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पिछले 9 वर्षों में केंद्र ने क्वॉड और आई2यू2 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई
By EditorialPublished on
मोदी सरकार (Modi Government) ने जहां विदेश में हमारे स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया, वहीं संकट में नागरिकों की सुरक्षा का भी पूरा खयाल रखा है..... मोदी सरकार ने नौ साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान जिन क्षेत्रों में उसके कामकाज की गहरी छाप दिखी है, उनमें विदेश नीति भी शामिल है। नेबरहुड फर्स्ट और सागर जैसे नए नजरिए, क्वॉड और आई2यू2 जैसे समूहों के निर्माण और इंटरनैशनल सोलर अलांयस (International Solar Alliance) जैसी पहल से इसकी झलक मिलती है।

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एस जयशंकर
मोदी सरकार (Modi Government) ने जहां विदेश में हमारे स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए समान अवसर सुनिश्चित किया, वहीं संकट में नागरिकों की सुरक्षा का भी पूरा खयाल रखा है.....
मोदी सरकार ने नौ साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान जिन क्षेत्रों में उसके कामकाज की गहरी छाप दिखी है, उनमें विदेश नीति भी शामिल है। नेबरहुड फर्स्ट और सागर जैसे नए नजरिए, क्वॉड और आई2यू2 (I2U2) जैसे समूहों के निर्माण और इंटरनैशनल सोलर अलांयस (International Solar Alliance) जैसी पहल से इसकी झलक मिलती है। भारत को विकास यात्रा में जिम्मेदार साझेदार, मुसीबत के समय पहले मददगार और विकासशील देशों की विश्वसनीय आवाज के रूप में पहचाना जाने लगा है। यह ऐसे समय में हुआ है, जब दुनिया अस्थिरता और अनिश्चितता से गुजर रही है। दुनिया कई क्षेत्रों में जारी संघर्ष और बड़े देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता की मौजूदा स्थिति में भारतीय कूटनीति अपने हितों और मूल्यों के अनुरूप आगे बढ़ रही है। हमारी नीतियों और फैसलों की स्वतंत्रता ही हमारी पहचान बनी। इन नौ वर्षों में कई महत्वपूर्ण साझेदार देशों में भी काफी बदलाव देखने को मिले, लेकिन भारत ने सुनिश्चित किया कि ऐसे रिश्तों में पॉजिटिविटी बनी रहे।
महामारी से उपजी चुनौतियां
कोविड-19 महामारी हमारे दौर की युगांतकारी घटना रही है। इसने आर्थिक केंद्रीकरण (Economic centralization) और इससे उपजी अस्थिरता को रेखांकित किया, जो वैश्वीकरण की विशेषता बन गई है। इसलिए भरोसेमंद और फ्लेक्सिबल सप्लाई चेन का होना इन खतरों को कम करने के लिहाज से खासा अहम है। भारत (India) मेक इन इंडिया, गति शक्ति और पीएलआई जैसी योजनाओं के जरिए इन प्रयासों में शामिल है। मोदी सरकार की विदेश नीति वैश्विक स्तर पर अवसरों को खंगालने, क्षमताएं बढ़ाने, नई तकनीकें अपनाने और रोजगार के मौके बढ़ाने पर केंद्रित है ।
डिजिटल (Digital) क्षेत्र में हमारे बढ़ते कदमों ने पारदर्शिता बढ़ाई है और भरोसे से जुड़ी चिंताओं को कम किया है । खासकर कम्युनिकेशन, मोबिलिटी, एनर्जी और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में नई तकनीक को प्रमुखता मिल रही है। विभिन्न क्षेत्रों में हो रही महत्वपूर्ण खोजों के कारण उनमें प्रतिस्पर्धा भी बढ़ रही है ।
नॉलेज इकॉनमी जैसे-जैसे आबादी से उपजे दबावों को कम कर रही है, भारतीय टैलंट (Indian talent) की अहमियत बढ़ती जा रही है। एक ग्लोबल वर्कप्लेस की परिकल्पना करते हुए मोदी सरकार ने कई सारे मोबिलिटी एग्रीमेंट्स किए। वह जहां विदेश में हमारे स्टूडेंट्स और प्रफेशनल्स के लिए समान अवसर सुनिश्चित कर रही है, वहीं किसी तरह के संकट की स्थिति में उनकी सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रख रही है। वंदे भारत मिशन और ऑपरेशन गंगा व कावेरी इसके हालिया उदाहरण हैं ।
भारत आज दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। लेकिन इसके बढ़ते प्रभाव के पीछे ज्यादा बड़ी भूमिका विचारों और पहलकदमियों की है। चाहे क्लाइमेट के मोर्चे पर आगे बढ़कर कदम उठाने की बात हो या आतंकवाद का मुकाबला करने की, चाहे कनेक्टिविटी का मसला हो या समुद्री सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की, भारत ने दुनिया में इन मुद्दों पर विमर्श की दशा-दिशा तय करने के साथ नतीजों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दुनिया को प्रभावित करने का भारत का मुख्य तरीका है अपनी नीतियों और कार्यों से मिसाल पेश करना। जब हम कल्याणकारी योजनाओं का लाभ डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाते और इस तरह लीकेज खत्म करते हैं, रीन्यूएबल एनर्जी (Renewable energies) को प्रोत्साहित करते हुए बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाते हैं और बड़े पैमाने पर वैक्सीन बनाकर एक तरह का सेफ्टी नेट तैयार करते हैं तो ये दूसरे देशों के लिए मिसाल कायम होती है। वैक्सीन मैत्री से करीब 100 देशों को फायदा हुआ । इसने हमारे लिए सद्भाव बढ़ाने का काम किया। इसके अलावा 78 देशों में फैलीं हमारी 600 विकास परियोजनाएं हमारे अंतरराष्ट्रीय नजरिए की मिसाल बनी हुई हैं। यही नहीं, तुर्किये में भूकंप जैसी आपदा आने पर मदद लेकर सबसे पहले पहुंचना भी हमारी क्षमता को रेखांकित करता है।
भारत के बढ़ते कूटनीतिक कद की झलक इसकी सक्रियता के बढ़े हुए दायरे में भी देखी जा सकती है। न केवल बड़े साझेदारों से हमारी लगातार बातचीत चलती रहती है बल्कि अन्य देशों के साथ संबंधों पर भी बराबर नजर बनी रहती है। पिछले 9 वर्षों में उच्च स्तरीय संपर्कों में हुई बढ़ोतरी का हमारे पार्टनर देशों ने स्वागत किया है। यह बात जितनी श्रीलंका, नेपाल और खाड़ी देशों पर लागू होती है, उतनी ही अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका पर भी ।
इसमें कोई शक नहीं है कि विदेश नीति की शुरूआत हमारी सरहद से होती है। वहां जबर्दस्त तब्दीली दिख रही है। निकटतम पड़ोसियों के साथ उदार रवैया रखने और विभिन्न प्रॉजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़ाने का फल है कि दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग की भावना बढ़ रही है। यह नई सड़क, रेल और जल मार्ग संपर्क, फ्यूल पाइपलाइंस और बॉर्डर क्रॉसिंग सहूलियतों के रूप में हमारे सामने है। कोविड से जुड़ी चुनौतियों का मिल- जुलकर सामना करने की भारतीय रणनीति ने भी एकजुटता की भावना को मजबूती दी।
राष्ट्र सुरक्षा सबसे ऊपर
आर्थिक संकट से जूझते श्रीलंका (Sri Lanka) को भारत (India) की मदद भी इस मामले में अहम रही। हालांकि हमारा जोर विकास पर ही रहा है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां जब भी उभरीं हमने उनका पूरी ताकत से सामना किया। इसमें चीन को एकतरफा ढंग से यथास्थिति में बदलाव करने से रोकने के लिए सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती भी शामिल है और पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आतंकवाद पर रोक लगाने के लिए उठाए गए कदम भी ।
पद ग्रहण करते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी साहसिक विदेश नीति को लेकर अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी थी, जो तमाम हिचकिचाहटों और रूढ़ियों के पार जाती है। हमारी सरकार अब दसवें साल में प्रवेश करने जा रही है और इस राह पर हम यूं ही आगे भी बढ़ते रहेंगे। (लेखक विदेश मंत्री हैं)

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