Amit Shah
बेंगलुरू : कर्नाटक में विधानसभा चुनाव (Assembly elections in karnataka) के सिर्फ 3 दिन बचे हैं। ऐसे में राजनीतिक पार्टियों ने प्रचार के लिए पूरा जोर लगा दिया है। रविवार को चुनाव प्रचार के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला है। अमित शाह (Amit Shah) ने कहा कि भाजपा (BJP) ने पीएफआई (PFI) पर प्रतिबंध लगाकर देश की सुरक्षा को मजबूत किया है, लेकिन कांग्रेस पार्टी इसके खिलाफ है। भाजपा राज्य में ना तो मुस्लिम आरक्षण देगी और न ही लिंगायत आरक्षण को कम होने देगी। शाह ने आगे कहा पूरे कर्नाटक (Karnataka) में प्र.म. मोदी के लिए जनसमर्थन दिखाई दे रहा है। इससे तय है कि भाजपा बहुमत की सरकार बना रही है। बजरंगबली अपने मंदिर में ही थे कांग्रेस ही बजरंगबली को चुनाव के मैदान में ले आई है। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस पीएफआई पर बैन को पचा नहीं पा रही है। कांग्रेस को चुनाव से पहले किसानों की याद नहीं आती । अमित शाह ने कहा कांग्रेस 10 हजार करोड़ रूपये किसानों के लिए नहीं माइनॉरिटी के लिए दे रही है।
गृहमंत्री अमित शाह ने आगे कहा हमने धर्म के आधार पर मिलने वाला रिजर्वेशन खत्म किया। लिंगायत और एससी, एसटी को रिजर्वेशन मिला। वहीं कांग्रेस कहती है कि सत्ता में आएंगे तो मुस्लिम रिजर्वेशन 6% कर देंगे । कांग्रेस (Congress) वालों ये बताओ कि किसका रिजर्वेशन काटोगे। किसके हिस्से का रिजर्वेशन दोगे।
वरिष्ठ भाजपा नेता ने कांग्रेस पर कर्नाटक में पानी के मुद्दे पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि महादायी का पानी कांग्रेस कर्नाटक को नहीं देती थी । प्र.म. मोदी की सरकार आने के बाद कर्नाटक को पानी मिलना शुरू हुआ।
अमित शाह ने काग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए आगे कहा कांग्रेस के लिए कर्नाटक की जनता एटीएम है, यहां से खजाना लूटकर वे दिल्ली ले जाना चाहते हैं। राहुल बाबा ने 5 गारंटी दी और यूपी, उत्तराखंड, त्रिपुरा समेत कई राज्यों में हार गए। राहुल बाबा तुम्हारी गारंटी की कोई गारंटी नहीं है। राहुल जनता को गारंटी के नाम पर गुमराह कर रहे हैं। कांग्रेस ना देश की सुरक्षा कर सकती है और ना देश का विकास कर सकती है। उन्होंने आगे कहा कांग्रेस पार्टी ने 70 साल तक राम मंदिर के काम को लटकाया और भटकाया। कांग्रेस कहती थी 370 मत हटाओ, कश्मीर में खून की नदियां बह जाएंगी। 3 साल हो गए 370 खत्म हुए कश्मीर में खून की नदी छोड़ों किसी की कंकर फेंकने की हिम्मत नहीं है।
Editorial

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