Sharad Pawar
मुंबई : मराठी में एक कहावत है- जसं दिसतं, तसं नसतं । यानी जैसा दिखाई देता है, वैसा होता नहीं है। उर्दू में कह सकते हैं- पल में तोला, पल में माशा। यानी कल कुछ और, आज कुछ और। संस्कृत में कह लीजिए - क्षणे रुष्टाः क्षणे तुष्टाः रुष्टे तुष्टे क्षणे क्षणे। यानी कल रुठ जाएंगे, आज मान जाएंगे। फिर पल में रुठेंगे, पल में मानेंगे। तो क्या शरद पवार और अजित पवार में ऐसा ही खेल बार-बार चल रहा है क्या ?
शरद पवार (Sharad Pawar) ने इस्तीफा दिया तो क्यों वापस लिया तो क्यों ? कंफ्यूजन ही कंफ्यूजन हैं, सोल्यूशन का कुछ पता नहीं। सोल्यूशन जो मिला, तो क्वेश्चन क्या था पता नहीं। शरद पवार ने मंगलवार को इस्तीफा दिया और शुक्रवार को वापस ले लिया। पहले कहा उम्र हो गई, इसलिए इस्तीफा दे रहा हूं। वापस लिया तो कहा, कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं की कद्र करते हुए वापस ले रहा हूं। असलियत में इस्तीफा देकर भी राजनीतिक रूप से सक्रिय थे। देश की राजनीति
(Politics)
पर ट्वीट कर रहे थे। फिर इतना स्वांग क्यों रचाया? तो कुछ जानकारों ने कहा राज्य और देश को पवार ने पॉवर (Power) दिखाया।
अजित पवार की वाकई कोई चूक थी ?
शरद पवार को अपना पॉवर दिखाने की क्या जरूरत थी? क्या एनसीपी में फूट थी ? क्या अजित पवार की वाकई कोई चूक थी ? क्या वे वाकई बीजेपी के संपर्क में थे? इस पर एनसीपी नेता और अजित पवार खुद यह कह चुके हैं कि वे जब तक जिएंगे, एनसीपी में रहेंगे। साथ ही अजित पवार (Ajit Pawar) ने एक और रहस्य से पर्दा गिरा दिया कि दिल्ली जाकर वे और एनसीपी (NCP) के कुछ और वरिष्ठ नेता अमित शाह से मुलाकात कर रहे थे, यह बात पूरी तरह से अफवाह है। अजित पवार ने कल कहा कि जिस दिन उनके दिल्ली
(Delhi)
में होने की बात की जा रही है, उस दिन वे शरद पवार के साथ ही महाराष्ट्र के एक जिले के दौरे पर थे। इसलिए शरद पवार उन पर संदेह करें, इसका सवाल ही नहीं । यानी उनके बीजेपी के संपर्क में होने की बातें झूठी हैं।
शरद पवार ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी कहा और वो भी कहा
इस लिहाज से तो यही समझ में आता है कि चाचा-भतीजा में कोई शंका- आशंका वाली बात ही नहीं थी। फिर शरद पवार ने इस्तीफा वापस लेते वक्त दो तरह के बयान ही नहीं चार तरह के बयान क्यों दिए? पहले उनसे जब पूछा गया कि जब आप इस्तीफा दे रहे थे तब तो अजित पवार बढ़- चढ़ कर आपके साथ दिखाई दे रहे थे। आज आप इस्तीफा ले रहे हैं तो अजित पवार दिखाई नहीं दे रहे हैं? इसके जवाब में शरद पवार ने इतना ही कहा कि अजित पवार के यहां ना होना का अपने कोई मतलब ना निकालें। फिर थोड़ी देर बाद यह भी कह दिया कि पार्टी छोड़ कर जो भी जाना चाहता है, जाए।

Editorial

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