal - Mumbai News Update - Devendra Fadnavis, Eknath Shinde &  Vinayak Raut
मुंबई : 2019 में हुए विधानसभा चुनावों (Assembly elections) के बाद से ही महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी हलचल लगातार जारी है। शिवसेना (UBT) के नेता विनायक राउत कह रहे हैं कि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (CM Eknath Shinde) के साथ गए विधायक आज असंतुष्ट हैं, तो वहीं उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) पलटवार कर रहे हैं कि पूरा उद्धव गुट ही असंतुष्ट है। वहीं, राम कदम जैसे बीजेपी प्रवक्ता का कहना है कि उद्धव गुट के नेता दिन में मुंगेरीलाल के सपने देख रहे हैं। कुल मिलाकर 2019 में शुरू हुआ सियासी वार-पलटवार का दौर बदस्तूर चल ही रहा है।
‘शिंदे गुट के कई विधायक असंतुष्ट हैं’
शिवसेना (UBT) के सांसद विनायक राउत (Vinayak Raut) ने कहा, 'शिंदे गुट के कई विधायक असंतुष्ट हैं। उनका भ्रम दूर हो गया है। 50 करोड़ मिलने की बात मान ली, करोड़ों रूपये का काम देने की बात कबूली, कई लोगों को टोकन मिला लेकिन कई को अब तक नहीं मिला। सिर्फ 4-5 मंत्री ही फायदा उठा रहे हैं, बाकी सब खाली बैठे हैं। सभी को लग रहा कि हमें फंसा कर रखा है, इसलिए अब वे बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ रहे। इनके असंतोष की शुरुआत गजानन कीर्तिकर ने कर दी है, इसमें और विधायक भी हैं। सही समय पर एक-एक नाम का खुलासा करेंगे।’
‘कुछ दिनों में आपको सच दिख जाएगा’
विनायक राउत ने यह भी कहा कि करीब 22 विधायक और 9 सांसद उद्धव ठाकरे और हमारे संपर्क में हैं। राउत के इस बयान पर प्रतिक्रिया देने में बीजेपी ने भी देर नहीं लगाई, और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस एवं पार्टी प्रवक्ता राम कदम ने इस पर जोरदार पलटवार किया। फडणवीस ने कहा, ‘पूरा उद्धव गुट ही असंतुष्ट है। जितना उनमें असंतुष्टि है, उतनी कहीं नहीं। आनेवाले कुछ दिनों में आपको सच दिख जाएगा।’
‘...और यह कुंभकर्ण की नींद सोते रहे’
इस बीच बीजेपी प्रवक्ता राम कदम ने कहा, 'उद्धव गुट के नेता मुंगेरीलाल के सपने देख रहे हैं। लगभग 90 फीसदी पार्टी उनको छोड़कर जा चुकी है, लेकिन पिछले 3 साल से वह लगातार बेबुनियाद भविष्यवाणी कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि इनकी आंखों के सामने 50 से ज्यादा मंत्री, विधायक, सांसद पार्टी छोड़ कर चले जाते हैं और यह कुंभकर्ण की नींद सोते रहते हैं। आज तो उनके ग्रुप के कई नेता शिंदे को जॉइन करना चाहते हैं और बाकी बीजेपी में आना चाहते हैं।'
Editorial

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