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क्यूबेक 4 : भारतीय शहरों में ट्रामों का संचालन जरूरी
By EditorialPublished on
हमारे होटल के सामने से ही लारेन्स नदी बह रही थी, नियाग्रा (Niagara) प्रपात का पानी बहता हुआ यहीं से गुजर रहा था। पानी ऊंची नीची चट्टानों से गिर कर आगे बढ़ रहा था, जिसने जगह जगह झरने का रूप ले लिया था। नदी के किनारे ऊंचे ऊंचे घने पेड़ थे इसलिये ये झरने दिखाई नहीं दे रहे थे। एक जगह से झरने देख सकते थे तो वहाँ जाने का टिकिट था। यह अचरज की ही बात थी कि नियाग्रा प्रपात देखने का कोई टिकिट नहीं था मगर यहां मामूली से झरनों का टिकिट था।
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