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नई दिल्ली : देश की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर मार्च 2023 को खत्म हुई तिमाही में 6.1 फीसदी रही। पिछले वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में यह आंकड़ा चार फीसदी था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, चौथी तिमाही में देश की जीडीपी 6.1 फीसदी दर्ज की। बीते वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी वृद्धि दर 7.2 प्रतिशत रही, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह 9.1 फीसदी रही थी।
इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष (Indian economy financial year) 2023 में 7 प्रतिशत की वृद्धि दर को पार कर लेगी। हालांकि, भारतीय स्टेट बैंक की बीते शुक्रवार को जारी शोध रिपोर्ट इकोरैप में कहा गया था कि वित्त वर्ष 2022-23 की चौथी तिमाही में भारत की वृद्धि दर 5.5 प्रतिशत रहने की संभावना है, लेकिन सरकार के आंकड़ों में यह 6 फीसदी से भी ज्यादा रही।
बीते वित्त वर्ष में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा बीते वित्त वर्ष 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6.4 प्रतिशत रहा। वित्त मंत्रालय के संशोधित अनुमान में भी राजकोषीय घाटा इतना ही रहने का लक्ष्य रखा गया था। लेखा महानियंत्रक (सीजीए) ने केंद्र सरकार के 2022-23 के राजस्व व्यय का आंकड़ा जारी करते हुए बुधवार को बताया कि मूल्य के हिसाब से राजकोषीय घाटा 17,33,131 करोड़ रूपये (अस्थायी) रहा है। सरकार अपने राजकोषीय घाटे को पाटने के लिए बाजार से कर्ज लेती है।
Editorial

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