Narendra Modi

नई दिल्ली : कर्नाटक (Karnataka) में विधानसभा चुनाव (Assembly elections) से 10 दिन पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सोमवार को अपना घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पार्टी के सत्ता में लौटने पर 'सभी अवैध प्रवासियों' को वापस भेजने का वादा किया है। इस तरह 2021 के असम विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार किसी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय नागरिक पंजी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में समान नागरिक संहिता लागू करने का भी वादा किया है।
कर्नाटक भारतीय जनता पार्टी शासित राज्यों की उस सूची में शामिल हो गया है, जहां की मौजूदा सरकारों ने यूसीसी और एनआरसी को लागू करने की अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता की जोरदार घोषणा की है। घोषणा पत्र जारी करते हुए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता का कार्यान्वयन एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा दी गई सिफारिशों के आधार पर किया जाएगा, जिसका गठन इसी उद्देश्य से किया जाएगा।
पुराना है भाजपा का चुनावी
यह वही चुनावी पैटर्न है, जिसका पालन भाजपा (BJP) ने उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और गुजरात में किया है। उन राज्यों में भाजपा ने यूसीसी को लागू करने के अपने मूल वैचारिक मुद्दे का पालन करने की अपनी मंशा की घोषणा के साथ-साथ अपने चुनाव अभियान को विकास के एजेंडे पर भी फोकस रखा था। इन सभी राज्यों में भाजपा ने जीतकर दोबारा सरकारें बनाई थीं। जीत दर्ज करने के बाद समान नागरिक संहिता कानून पर काम करने के लिए समितियों का गठन भी किया गया है। अप्रैल में, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने घोषणा की कि कानून का अंतिम मसौदा अगले कुछ महीनों में तैयार हो जाएगा।
यूसीसी में क्या प्रावधान
यूसीसी (UCC) का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने, संरक्षण और भूमि और संपत्ति के विभाजन के लिए सामान्य कानूनों को निर्धारित करने के लिए धार्मिक ग्रंथों या परंपराओं के आधार पर कानूनों को बदलना है । यह भाजपा की वैचारिक संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की लंबे समय से लंबित मांग रही है और दशकों से भाजपा के चुनावी घोषणा-पत्र का हिस्सा रही है।
हिन्दू वोटों का ध्रुवीकरण
यूसीसी (UCC) और एनआरसी (NRC) के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराकर भाजपा हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण चाहती है। भाजपा इससे पहले राज्य के स्कूलों में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के अपने अभियान से इस तरह की कोशिश कर चुकी है लेकिन उसका असर पूरे कर्नाटक में नहीं दिख सका। अब हिन्दू मतदाताओं को राज्यभर में चुनावों से ऐन पहले लामबंद करने के लिए ही भाजपा ने यह चुनावी पैटर्न का दांव चला है।
पार्टी के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा (BS Yeddyurappa) भी हिजाब बैन जैसे मुद्दों से खुद को अलग कर चुके थे। ऐसे में कांग्रेस के पक्ष में अल्पसंख्यक वोटों के लामबंद होने की आशंका के बीच भाजपा यूसीसी और एनआरसी के दांव से यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि कोर हिन्दू वोट बैंक उससे निराश न हो।
बता दें कि पिछले साल भाजपा ने धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का संरक्षण अधिनियम 2022 कानून लाकर कर्नाटक में विवाद खड़ा कर दिया था। यह कानून गलतबयानी, जबरदस्ती, लालच, धोखाधड़ी या शादी के वादे के जरिए जबरन धर्मांतरण के दोषी लोगों को जेल भेजने और उन पर आर्थिक जुर्माना लगाने का प्रावधान करता है।
Editorial

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