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झारखंड में भाजपा नेताओं को पास करना होगा खास टेस्ट
By EditorialPublished on
भारतीय जनता पार्टी (BJP) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में अपने सीटिंग सांसदों को टिकट देने से पहले उन्हें परखेगी। वो ये तय करेगी कि उनमें जीत का माद्दा बचा है कि नहीं। इसके लिए भाजपा दो तरह के सर्वे कराएगी। पहला सर्वे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच होगा तो दूसरा सर्वे आम मतदाताओं के बीच कराया जाएगा। दोनों की प्रश्नावली भी अलग-अलग होगी।

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रांची : भारतीय जनता पार्टी (BJP) अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections) में अपने सीटिंग सांसदों को टिकट देने से पहले उन्हें परखेगी। वो ये तय करेगी कि उनमें जीत का माद्दा बचा है कि नहीं। इसके लिए भाजपा दो तरह के सर्वे कराएगी। पहला सर्वे पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच होगा तो दूसरा सर्वे आम मतदाताओं के बीच कराया जाएगा। दोनों की प्रश्नावली भी अलग-अलग होगी। पार्टी कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेगी कि मौजूदा सांसद संगठन के लिए कितने कारगर हैं। उन्होंने जनहित के मुद्दों पर अपने इलाके में कोई आंदोलन किया है या नहीं। क्षेत्र के लोगों से उनके संबंध कैसे हैं। मतदाताओं से सर्वे में यह जानने की कोशिश की जाएगी कि लोग अपने सांसद को दोबारा लोकसभा में भेजना चाहते हैं या नहीं। इस पूरी कवायद का मकसद भाजपा की झारखंड (Jharkhand) की सभी लोकसभा सीटों पर जीत सुनिश्चित कराना है | 2019 के चुनाव में झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में 11 पर भाजपा और एक सीट पर उसकी सहयोगी आजसू पार्टी की जीत हुई थी। बाकी बची 2 सीटों में एक सीट पर कांग्रेस (Congress) की गीता कोड़ा और दूसरी सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के विजय हांसदा जीते थे। भाजपा की कोशिश है कि इस बार सभी सीटें उसके कब्जे में आ जाएं।
अगस्त में शुरू होगा भाजपा का आंतरिक सर्वे
टिकट देने के लिए भाजपा अगस्त में आंतरिक सर्वे करा सकती है। इसमें सर्वे करने वाली एजेंसी या उसके लोगों के बारे में प्रदेश नेतृत्व को कोई जानकारी नहीं दी जाएगी। सर्वे के आधार पर कुछ के टिकट काटे जाएंगे तो कई अधिक उम्र के कारण खुद ही छंट जाएंगे। भाजपा ने यह नियम बना रखा है कि 75 साल या इससे अधिक उम्र वालों को टिकट नहीं दिया जाए। भाजपा को सत्ता विरोधी लहर का भय है। यही वजह है कि पार्टी पहले से ही अपने कील-कांटे दुरूस्त करने में लगी है। अगले ही साल झारखंड में विधानसभा का चुनाव भी है। पिछली बार भाजपा के हाथ से सत्ता जेएमएम के नेतृत्व वाले महागठबंधन के हाथ चली गई थी।
अमित शाह दो बार आ चुके हैं झारखंड दौरे पर
भाजपा की जमीन पुख्ता करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) इस साल अब तक झारखंड का दो बार दौरा कर चुके हैं। उनका आखिरी झारखंड दौरा 4 फरवरी को हुआ था। उन्होंने तब देश के पांचवें नैनो यूरिया कारखाने की नींव रखी थी। दुनिया के पहले नैनो यूरिया कारखाने का उद्घाटन प्र.म. नरेंद्र मोदी ने गुजरात में किया था। अमित शाह फरवरी के दौरे में रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ (Ramakrishna Mission School) के शताब्दी समारोह में शामिल हुए थे। इसके साथ उन्होंने भाजपा की विजय संकल्प रैली में भी शिरकत की थी। शाह ने झारखंड के देवघर में चार कार्यक्रमों में भाग लिया था । इसी साल हुए उससे पहले के दौरे में अमित शाह (Amit Shah) ने सिंहभूम में जनसभा की थी। शाह 6 जनवरी को झारखंड की राजधानी रांची पहुंचे थे। 7 जनवरी को उन्होंने चाईबासा में पार्टी कोर ग्रुप की बैठक और एक सार्वजनिक सभा की थी। झारखंड में अगले साल 2024 में लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा के भी चुनाव होने हैं।
संगठन में भी भाजपा करेगी बड़ा बदलाव भाजपा को हर हाल में झारखंड की सभी लोकसभा सीटों पर जीत सुनिश्चित करने के अलावा विधानसभा में भी जीत हासिल करनी है। साल 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथ से सत्ता खिसक गई थी। विपक्षी दलों ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के नेतृत्व में महागठबंधन बना कर झारखंड की सत्ता बीजेपी से छीन ली थी। यही वजह है कि भाजपा झारखंड पर खास फोकस कर रही है। कहा तो यह भी जाता है कि इस बार लोकसभा के साथ ही झारखंड विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। चुनाव की सरगर्मी बढ़ने से पहले भाजपा झारखंड में अपने संगठन में बड़ा बदलाव करने की भी तैयारी में है।
भाजपा जताएगी आदिवासियों पर भरोसा
भाजपा की सबसे खराब स्थिति 2019 के विधानसभा चुनाव में हुई थी। कुछ ही महीने पहले हुए लोकसभा के चुनाव में भाजपा ने किला फतह कर लिया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसकी गाड़ी अटक गई थी। पांच साल तक बहुमत की सरकार चलाने वाली भाजपा को विधानसभा चुनाव में महज 25 सीटें मिली थीं। सरकार बनाने से पार्टी चूक गई थी। और तो और, एक भी आदिवासी नेता भाजपा के टिकट पर चुन कर विधानसभा नहीं पहुंचा था। तब से ही भाजपा को इस बात का इल्म हो गया कि आदिवासियों की उपेक्षा कर मैदान मारना आसान काम नहीं । इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सीएम का चेहरा भले ही अभी जाहिर न किया जाए, लेकिन संगठन में आदिवासियों को प्रतिनिधित्व मिले। आदिवासी को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाने की चर्चा भाजपा के अंदरखाने चल रही है।

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