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शरद पवार के हटते ही लड़खड़ाई एमवीए
By EditorialPublished on
मुंबई । वरिष्ठ राजनेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Congress Party) प्रमुख का पद छोड़ने का फैसला कर लिया है। अब इसके साथ ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले का बड़ा असर महाविकास अघाड़ी पर भी पड़ता नजर आ रहा है।
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मुंबई । वरिष्ठ राजनेता शरद पवार (Sharad Pawar) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (Congress Party) प्रमुख का पद छोड़ने का फैसला कर लिया है। अब इसके साथ ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस फैसले का बड़ा असर महाविकास अघाड़ी पर भी पड़ता नजर आ रहा है। पवार के ऐलान के एक दिन बाद ही कांग्रेस और शिवसेना में खटपट शुरू हो गई है। इधर, उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सेना पवार के इस्तीफे को बड़ा झटका बता रही है। महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ( Nana Patole ) ने राज्यसभा सांसद संजय राउत को कड़े शब्दों में सलाह दी है। पटोले ने राउत से कहा है कि कांग्रेस के काम में दखल न दें। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राउत कांग्रेस के प्रवक्ता नहीं है और इसलिए उन्हें पार्टी के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहिए। कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राकंपा एमवीए का हिस्सा हैं।
दरअसल, राउत ने कह दिया था कि कांग्रेस में भले ही अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) हैं, लेकिन फैसले राहुल गांधी (Rahul Gandhi) लेते हैं। इस पर पटोले ने साफ कर दिया है कि राउत को गांधी परिवार की प्रतिष्ठा को लेकर कोई बयान नहीं देना चाहिए।
राउत ने पवार के इस्तीफे के ऐलान पर कहा, शरद पवार का इस्तीफा देश की राजनीति के लिए बड़ा झटका है। लेकिन अगर ऐसा फैसला उनकी तरफ से लिया गया है, तो निश्चित ही देश और महाराष्ट्र में उथल पुथल हो जाएगी। हम आने वाले दिनों में तय करेंगे कि क्या करना है। हम पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
पवार पर भी कांग्रेस का निशाना
पटोले ने एनसीपी के भाजपा के साथ जाने की स्थिति पर कहा कि कांग्रेस, भाजपा (BJP) के खिलाफ लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि एनसीपी ऐसा करने की गलती नहीं करेगी। इस दौरान पटोले ने एमवीए गठन के समय को भी याद किया और कहा कि गठबंधन के समय पवार ही सोनिया गांधी के पास गए थे न कि सोनिया गांधी उनके पास आईं थीं।
पवार ने निभाई थी बड़ी भूमिका
बीते विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में भाजपा ने अजित पवार (Ajit Pawar) के साथ मिलकर सरकार बना ली थी, लेकिन वह कुछ घंटों में ही गिर गई थी। इसके बाद इन दलों ने मिलकर एमवीए का गठन किया, जिसके मुखिया उद्धव ठाकरे बने थे। कहा जाता है कि उस दौरान एमवीए को बनाने में सीनियर पवार की बड़ी भूमिका रही थी।

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